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हमारे नायक

जोतीराव फुले का साहित्य कर्म
जोतीराव फुले ने समाज में व्याप्त अंधश्रद्धा, रूढ़िवादिता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विपुल लेखन किया। दलित-बहुजन समाज पर ब्राह्मण वर्ग द्वारा थोपी हुई मानसिक गुलामगिरी को स्‍पष्‍ट करने के लिए उन्होंने...
जोतीराव फुले, जिन्होंने उलट दी ब्राह्मणवादी मान्यताएं
फुले के सत्यशोधक समाज की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने सामाजिक सुधार को ‘ऊपर से नीचे’ की बजाय ‘नीचे से ऊपर’ की दिशा दी। अन्य सुधारक (राममोहन राय, केशवचंद्र सेन) ऊपरी वर्गों पर...
फुलेवाद के मूलभूत सिद्धांत एवं उनकी प्रासंगिकता (अंतिम भाग)
तात्यासाहेब ने अपने भाषण में और लेखन में हिंदू शब्द का ज्यादा इस्तेमाल नही किया। वे खुलकर जाति का नाम लेकर ही विश्लेषण करते हैं। उन्हें प्रबोधन के स्तर पर इस देश में जातीय ध्रुवीकरण...
जोतीराव फुले की वैचारिकी और उनका साहित्य
फुले ने साहित्य की पारंपरिक अवधारणा को ही चुनौती दी। उनके लिए साहित्य केवल सौंदर्य या रस का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का माध्यम था। यह दृष्टिकोण उस समय की प्रचलित ‘कलावादी’ धारणाओं से...
हिंदी पट्टी में इसलिए आवश्यक हैं जोतीराव फुले का जीवन-दर्शन और विचार
यह भी एक गंभीर तथ्य है कि 1857 के सिपाही विद्रोह को अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ भारत...
शब्बीर अहमद अंसारी : पसमांदा चेतना के अग्रदूत
शब्बीर अहमद अंसारी का जीवन सिद्ध करता है कि सामाजिक सुधार नारों से नहीं, बल्कि संवैधानिक समझ से...
फुलेवाद के मूलभूत सिद्धांत एवं उनकी प्रस्तावनाएं (पहला भाग)
जमीनी संघर्ष के लिए फुलेवाद शुद्ध वर्गीय संगठन का मार्ग स्वीकार करता है। फुले के शिष्य भालेराव किसान...
‘फाउंडिंग फादर ऑफ इंडिया’ सम्राट असोक, देश-दुनिया के इतिहासकारों की नजर में
इतिहासकार विलियम डैलरिम्पल असोक की अद्वितीयता के बारे में लिखते हैं कि “अशोक के अनोखे स्तंभ बताते हैं...
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