बाबू रामसहाय चौधरी जब 8 वर्ष के थे, उन्होंने अपनी माता उम्मेदा देवी को मंदिर प्रवेश हेतु सवर्ण समाज द्वारा अपमानित होते देखा-सुना। तभी से उनके मन में शूद्रों के सम्मान व विकास की भावना...
डॉ. लोहिया, पेरियार ई.वी. रामासामी और जगदेव प्रसाद – तीनों ने ही समाजवाद को भारतीय सामाजिक यथार्थ के अनुसार परिभाषित किया, लेकिन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि अलग होने के कारण उनके समाजवाद का चरित्र मौलिक...
जगदेव प्रसाद की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि जिन्हें व्यापक शोषित समाज की आवाज के रूप में पढ़ा जाना चाहिए, उन्हें कई बार जाति-विशेष के नेता में सीमित कर दिया जाता है। यह केवल...
जिन मांगों को लेकर 5 सितंबर, 1974 को अरवल जिला के कुर्था प्रखंड कार्यालय के समक्ष शोषित समाज दल के बैनर तले किए जा रहे सत्याग्रह के क्रम में पुलिस की गोली से जगदेव बाबू...