जोतीराव फुले ने समाज में व्याप्त अंधश्रद्धा, रूढ़िवादिता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विपुल लेखन किया। दलित-बहुजन समाज पर ब्राह्मण वर्ग द्वारा थोपी हुई मानसिक गुलामगिरी को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने...
फुले के सत्यशोधक समाज की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने सामाजिक सुधार को ‘ऊपर से नीचे’ की बजाय ‘नीचे से ऊपर’ की दिशा दी। अन्य सुधारक (राममोहन राय, केशवचंद्र सेन) ऊपरी वर्गों पर...
तात्यासाहेब ने अपने भाषण में और लेखन में हिंदू शब्द का ज्यादा इस्तेमाल नही किया। वे खुलकर जाति का नाम लेकर ही विश्लेषण करते हैं। उन्हें प्रबोधन के स्तर पर इस देश में जातीय ध्रुवीकरण...
फुले ने साहित्य की पारंपरिक अवधारणा को ही चुनौती दी। उनके लिए साहित्य केवल सौंदर्य या रस का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का माध्यम था। यह दृष्टिकोण उस समय की प्रचलित ‘कलावादी’ धारणाओं से...