बामसेफ का राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न

पुणे में सन् 1973 में कांशीराम और डीके खापर्डे द्वारा स्थापित आल इंडिया बेकवर्ड (एससी, एसटी व ओबीसी) एण्ड माइनोरिटी (धर्मांतरित) एम्पलाईज फेडरेशन जिसे बामसेफ के नाम से जाना जाता है। आज यह तीन प्रमुख गुटों में विभाजित है -संपादक

बामसेफ (मेश्राम) का 29वां राष्ट्रीय अधिवेशन पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन में 22 से 26 दिसंबर तक आयोजित हुआ। अधिवेशन में भारत के 500 जनपदों और 4500 विकास खंड के लोगों ने बढ-चढकर हिस्सा लिया। सम्मेलन में बामसेफ सदस्यों के अलावा इसके सहयोगी संगठनों, राष्ट्रीय मूल निवासी संघ और भारत मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी शामिल थे। पांच दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के उदघाटन सत्र की शुरुआत छत्रपति शाहूजी महाराज के वंशज संभाजी राजे के उदबोधन से हुई।

अधिवेशन के पहले दिन ‘भारत में लोकतंत्र है अथवा नौटंकीतंत्र’ पर गंभीर बहस हुई, जिसमें पूर्व न्यायाधीश सभाजीत यादव, चारुबेन चौहान व कंचनलता लांजेवर ने अपने-अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दूसरे दिन ब्राहम्णवादी मीडिया और जनगणना अधिकारियों के मुददे पर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए गए। इसके अलावा भारत के विभाजन के लिए मुसलमानों को दोषी करार देने संबंधी मुददे पर भी चर्चा की गई। साथ ही मुसलमानों के अलगाव को समाप्त करने के लिए एससी, एसटी व ओबीसी के साथ उनका संयुक्त मोर्चा बनाने के मुद्दे पर अनेक प्रबुद्धजनों ने जोर दिया। तीसरे दिन के सत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण देने परंतु पिछड़े वर्गों को न देने को एक गंभीर षडयंत्र करार देते हुए और भारत सरकार की नक्सली नीति पर सवाल खड़े करते हुए विभिन्न प्रांतों के वरिष्ठ लोगों ने अपनी बातें रखीं। कार्यक्रम का चौथा एवं पांचवां दिन विशेष रूप से बामसेफ द्वारा संरक्षित भारत मुक्ति मोर्चा के नाम रहा, जिसमें भारत में राष्ट्रव्यापी जनांदोलन के निर्माण पर बल दिया गया। इस सत्र में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एचएस कपाडिय़ा के इस बयान कि न्यायपालिका को संवैधानिक दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए, इससे बाहर जाकर कार्य नहीं करना चाहिए पर गहन चर्चा की गई, जिसमें राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आरके अकोदिया ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से सोचने-समझने एवं इसके सभी पहलुओं को जानने की जरूरत है। सभी सत्रों की अध्यक्षता कर रहे बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने कहा कि भ्रष्टाचार, गरीबी, भुखमरी व सांप्रदायिकता गंभीर समस्याएं बन गई हैं, जिनके कारण देश का लगातार पतन हो रहा है। मेश्राम ने समस्त कार्यकर्ताओं से व्यवस्था परिवर्तन के लिए जनांदोलन को आगे बढाने का भी आह्वान किया।

वहीं बामसेफ (बोरकर) का 29वां राष्ट्रीय अधिवेशन राष्ट्रपिता जोतिबा फुले नगर, पीपली रोड, कुरुक्षेत्र में 25 से 28 दिसंबर तक आयोजित किया गया। कार्यक्रम के उदघाटन सत्र के पहले दिन अन्य पिछड़े वर्ग को पदोन्नति में प्रतिनिधित्व के विषय पर चर्चा हुई। इस विषय पर बीडी बोरकर, एन गंगाधर, देवनारायण सिंह यादव, विक्रम सिंह पवार व केएस चौहान ने अपनी बात रखी। अधिवेशन के दूसरे दिन मूल निवासी मुस्लिम एवं आदिवासियों के बीच सांप्रदायिक दंगे-मूल निवासियों को विभाजित करने की ब्राहम्णवादी साजिश पर गंभीरपूर्वक मंथन का दौर चला। इस विषय पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए वक्ताओं ने अपनी बात रखी। इसके अलावा, संगठन में अनुशासन और मर्यादा कायम रखने पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम के तीसरे दिन भारत को हिन्दुस्तान कहना क्या राष्ट्रद्रोह है ? विषय पर चर्चा हुई। इस विषय पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विवेक कुमार के अलावा डा. अजीत चहल, एसके आनंद और कैलाश चंद्र ने अपनी बात को जोरदार तरीके से रखा। अधिवेशन के प्रबोधन सत्र में वर्तमान ब्राम्हमणवादी शिक्षा नीति को मूल निवासी बहुजनों के साथ धोखा करार देते हुए हेमराज सिंह पटेल ने इस शिक्षा नीति को भिक्षा नीति का नाम देकर मूल निवासियों से इसके विरोध में आवाज उठाने का आहवान किया। इसके अलावा पत्रकार एवं विश्लेषक निखिल आनंद ने आरक्षण के नाम पर चल रही वर्तमान राजनीति से अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक धु्रवीकरण एवं घटते प्रतिनिधित्व से होने वाली समस्या पर प्रकाश डाला। समापन सत्र को संबोधित करते हुए बामसेफ के राष्ट्रीय महासचिव डीआर आर्या एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक परमार ने सभी मूल निवासियों से जमीनी आधार पर सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई लडऩे का आहवान करते हुए सभी को धन्यवाद कहा।

बामसेफ (तारा राम मेहना) का राष्ट्रीय अधिवेशन संत कबीर नगर, बीएमसी मैदान, घाटकोपर, मुंबइ्र्र में 25 से 29 दिसंबर तक आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मूल निवासियों की वर्तमान समस्या पर चर्चा हुई एवं जमीनी तौर पर ब्राहम्णवाद के खिलाफ संघर्ष करने का आहवान किया गया। पांच दिन के इस कार्यक्रम की अध्यक्षता तारा राम मेहना (बामसेफ, राष्ट्रीय अध्यक्ष) ने की एवं वीर सिंह (केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य) ने समग्र रूप से कार्यक्रम को आयोजित करवाने में अहम भूमिका निभाई एवं सभी बामसेफ सदस्यों का अभिवादन करते हुए मूल निवासियों से व्यवस्था परिवर्तन के लिए निर्णायक संघर्ष करने को कहा।

(फारवर्ड प्रेस के फरवरी, 2013 अंक में प्रकाशित)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

About The Author

Reply