जाट आरक्षण पर विरोध के स्वर

हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने गत 22 जनवरी को हरियाणा में सवर्णों समेत सभी जातियों के लिए भी ‘आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण’ की घोषणा कर दी। हरियाणा सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश के अनुसार, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 10 प्रतिशत का आरक्षण वर्टिकल होगा, होरिजेंटल नहीं

आर्थिक आधार पर आरक्षण के अतिरिक्त हरियाणा सरकार जाट समेत पांच जातियों (जाट, जाट सिख, रोड़, त्यागी और विश्नोई) को विशेष पिछड़ा वर्ग नाम से 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा कर चुकी है। यह आरक्षण हरियाणा में ओबीसी को मिल रहे 27 फीसदी आरक्षण के अतिरिक्त होगा। इस प्रकार, हरियाणा में अब कुल 67 फीसदी (10 फीसदी आर्थिक आरक्षण, 10 फीसदी विशेष पिछड़ा वर्ग आरक्षण, 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण व 20 फीसदी अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण) आरक्षण का प्रावधान होगा। जाट आरक्षण नाम से चर्चित ‘विशेष पिछड़ा वर्ग’ को गैर जाट राजनीति करने वाले राजनेताओं की ओर से कड़ी चुनौती मिल रही है। यहां हरियाणा के दो गैर जाट नेताओं की टिप्पणियां दी जा रहीं हैं, जिसे फारवर्ड प्रेस के प्रमुख संवाददाता अमरेंद्र कुमार आर्य ने बातचीत के आधार पर तैयार किया है।

सत्ता में आए तो खत्म कर देंगे विशेष आरक्षण

रामविलाश शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, हरियाणा

हरियाणा की कांग्रेस सरकार के मुखिया भूपेंद्र सिंह हुडडा को किसी भी वर्ग के लिए हमदर्दी नहीं है। वे केवल वोट की राजनीति कर रहे हैं। आरक्षण को लेकर हमारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी की सोच एकदम स्पष्ट है। हम जाति आधारित आरक्षण की बात नहीं करते हैं। बाबा साहब आंबडेकर ने दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था लेकिन अफसोस है कि आरक्षण हरियाणा सहित पूरे देश में एक राजनीतिक मुद्दा बनकर रह गया। आज हरियाणा में भी जाट आरक्षण के नाम पर सब अपनी रोटी सेंकने का काम कर रहे हैं। वास्तव में जाट समुदाय हरियाणा का सबसे बड़ा परिवार है। यह भोली-भाली कौम है। इसको हुडडा सरकार बरगला कर केवल अपना काम निकाल रही है। भाजपा की सरकार अगर सत्ता में आती है तब हम हुडडा सरकार द्वारा लागू किए गए जाट व अन्य जातियों के विशेष आरक्षण को खत्म कर देंगे। आरक्षण की पात्रता को चिन्हित करने के लिए भाजपा सरकार नई कमिटी का गठन करेगी। हम जाट व आरक्षण के पात्र अन्य जातियों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देंगे।

चौधरी देवीलाल के समय से लेकर आज तक आरक्षण के नाम पर केवल जाटों से सड़क जाम करवाया गया या रेलवे की पटरियों पर लकड़ी डाल रेलवे यातायात को बाधित करवाया गया है। आज राज्य में किसानों के सामने अनेक समस्याएं खड़ी हैं। सरकार किसानों की जमीन गैर-कानूनी ढ़ंग से अधिग्रहित कर रही है। किसानों को आज अधिग्रहित जमीन का मुआवजा चाहिए तो मुआवजा के नाम पर स्पेशल कोटा में आरक्षण का लॉलीपॉप देकर ध्यान बंटाने का काम कर रही है। फरीदाबाद में सरकार ने सोनिया गांधीे और उनके संबंधियों को अवैध रूप से जमीन देकर करोड़ों की जमीन का बंदरबाट कर दिया। जब इस ओर राज्य की जनता अपना ध्यान एकत्रित कर ही रही थी तो सरकार ने सामाजिक समरसता के बीच कृषक और गैर कृषक समाज को मुद्दे से भटकाने के लिए जाट आरक्षण का लॉलीपॉप थमा दिया।


बैकलॉग को जाटों से भरने की साजिश

वेदपाल तंवर, अध्यक्ष, सर्वसमाज संघर्ष समिति, हरियाणा

जाटों का अलग कोटा बनाकर स्पेशल आरक्षण देना साफ तौर पर गलत है। हरियाणा में जाट न तो सामाजिक और न ही शैक्षणिक स्तर पर पिछड़े हैं। आर्थिक स्तर पर तो वे अन्य जातियों से भी काफी अगड़े हैं। हरियाणा में जाट कभी भी पिछड़े नहीं थे। यहां के 99 प्रतिशत जल, जमीन पर जाटों का ही कब्जा है। यह एक साजिश है, पिछड़ों के खिलाफ। पिछले कई सालों से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर बहाली के लिए सरकार द्वारा भर्ती नहीं निकाली गई। अब जब यहां ओबीसी बैकलॉग यानी ओबीसी उम्मीदवारों के लिए खाली पदों की संख्या 1 लाख 25 हजार के आस-पास पहुंच गई तो हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा एक साजिश के तहत जाटों को 10 प्रतिशत अलग से विशेष आरक्षण का कोटा बनाकर आरक्षण देने की कोशिश कर रहे हैं ताकि यह एकमुश्त बैकलॉग जाटों से भरा जा सके। आगे एक और भी साजिश रची जाने की संभावना बलवती हो रही है। आज सरकार विशेष कोटा बना रही है और कल इसे अन्य पिछड़ा वर्ग के कोटे में ही शामिल कर सकती है। देश के अन्य हिस्सों में रह रहे ओबीसी समाज के लोगों को एक बात और याद रखनी चाहिए कि आज हरियाणा में जो जाट राजनेता आरक्षण के लिए मर-मिटने को तैयार हैं, कभी ये ही आरक्षण मात्र को लागू नहीं होने देने के लिए जान की बाजी लगा रहे थे। पिछले दिनों राज्य सरकार के इशारे पर हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग नेे जाटों की राजनीतिक और शैक्षणिक स्थिति जानने के लिए जो कमिटी बनाई थी, वह पूरी तरह फर्जी थी। इस रिपोर्ट को बनाने वाले जाट समाज के ही अधिकारी व कथित विशेषज्ञ थे। इन लोगों ने बिना क्षेत्र में गए और घर और कार्यालय में बैठे-बैठे ही रिपोर्ट तैयार कर दी।

आरक्षण दलित, अन्य पिछड़ों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए जरूरी है। लेकिन हरियाणा की जाट सरकार दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग को हमेशा दबाती रही है। वह इन्हें आगे भी दबाए रखने के लिए इस तरह का चक्रव्यूह रच रही है लेकिन हम इस कुचक्र को रचने नहीं देंगे। आरक्षण के नाम पर गुमराह कर रही है सरकार।


सभी सामान्य जातियों को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण

हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने गत 22 जनवरी को हरियाणा में सवर्णों समेत सभी जातियों के लिए भी ‘आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण’ की घोषणा कर दी। हरियाणा सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश के अनुसार, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 10 प्रतिशत का आरक्षण वर्टिकल होगा, होरिजेंटल नहीं। चंडीगढ स्थित हरियाणा सरकार के जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने फारवर्ड प्रेस को बताया कि यह आरक्षण समाज के सभी तबकों के लिए उपलब्ध होगा, जिसमें ब्राह्मण और राजपूत भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आरक्षण की वर्टिकल/होरिजेंटल परिभाषा का खुलासा अभी सरकार ने नहीं किया है। इस बारे में बाद में जानकारी दी जाएगी। इस बारे में हरियाणा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक अशोक कुमार ने भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही।

बहरहाल, राज्य सरकार की इस घोषणा पर दलित-ओबीसी तबके की ओर से विरोध शुरू हो गया है। बामसेफ (परमार) की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य व हरियाणा प्रभारी सुरेश द्रविड़ ने इसे भारतीय संविधान के विरोध में बताते हुए कहा कि संविधान में सिर्फ सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर आरक्षण देने का प्रावधान है। हरियाणा सरकार के आर्थिक आधार पर आरक्षण के फैसले का कड़ा विरोध किया जाएगा।

(फारवर्ड प्रेस के फरवरी, 2013 अंक में प्रकाशित)


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