10 दिन 5 आयोजन, एक मांग : हमारी जाति का हो प्रधानमंत्री!

कौन पिछड़ा और कौन अति पिछडा की पहेली का हल नीतीश कुमार चाहे जब करें लेकिन इतना तो तय है कि बिहार में धड़ल्ले से अयोजित हो रहे जाति सम्मेलनों ने नीतीश कुमार की चिंताएं बढा दी हैं

बिहार की राजधानी पटना में हाल में 10 दिनों के अंदर पांच महत्वपूर्ण आयोजन हुए। इनमें से एक धोबी महासम्मेलन घोषित रूप से जाति-आधारित था, बाकी चार सम्मेलन भी जाति-आधारित थे। लेकिन अघोषित रूप से। महापुरुषों के नाम पर आयोजित इन चार आयोजनों में भी खुलकर जाति आधारित राजनीति हुई। इन सम्मेलनों के बहाने जदयू-बीजेपी के बीच पावर वार जमकर चला और मुख्य रूप से यह मांग सामने आई कि अगला पीएम वैश्य जाति या अति पिछड़ा समुदाय से होना चाहिए।

20 और 21 अप्रैल को हुए धोबी महासम्मेलन में धोबियों के बड़े वोट बैंक का शक्ति-प्रदर्शन जदयू नेता और बिहार सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री श्याम रजक के नेतृत्व में हुआ। सम्मेलन में न्यायपालिका और निजी क्षेत्र में आनुपातिक आरक्षण देने की मांग की गई। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम रजक ने साफ.-साफ  कहा कि कोटा नहीं दिया तो कपड़े की तरह धो देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि धोबी समुदाय को अनुसूचित जाति के तहत आरक्षण देने का मामला लोकसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में सभी राजनीतिक दल शामिल करें। आंध्र प्रदेश के सत्य नारायण वसवा ने मांग की कि बिहार सरकार को आंध्र सरकार की तर्ज पर धोबियों के लिए वाशरमैन कोऑपरेटिव फेडरेशन बनाना चाहिए और धोबियों को स्वरोजगार के लिए डेढ़ लाख रुपये की सहायता दी जानी चाहिए, जिसमें से आधी राशि अनुदान की हो। महाराष्ट्र के विजय भोंसले ने केन्द्र सरकार से लांड्री और वाशिंग टेक्नोलॉजी का कोर्स शुरू करने की मांग की, जिससे रेलवे, होटलों और बड़े अस्पतालों जैसी जगहों में धोबियों के लिए अवसर के दरवाजे खुलेंगे।

बीजेपी नेताओं की ओर से 22 अप्रैल को बाबू कुंवर सिंह विजयोत्सव पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में मनाया गया। बाबू कुंवर सिंह राजपूत थे। दूसरे दिन इसी जगह पर जदयू नेताओं की ओर से विजयोत्सव मनाया गया। 22 अप्रैल के आयोजन में तो बीजेपी ने कुंवर सिंह को अपने चुनाव निशान कमल से ही निकलता दिखा दिया। सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने केन्द्र को निशाने पर लिया और कहा कि 2013 में ही केन्द्र सरकार की तेरहवीं होगी। उन्होंने नरेन्द्र मोदी की जगह लालकृष्ण आडवाणी की तारीफ कर अगले पीएम पद की दौड़ मे आडवाणी को भी शामिल किया। पीएचईडी मंत्री चंद्रमोहन राय का गुस्सा इस बात को लेकर रहा कि महापुरुषों की जयंती या विजयोत्सव को लोग जाति से जोड़कर क्यों देखते हैं। बीजेपी नेताओं ने क्षेत्रीय पार्टियों के बहाने बिहार में अपने गठबंधन साथी जदयू पर खूब निशाना साधा। बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री राजीव प्रताप रूडी ने तो यहां तक चेतावनी दे डाली कि जो कांग्रेस के साथ जाएगा जनता उसे माफ  नहीं करेगी। दूसरे दिन का आयोजन जदयू की ओर से था। जदयू ने भी जवाबी तीर छोड़े। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी से कहा, क्षेत्रीय पार्टियां आज भारत की राजनीति का सच हैं। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलवाने की मुहिम में लगे नीतीश कुमार ने 2014 के चुनाव का मुख्य एजेंडा विशेष राज्य की मांग को घोषित किया। शिक्षा मंत्री पीके शाही ने कुंवर सिंह पर शोध कराने पर जोर दिया तो सांसद मीना सिंह ने संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव रखा।

वीर शिरोमणि बाबा चौहरमल जयंती 26 अप्रैल को बीजेपी की ओर से मनाई गई। वे दुसाध जाति के थे। इस मौके का इस्तेमाल उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एनडीए के भीतर उपजी ताजा खटास को कम करने के लिए किया। उन्होंने कहा, क्षेत्रीय दलों को नजरंदाज नहीं कर सकते। कितनी भी हम कोशिश कर लें, देश में दो दलीय राजनीति नहीं हो सकती। लेकिन लगे हाथ यह भी कह दिया कि देश का अगला पीएम बीजेपी का होगा। इस मौके पर कई नेताओं ने नीतीश कुमार की इसलिए खिंचाई की कि बिहार सरकर ने महादलित से दुसाध जाति को अलग कर रखा है। इस आयोजन में सुशील कुमार मोदी लोगों को ये समझाने में लगे रहे कि महादलित और दलित दोनों को बिहार सरकार बराबर सुविधाएं दे रही हैं।

वीर भामाशाह जयंती, 30 अप्रैल को पटना में मनाई गई। वैश्य जैन परिवार में जन्मे भामाशाह राणा प्रताप के मित्र थे और धन-बल से उन्होंने उनकी बड़ी मदद की थी। वैश्यों के 22 फीसदी वोट बैंक की हिस्सेदारी का सवाल यहां गूंजा। कहा गया कि दो-तीन फीसदी वोट बैंक वाले नेता चांदी काट रहे हैं और अभी भी आबादी के हिसाब से राजनीति में हिस्सेदारी नहीं मिल रही वैश्यों को। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने खुद स्वीकारा कि देश के बाकी राज्यों की तरह बिहार के व्यवसायी संगठित नहीं हैं। पर्यटन मंत्री सुनील कुमार पिंटू की चिंता ये रही कि तेली जाति को बिहार सरकार अति पिछड़ा वर्ग में शामिल क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने नीतीश कुमार की उपस्थिति में उनसे विधानमंडल में वैश्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी की भी मांग रखी। इस आयोजन से यह भी बात निकली कि पीएम के पद पर किसी वैश्य जाति के नेता को पहुंचना चाहिए। यह कहा बीजेपी विधायक संजय सरावगी ने। सरावगी का इशारा नरेन्द्र मोदी की ओर था।

इस आयोजन के कुछ दिन बाद ही बीजेपी अति पिछड़ा प्रकोष्ठ की बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कोई अति पिछड़ा ही देश का अगला पीएम होगा। फिर से इशारा नरेंद्र मोदी की तरफ था। नरेंद्र मोदी घांची जाति से आते हैं। सुशील कुमार मोदी को नीतीश कुमार का पिछलग्गू समझने वाले जदयू को शायद उनके मुंह से ऐसे बयान की उम्मीद नहीं रही होगी। इस बयान के बाद बीजेपी अति पिछड़ा वोट बैंक जो बिहार में लगभग 35 फीसदी है को अपनी ओर करने में लग गई है। सुशील कुमार मोदी का ये बयान नीतीश कुमार को भी ठीक नहीं लगा। उन्होंने जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के प्रेस कांफ्रेंस में बयान दिया कि समय आने पर पता चल जाएगा कि कौन पिछड़ा है और कौन अति पिछड़ा।

बहरहाल, कौन पिछड़ा और कौन अति पिछडा की पहेली का हल नीतीश कुमार चाहे जब करें लेकिन इतना तो तय है कि बिहार में धड़ल्ले से अयोजित हो रहे जाति सम्मेलनों ने नीतीश कुमार की चिंताएं बढा दी हैं, क्योंकि इन सम्मेलनों के माध्यम से उनका एक्सक्लूासिव अति पिछड़ा और महादलित वोट बैंक उनके हाथ से फिसलकर भारतीय जनता पार्टी की ओर जाता दिखाई दे रहा है।

(फारवर्ड प्रेस के जून 2013 अंक में प्रकाशित)

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