‘शूद्र होने पर गर्व’

लोकतंत्र के चारो स्तंभों कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका व मीडिया में शूद्रों के प्रभावकारी प्रतिनिधित्व की मुहीम चलानी चाहिए

पटना। डा. आम्बेडकर के निर्वाण दिवस पर पटना में सामाजिक और आर्थिक बदलाव के साथ सम्मान व हिस्सेदारी की लड़ाई को तेज करने का संकल्प लिया गया। इसके साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि शूद्र नाम से परहेज करने के बजाय उस पर गर्व करना चाहिए। शूद्रों को हीनताबोध से मुक्त भी होना होगा। सामाजिक संस्था ‘बागडोर मिशन 341’ की अगुवाई में शूद्र सम्मेलन का आयोजन एसके मेमोरियल हॉल में किया गया। इसकी अध्यक्षता शशिकांत महाराज ने की।

मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार के वित्तमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा, हमारी सामाजिक व्यवस्था में भेदभाव व्याप्त है। इससे मुकाबले के लिए शिक्षा के साथ आर्थिक राजनीतिक सांस्कृतिक क्षेत्र में पहल की आवश्यकता है। लोकतंत्र के चारो स्तंभों कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका व मीडिया में शूद्रों के प्रभावकारी प्रतिनिधित्व की मुहीम चलानी चाहिए। यादव ने इसके लिए बड़े आंदोलन बदलाव और क्रांति पर बल दिया, ‘मिशन 341’ के बैनर तले आंदोलन चला रहे और शूद्र सम्मेलन के संयोजक पूर्व सांसद डा. एजाज अली ने कहा कि भारतीय संविधान की धारा 341 के तहत मुसलमान व ईसाई दलितों को आरक्षण नहीं दिया गया है, जबकि मुसलमान व ईसाई धर्मावलम्बियों में भी हिन्दू अनुसूचित जाति के समान आर्थिक व सामाजिक पृष्ठभूमि वाली जातियां मौजूद हैं। उन्हें भी अनुसूचित जाति की सुविधाएं दी जानी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता अरुण कुशवाहा ने कहा कि उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय में जजों की नियुक्ति में आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछड़े व दलित वर्ग के हजारो अधिवक्ता जज बनने की पूरी योग्यता रखते हैं, लेकिन जातीय भेदभाव के कारण उन्हें मौका नहीं दिया जाता है। सम्मेलन को मो. मतलूब रब, बागडोर से संतोष यादव सहित मनीष रंजन, अरुण नारायण आदि ने भी संबोधित किया।

(फारवर्ड प्रेस के जनवरी, 2015 अंक में प्रकाशित)


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