h n

याद किये गये शहीद जगदेव

बिहार के लेनिन के नाम से चर्चित शहीद जगदेव प्रसाद की जयंती के अवसर पर बिहार के अरवल जिलान्तर्गत कुर्था प्रखंड कार्यालय परिसर में 2 से 4 फरवरी तक राष्ट्रीय शहीद जगदेव मेला, 'शोषित समाज दल' के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. जयराम प्रसाद सिंह कुशवाहा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ

img_0451कुर्था (बिहार), लुधियाना (पंजाब): बिहार के लेनिन के नाम से चर्चित शहीद जगदेव प्रसाद की जयंती के अवसर पर बिहार के अरवल जिलान्तर्गत कुर्था प्रखंड कार्यालय परिसर में 2 से 4 फरवरी तक राष्ट्रीय शहीद जगदेव मेला, ‘शोषित समाज दल’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. जयराम प्रसाद सिंह कुशवाहा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।

मेले का उद्घाटन करते हुए सामाजिक और मानववादी संगठन ‘अर्जक संघ’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस आर. सिंह और अन्य वक्ताओं ने शहीद जगदेव प्रसाद के जीवन और कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि आजादी के बाद पहली बार 25 अगस्त, 1967 को पटना में ‘शोषित दल’ की स्थापना करके जगदेव बाबू ने दस और नब्बे का दर्शन दिया और कहा कि पिछड़ों दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को एक कर देश की सत्ता हासिल की जा सकती है। मेले में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर लुधियाना में भी सम्राट अशोक क्लब की ओर से समारोह आयोजित किया गया और विशाल शोभायात्रा निकाली गई जो पिप्पल चौक से अम्बेडकर नगर, अजीत नगर, सरपंच कॉलोनी, ग्यासपुर पार्क व सुरजीत नगर से होकर हरगोविन्द स्कूल तक गई। कार्यक्रम में लुधियाना के सामाजिक कार्यकतार्ओं ने जगदेव प्रसाद के कार्यों का श्रद्धा से याद किया। इस अवसर पर सुदर्शन बौद्ध, राज कुशवाहा, महेश चौहान, राज कुमार वकील, डॉ राम चन्दर, रविंदर कुमार, राम कृपाल वर्मा, एपी मौर्या, बद्री वर्मा शैलेन्द्र प्रेमी व राहुल कुमार सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। -उपेंद्र पथिक, राजेश मंचल

(फारवर्ड प्रेस के मार्च, 2015 अंक में प्रकाशित )


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, संस्कृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +919968527911, ईमेल : info@forwardmagazine.in

लेखक के बारे में

उपेन्द्र पथिक

सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार उपेंद्र पथिक अर्जक संघ की सांस्कृतिक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। वे बतौर पत्रकार आठवें और नौवें दशक में नवभारत टाइम्स और प्रभात खबर से संबद्ध रहे तथा वर्तमान में सामाजिक मुद्दों पर आधारित मानववादी लेखन में सक्रिय हैं

संबंधित आलेख

वो आखिरी पल जब सूर्यास्त हुआ एक महानायक का
सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर जब रत्तु जी को लिये कार बाबा साहेब के घर में प्रविष्ट होती है तो श्रीमती सविता आंबेडकर...
सन् 1938 का महिला सम्मलेन, जिसमें रामासामी को स्त्रियों ने दी ‘पेरियार’ की उपाधि
महिलाएं केवल पेरियार की प्रशंसक नहीं थीं। वे सामाजिक मुक्ति के उनके आंदोलन में शामिल थीं, उसमें भागीदार थीं। उनके नेतृत्व में सम्मलेन का...
लो बीर सेन्द्रा : जयपाल सिंह मुंडा के बहुआयामी व्यक्तित्व के नए पहलुओं से पहचान कराती पुस्तक
हाल में पुनर्प्रकाशित अपने संस्मरण में जयपाल सिंह मुंडा लिखते हैं कि उन्होंने उड़ीसा के गोरूमासाहिनी एवं बदमपहर में टाटा समूह द्वारा संचालित लौह...
गिरते स्वास्थ्य के बावजूद नागपुर और चंद्रपुर के बाद बंबई में दीक्षा कार्यक्रम में भाग लेना चाहते थे बाबा साहब
बाबा साहब आंबेडकर ने अपने स्वास्थ्य को दांव पर लगा कर किताबें क्यों लिखीं? उन्होंने ऐसे अनेक कार्यक्रमों में भाग क्यों लिया जिनमें बड़ी...
वायकोम सत्याग्रह : सामाजिक अधिकारों के लिए पेरियार का निर्णायक संघर्ष
गांधी, पेरियार को भी वायकोम सत्याग्रह से दूर रखना चाहते थे। कांग्रेस गांधी के प्रभाव में थी, किंतु पेरियार का निर्णय अटल था। वे...