h n

दलित बहुजन पेज 3 : फरवरी 2016

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने 10 जनवरी को 'विश्व हिन्दी दिवस' के अवसर पर डीजी वैष्णव कॉलेज में तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सुनील कुमार परीट को 'सुरेशचंद्र कुशवाहा सहस्राक्ष सम्मान' से सम्मानित किया

डॉ. सुनील परीट सम्मानित

चेन्नई : पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने 10 जनवरी को ‘विश्व हिन्दी दिवस’ के अवसर पर डीजी वैष्णव कॉलेज में तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सुनील कुमार परीट को ‘सुरेशचंद्र कुशवाहा सहस्राक्ष सम्मान’ से सम्मानित किया। कार्यक्रम में अकादमी अध्यक्ष रमेश गुप्त नीरद, महासचिव डॉ. मधु धवन, पी. हरिदास, डॉ. पी. के. बालसुब्रह्मण्यन, राजलक्ष्मी राजन आदि उपस्थित थे। डॉ. सुनील परीट, कर्नाटक के प्रसिद्ध हिन्दी-कन्नड़ साहित्यकार व हिन्दी प्रचारक हैं। उन्हें अभी तक 60 से अधिक सम्मान-पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उनकी छ: पुस्तकें प्रकाशित हैं।

sunil-parit-1-1024x768

अधिवेशन में आए बड़ी संख्या में मूलनिवासी

हैदराबाद : बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूल निवासी संघ का 32वाँ एवं भारत मुक्ति मोर्चा का 5वाँ संयुक्त राष्ट्रीय अधिवेशन 25 से 29 दिसंबर 2015 तक हैदराबाद (तेलांगना) नें संपन्न हुआ, जिसमें देश भर से बड़ी संख्या में मूलनिवासी बहुजन समाज के लोगों ने भाग लिया।

bamsef_dhanbad-1-e1479154870644

आबादी के अनुरूप आरक्षण की मांग

भदोही (उत्तरप्रदेश) : 52 प्रतिशत ओबीसी के लिए 52 प्रतिशत आरक्षण की मांग सहित 12-सूत्रीय मांगों को लेकर बहुजन मुक्ति पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के संयुक्त बैनर तले एक दिवसीय धरने का आयोजन यहाँ किया गया। 16 जनवरी को यह धरना डा. विनोद सम्राट मौर्य, डा. महेंद्र कुमार गोंड और आरपी मौर्य के नेतृत्व में दिया गया। मांगें जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को भेजी गईं। -विनय कुमार

(फारवर्ड प्रेस के फरवरी, 2016 अंक में प्रकाशित )

लेखक के बारे में

एफपी डेस्‍क

संबंधित आलेख

नई पीढ़ी के आंदोलन की भाषा का समाजशास्त्रीय पहलू
हमने हिटलर को नहीं देखा है। उसके बारे में सुना और पढ़ा है। लेकिन हम जो तानाशाही, फासीवाद आज महसूस करते हैं, उसके मद्देनजर...
‘जय भीम’ का नारा लगा युवा पीढ़ी ने दी ‘जय श्रीराम’ के मनुवादी संस्कृति को चुनौती
वामपंथियों को केवल मार्क्स मंजूर थे; फुले, शाहू, आंबेडकर और पेरियार नहीं। उनके दिमागी जहर को निकालने का प्रभावी काम जंतर-मंतर पर पूरे देश...
हाथरस में फिर एक दलित की हत्या या महज दुर्घटना, उठ रहे सवाल
मृतक के पिता का कहना है कि उनके बेटे सनी की हत्या मुख्य आरोपी बनी सिंह की लापरवाही की वजह से नहीं हुई। यह...
अन्ना और सीजेपी के आंदोलन का फर्क
भाजपा को खुद का भरोसा टूट गया है कि आंदोलनों, लोकतांत्रिक विरोध को वह मैनेज कर सकती है। लोगों पर ज्यादती, जुल्म, दमन की...
‘जय भीम’ की राजनीतिक दिशा क्या होगी?
जंतर-मंतर पर जब शुरुआती दौर में नारे लगे तो केवल दो नारे थे– ‘जय भीम’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे। बाकी सभी तरह के...