बाबा साहब के महापरिनिर्वाण दिवस पर गाजियाबाद में जुटेंगे बहुजन, दो महत्वपूर्ण किताबों का होगा विमोचन

आगामी 6 दिसंबर 2018 को गाजियाबाद में दलित-बहुजन बाबा साहब के महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर जुटेंगे। इस अवसर पर फारवर्ड प्रेस द्वारा प्रकाशित ‘जाति का विनाश’ के अलावा बाबा साहब की आत्मकथा ‘वेटिंग फॉर वीजा’ का विमोचन होगा। फारवर्ड प्रेस की खबर :

आगामी 6 दिसंबर 2018 को बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के आंबेडकर पार्क में बड़ी संख्या में बहुजन जुटेंगे। इस अवसर पर बाबा साहब के विचारों पर आधारित दो महत्वपूर्ण किताबों ‘जाति का विनाश’ (लेखक – आंबेडकर, प्रकाशक – फारवर्ड प्रेस) और ‘वेटिंग फॉर वीजा’ (आंबेडकर की आत्मकथा, प्रकाशक – सावित्रीबाई फुले प्रकाशन केंद्र) का विमोचन किया जाएगा। इस आशय की जानकारी कार्यक्रम के आयोजक डॉ. भीमराव आंबेडकर विचार मंच एवं जन्मोत्सव समिति, गाजियाबाद के संयोजक लखमी चंद ने दी।

उन्होंने बताया कि इस मौके पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसका विषय ‘संविधान पर खतरों का आंबेडकारवाद में निदान’ रखा गया है। इस गोष्ठी को मेरठ कॉलेज के प्रो. सतीश प्रकाश, समाजसेवी रामेश्वर दत्त, फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक डॉ. सिद्धार्थ, अरविंदो कॉलेज की प्रोफेसर सविता पाठक सहित कई गणमान्य लाेग संबोधित करेंगे।

आयोजकों द्वारा जारी बैनर

लखमी चंद ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन गाजियाबाद के विजयनगर इलाके की माता कॉलोनी स्थित आंबेडकर पार्क में किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह साढ़े 8ः00 बजे बुद्ध वंदना से होगी। इस अवसर पर बाबा साहब की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित किए जाने के बाद गोष्ठी की शुरुआत होगी। इसके पहले दो किताबों का विमोचन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन दो किताबों का विमोचन इस मौके पर किया जाएगा, वाे बहुजन समाज के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण हैं। पहली किताब ‘जाति का विनाश’, जो 1936 में बाबा साहब द्वारा लिखी गई किताब ‘एनिहिलेशन ऑफ कास्ट’ का मुकम्मल हिंदी अनुवाद है और इसे फारवर्ड प्रेस बुक्स, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस किताब की एक खासियत यह भी है कि इसमें 1916 में बाबा साहब द्वारा कोलंबिया विश्वविद्यालय में दिए गए प्रथम शोध पत्र ‘भारत में जातियां : उनका तंत्र, उत्पत्ति और विकास’ का हिंदी अनुवाद भी शामिल किया गया है।

कार्यक्रम के आयोजक लखमी चंद

लखमी चंद ने कहा कि यह किताब आज के दौर में बहुत प्रासंगिक है। आज पूरे देश में तमाम कानून होने के बावजूद दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार जारी हैं। जातिगत दंभ खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। समाज में खुद को सबसे ऊंचा मानने वाले आज भी उसी बंधन में जकड़े हैं, जिनके खात्मे की बात बाबा साहब ने कही थी। दलित-बहुजन समाज को एकजुट करना ही इस कार्यक्रम का उद्देश्य है।

लखमी चंद ने कहा कि दूसरी किताब ‘वेटिंग फॉर वीजा’ है। यह किताब दरअसल बाबा साहब की अपनी आत्मकथा है। इसे सभी दलित-बहुजनाें को अवश्य पढ़ना चाहिए, ताकि वे यह जान सकें कि किन चुनौतियों का सामना करते हुए बाबा साहब ने संविधान में दलित-बहुजनों के अधिकार को सुनिश्चित किया। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यक्रम स्थल पर किताबों की बिक्री के लिए स्टॉल भी लगाए जाएंगे।

(काॅपी संपादन : प्रेम)


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