पेरियार के सुनहरे बोल

महात्मा फुले और डॉ आंबेडकर ने ब्राह्मणवाद से लड़ने के लिए समतावादी आध्यात्मिकता की राह चुनी। पेरियार का उद्देश्य भी ब्राह्मणवाद का खात्मा था। लेकिन उनका रास्ता बिल्कुल अलग था। उन्होंने धर्म की आवश्यकता को सिरे से खारिज किया। पढ़ें, पेरियार के चयनित उद्धरण :

[पेरियार ने आजीवन ब्राह्मणवाद का विरोध किया। वह मानते थे कि भारत के विकास में सबसे बड़ा बाधक कोई और नहीं बल्कि विभेद पैदा करने वाली यह व्यवस्था है। उन्होंने इसके समूल नाश करने का आह्वान किया। हिंदी भाषी राज्यों में अब भी लोग उनके उन विचारों और तर्कों से अपरिचित हैं जिनके आधार पर वे यह सिद्ध करते रहे कि हिन्दू धर्म से जुड़ी बातें मूलतः ब्राह्मण-वर्चस्व को कायम करती हैं। उनके प्रतिनिधि उद्धरणों का यह चयनित संकलन हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि लोग यह जान सकें कि पेरियार धर्म, राजनीति आदि के बारे में क्या सोचते थे, वह किस तरह का समाज बनाना चाहते थे, श्रमिकों के लिए उनके क्या विचार थे, सामाजिक व्यवस्था में सुधार कैसे हो और यह भी कि उनका बुद्धिवाद क्या था –प्रबंध संपादक ]


पेरियार ई. वी. आर.

राजनीति

  • जो लोग प्रसिद्धि, पैसा, पद पसंद करते हैं, वे तपेदिक की घातक बीमारी की तरह हैं। वे समाज के हितों के विरोधी हैं।
  • आज हमें देश के लोगों को ईमानदार और निःस्वार्थ बनाने वाली योजनाएं चाहिए। किसी से भी नफरत न करना और सभी से प्यार करना, यही आज की जरूरत है।
  • जो लोगों को अज्ञान में रखकर राजनीति में प्रमुख स्थिति प्राप्त कर चुके हैं, उनका ज्ञान के साथ कोई संबंध नहीं माना जा सकता।
  • हम जोर-शोर से स्वराज की बात कर रहे हैं। क्या स्वराज आप तमिलों के लिए है, या उत्तर भारतीयों के लिए है? क्या यह आपके लिए है या पूंजीवादियों के लिए है?क्या स्वराज आपके लिए है या कालाबाजारियों के लिए है? क्या यह मजदूरों के लिए है या उनका खून चूसने वालों के लिए है?

  • स्वराज क्या है? हर एक को स्वराज में खाने, पहनने और रहने के लिए पर्याप्त होना चाहिए। क्या हमारे समाज में आपको यह सब मिलता है? तब स्वराज कहाँ है?
  • आइए विश्लेषण करें। कौन उच्च जाति के और कौन निम्न जाति के लोग हैं। जो काम नहीं करता है, और दूसरों के परिश्रम पर रहता है, वह उच्च जाति है। जो कड़ी मेहनत करके दूसरों को लाभ प्रदान करता है, और बोझ ढोने वाले जानवर के समान बिना आराम और खाए-पिए कड़ी मेहनत करता है, उसे निम्न जाति कहा जाता है।
  • जो ईश्वर और धर्म में विश्वास रखता है, वह आजादी हासिल करने की कभी उम्मीद नहीं कर सकता।
  • जब एक बार मनुष्य मर जाता है, तो उसका इस दुनिया या कहीं भी किसी के साथ कोई संबंध नहीं रह जाता है।
  • धन और प्रचार ही धर्म को जिन्दा रखता है। ऐसी कोई दिव्य शक्ति नहीं है, जो धर्म की ज्योति को जलाए रखती है।
  • धर्म का आधार अन्धविश्वास है। विज्ञान में धर्मों का कोई स्थान नहीं है। इसलिए बुद्धिवाद धर्म से भिन्न है। सभी धर्मवादी कहते हैं कि किसी को भी धर्म पर संदेह या कुछ भी सवाल नहीं करना चाहिए। इसने मूर्खों को धर्म के नाम पर कुछ भी कहने की छूट दी है। धर्म और ईश्वर के नाम पर मूर्खता एक सनातन रीत है।

बहुजन विमर्श को विस्तार देतीं फारवर्ड प्रेस की पुस्तकें

  • ब्राह्मणों ने शास्त्रों और पुराणों की सहायता से शूद्रों (वेश्या या रखैल पुत्र) को बनाया है। हमने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है। हमने तालाब खोदे हैं, मंदिरों का निर्माण किया है, धन दान किया है। लेकिन कौन आनंद ले रहा है? केवल ब्राह्मण आनंद ले रहे हैं।
  • ब्राह्मणों ने हमें हमेशा के लिए शूद्र बनाने की साजिश रची, जिसके परिणामस्वरुप हमें आर्य धर्म द्वारा दास के रूप में बनाया गया है। और अपने उच्च स्तर की सुरक्षा के लिए उन्होंने मंदिरों और देवताओं को बनाया है।

पेरियार ई.वी. रामासामी (जन्म : 17 सितंबर 1879 – निधन : 24 दिसंबर 1975)

  • धनी लोग, शिक्षित लोग, व्यापारी और पुरोहित वर्ग जातिप्रथा, धर्म, शास्त्र और ईश्वर से लाभ उठा रहे हैं। इनकी वजह से इनको कोई परेशानी नहीं होती है। इन्हीं सब चीजों से इनका उच्च स्तर बना हुआ है।
  • इस तथ्य को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि इस भारत देश को जाति व्यवस्था द्वारा बर्बाद कर दिया गया है।
  • हम द्रविड़ियन इस देश के मूल निवासी हैं। हम प्राचीन शासक वर्ग से आते हैं। किन्तु आज हम चौथे वर्ण के अधीन बना दिए गए हैं। क्यों? हमारी इस वर्तमान अपमानजनक स्थिति के लिए हमारे पूर्वज,  पुरखे और हमारे राजा ज़िम्मेदार हैं, जिन्होंने शर्मनाक व्यवहार किया था।
  • जब सभी मनुष्य जन्म से बराबर हैं, तो यह कहना कि अकेले ब्राह्मण ही उच्च हैं, और दूसरे सब नीच हैं, जैसे परिया (अछूत) या पंचम, एकदम बकवास है। ऐसा कहना शातिरपन है। यह हमारे साथ किया गया एक बड़ा धोखा है।
  • एक धर्म को प्यार को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए। वह हर एक को दूसरों की सहायता करने  के लिए प्रेरित करना चाहिए। उसे हर एक को सत्य का सम्मान करना सिखाना चाहिए। दुनिया के लिए ऐसा ही धर्म आवश्यक है, जिसमें ये सारे गुण हों। एक सच्चे धर्म का इसके सिवा कोई अन्य महत्वपूर्ण काम नहीं है।
  • हमने ईश्वर को आज़ाद नहीं छोड़ा है। आप मंदिर-गोपुरम (टावर) क्यों चाहते हैं? आप पूजा करना क्यों चाहते हैं? आप एक पत्नी; गहने क्यों चाहते हैं? आप स्वर्ण और हीरे के आभूषण क्यों चाहते हैं? आप भोजन क्यों चाहते हैं? क्या आप खाना खाते हैं? क्या आप देवदासियों का आनंद ले रहे हैं, जो आपको अपनी पत्नियों की तरह बुलाती हैं? हमने ईश्वर को आज़ाद नहीं छोड़ा है। हमने उसे प्रश्नों की बौछार के साथ परेशान किया है। अब तक कोई ईश्वर उत्तर देने के लिए आगे नहीं आया है। कोई ईश्वर विरोध करने के लिए आगे नहीं आया है। किसी भी ईश्वर ने हमला करने या दंडित करने की हिम्मत नहीं की।
  • ये लम्बे और शंकु जैसे टावर किसने बनाए हैं? उनके शिखर पर सोने की परत किसने चढ़ाई? नटराज के लिए सोने की छत किसने बनाई? एक हजार खम्भों वाला मंडपम किसने बनाया? चॉकलेटियों (कारवाँ सराय) के लिए कड़ी मेहनत किसने की? क्या इनमें से किसी भी मंदिर, टैंक और धर्मार्थ चीजों के लिए दान के रूप में एक भी पाई ब्राह्मण ने दी है? जब यह सच है, तो ब्राह्मणों को कुछ भी योगदान किए बिना उच्च जाति बनकर क्यों रहना चाहिए? उन्हें हमें धोखा देने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? यही कारण है कि, हम साहसपूर्वक भगवान को चुनौती दे रहे हैं। ईश्वर ने लोगों का कुछ भी भला नहीं किया है। यही कारण है कि, हम भगवान से पूछते हैं कि क्या वह वास्तव में भगवान है या केवल पत्थर है? ईश्वर गूंगा और अचल रहकर हमारे आरोपों को स्वीकार कर रहा है। इसलिए कोई भी भगवान हमारे खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने अदालत में नहीं गया है।

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  • अगर धर्म यह कहे कि मनुष्य को मनुष्य का सम्मान करना चाहिए, तो हम कोई आपत्ति नहीं करेंगे। अगर धर्म यह कहे कि समाज में न कोई उच्च है और न नीच, तो हम उस धर्म के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे।अगर धर्म यह कहे कि किसी को भी उसकी पूजा करने के लिए कुछ भी खर्च करने की ज़रूरत नहीं है, तो हम उस भगवान का विरोध नहीं करेंगे।
  • ब्राह्मण आपको ईश्वर के नाम पर मूर्ख बना रहे हैं। वह आपको अन्धविश्वासी बनाता है। वह आपको अस्पृश्य के रूप में निंदा करके बहुत ही आरामदायक जीवन जीता है। वह आपकी तरफ से भगवान को प्रार्थना करके खुश करने के लिए आपके साथ सौदा करता है। मैं इस दलाली के व्यवसाय की दृढ़ता से निंदा करता हूँ और आपको चेतावनी देता हूँ कि इस तरह के ब्राह्मणों पर विश्वास न करें।
  • रूढ़िवादी हिंदुओं के लिए सबूत है कि कुछ देवताओं ने मुस्लिम लड़कियों को जीवन-साथी बना लिया है। ऐसे भी देवता हैं, जो अस्पृश्य समुदाय की लड़कियों से प्यार करते थे और उनसे विवाह करते थे।
  • हालांकि ब्राह्मण जातियों के मामले में सौदा करने के लिए आगे आ सकते हैं,  पर जब तक कृष्णा और उनकी गीता यहां है, जातियों का अंत होने वाला नहीं हैं।
  • ईश्वर सद्गुणों का प्रतीक है। उसे रूप धारण करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसका भौतिक अस्तित्व ही नहीं है।
  • इंग्लैंड में न कोई शूद्र है, और न परिया अछूत। रूस में आपको वर्णाश्रम धर्म या भाग्यवाद नहीं मिलेगा। अमरीका में, लोग ब्रह्मा के मुख से या पैरों से पैदा नहीं होते हैं। जर्मनी में भगवान भोग नहीं लगाते हैं। टर्की में देवता विवाह नहीं करते हैं। फ्रांस में देवताओं के पास 12 लाख रुपये का मुकुट नहीं है। इन देशों के लोग शिक्षित और बुद्धिमान हैं। वे अपना आत्मसम्मान खोने के लिए तैयार नहीं होते हैं। बल्कि, वे अपने हितों और अपने देश की सुरक्षा के लिए तैयार होते हैं। अकेले हमें क्यों बर्बर देवताओं और धार्मिक कट्टरवाद को मानना चाहिए।
  • उस ईश्वर को नष्ट कर दो, जो तुम्हें शूद्र कहता है। उन पुराणों और महाकाव्यों को नष्ट कर दो, जो हिन्दू ईश्वर को सशक्त बनाते हैं। यदि कोई ईश्वर वास्तव में दयालु, हितैषी और बुद्धिमान है, तो उसकी प्रार्थना करो।
  • प्रार्थना क्या है? क्या इससे नारियल टूट रहा है? क्या यह ब्राह्मणों को पैसे दे रही है? क्या यह त्यौहारों में है? क्या यह ब्राह्मणों के चरणों में गिर रही है? क्या यह मन्दिर बना रही है? नहीं, यह हमारे अच्छे व्यवहार में निहित है। हमें बुद्धिमान लोगों की तरह व्यवहार करना चाहिए। प्रार्थना का यही सार है।


 

समाज

  • एक समय था, जब हमें तमिल कहा जाता था। पर आज तमिल का प्रयोग तमिल भाषा के लिए किया जाता है। अत: आर्य संस्कृति और आर्य सभ्यता के लोग भी इसलिए अपने आप को तमिल कहते हैं, क्योंकि वे तमिल बोलते हैं। इतना ही नहीं, वे हम पर आर्य सभ्यता को भी थोपना चाहते हैं। मैं कहता हूं कि आज हमें उनके साथ सहयोग करने के कारण ही शूद्र कहा जाता है।
  • हम रक्त के बारे में चिंतित नहीं हैं। हम संस्कृति और सभ्यता के बारे में चिंतित हैं। हम भेदभाव रहित समाज चाहते हैं। हम समाज में किसी के भी साथ प्रचलित भेदभाव के कारण अलगाव नहीं चाहते हैं।
  • हिन्दू धर्म और जाति-व्यवस्था नौकर और मालिक का सिद्धांत स्थापित करती है। अगर भगवान हमारे पतन का मूल कारण है, तो भगवान को नष्ट कर दो। अगर यह काम मनु धर्म, गीता या कोई अन्य पुराण कर रहा है, तो उन्हें भी जलाकर राख कर दोI अगर यह काम मन्दिर, कुंड या पर्व करता है, तो उनका भी बहिष्कार करो। अंतत: यह हमारी राजनीति है, तो इसे आगे आगे बढ़कर खुलेआम घोषित करो।

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  • मनुष्य मनुष्य बराबर है। कोई शोषण नहीं होना चाहिए।हर एक को दूसरे की मदद करनी चाहिए। किसी को भी किसी का नुक्सान नहीं करना चाहिए। किसी को भी कोई कष्ट या शिकायत नहीं होनी चाहिए। हर किसी को राष्ट्रीय भावना के साथ जीना चाहिए और दूसरे को भी जीने देना चाहिए।
  • स्वाभिमान आन्दोलन का आदर्श क्या है? इस आन्दोलन का मकसद उन संगठनों का पता लगाना है, जो हमारी प्रगति में बाधक बने हुए हैं। यह उन ताकतों का मुकाबला करेगा, जो समाजवाद के खिलाफ काम करते हैं। यह समस्त धार्मिक प्रतिक्रियावादी ताकतों का विरोध करेगा। यह उन लोगों का विरोध करता है, जो कानून-व्यवस्था भंग करते हैं। स्वाभिमान आन्दोलन शान्ति और प्रगति के लिए काम करता है। यह प्रतिक्रियावादियों को कुचल देगा।
  • एक समाजवादी समाज को तैयार करने के लिए और आम आदमी तथा दलित वर्गों का हित करने के लिए स्वाभिमान आंदोलन शुरू किया गया था। पर समाज के सभी वर्गों में शांति और संतोष स्थापित करना भी आज आंदोलन की एक और ज़िम्मेदारी है।
  • यदि लोग और देश समृद्ध हैं, तो शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुशासन में भारी सुधार किया जाना चाहिए
  • द्रविड़ियन आन्दोलन ब्राह्मणवाद के खात्मे तक सक्रिय और जिन्दा रहेगा। तब तक हमारे दुश्मनों या सरकार द्वारा हमारे साथ कुछ भी अत्याचार, दमन, साजिश और विश्वासघात किया जा सकता है,  पर हमें विश्वास है कि अंत में सफलता निश्चित रूप से हमारी होगी।
  • मुझे ब्राह्मण प्रेस द्वारा ब्राह्मण-विरोधी के रूप में चित्रित किया गया है। किन्तु मैं व्यक्तिगत रूप से किसी भी ब्राह्मण का दुश्मन नहीं हूँ। एकमात्र तथ्य यह है कि मैं ब्राहमणवाद का धुर विरोधी हूँ। मैंने कभी नहीं कहा कि ब्राह्मणों को खत्म किया जाना चाहिए। मैं केवल यह कहता हूँ कि ब्राह्मणवाद को खत्म किया जाना चाहिए। ऐसा लगता है कि कोई ब्राह्मण स्पष्ट रूप से मेरी बात समझ नहीं पाता है।
  • जातियां नहीं होनी चाहिए। जन्म के कारण स्वयं को उच्च या निम्न नहीं बुलाया जाना चाहिए। यही वह चीज है, जो हम चाहते हैं। अगर हम यह कहते हैं, तो यह गलत कैसे है?
  • कांग्रेस पार्टी से अकेले ब्राह्मण और धनी लोग ही लाभ उठा रहे हैं।यह आम आदमी, गरीब आदमी और श्रमिक वर्गों के लिए अच्छा काम नहीं करेगी। यह बात मैं काफी लम्बे समय से कह रहा था। आप लोगों ने मेरी बातों पर विश्वास नहीं किया। पर अब आप लोग कांग्रेस शासन में चीजों को देखने के बाद, सच्चाई को महसूस कर रहे हैं।
  • जब मैं तमिलनाडू कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष था, तो मैंने 1925 के सम्मेलन में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। उस प्रस्ताव में मैंने जातिविहीन समाज के निर्माण का समर्थन किया था। मेरे मित्र राजगोपालाचारी ने अस्वीकृत कर दिया थाI मैंने यह भी अनुरोध किया था कि कांग्रेस के विभिन्न पक्षों और क्षेत्रों में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का पालन किया जाना चाहिए। पर यह प्रस्ताव भी विषय समिति में थिरु वि. का. (एक सम्मानित तमिल विद्वान कल्यानासुन्दरानर) के द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया थाI तब मुझे अपने प्रस्ताव के समर्थन में 30 प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर प्राप्त करने के लिए कहा गया था। श्री एस. रामानाथन ने 50 प्रतिनिधियों से हस्ताक्षर प्राप्त कर लिए। तब सर्वश्री सी. राजगोपालाचारी (राजाजी), श्रीनिवास आयंगर, सत्यमूर्ति और अन्य लोगों ने अपना प्रतिरोध दर्ज करायाI उन्हें डर था कि अगर मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया, तो कांग्रेस खत्म हो जाएगीI बाद में यह प्रस्ताव थिरु वि. का. और डा. पी. वरदाराजुलू के द्वारा रोक दिया गयाI ब्राह्मण बहुत खुश हुएI इतना ही नहीं, उन्होंने मुझे सम्मेलन में बोलने की इजाजत भी नहीं दी, यह केवल उस दिन हुआ, जब मैंने कांग्रेस पार्टी में प्रमुख ताकतों से लड़ने की अपील की थी। मैंने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व लागू करने के लिए संघर्ष करने के लिए संकल्प किया। मैंने सम्मेलन में अपना दृढ़ निश्चय घोषित किया और मैं कांग्रेस सत्र से बाहर चला गया। उसी दिन से मैं कांग्रेस पार्टी की चाल, षड्यंत्र और धोखाधड़ी की गतिविधियों का खुलासा कर रहा हूं।
  • जिसे भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहा जाता है,  वह चीज बहुत पहले ही गायब हो गई। जो लोग सरकार के खिलाफ वैध आरोप लगाते हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। उन पर स्वतंत्रता के दुश्मनों के रूप में झूठा आरोप लगाया जाता है।
  • उन व्यक्तियों के विवरण जानिए, जिन्होंने पहले ही धन और लाभ अर्जित कर लिए हैं। इस बुराई को रोकने के लिए साधन क्या तैयार किये। क्या हमें किसी व्यक्ति को इस तरह धन इकट्ठा करने की अनुमति देनी चाहिए?

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  • कांग्रेस और अंग्रेजों के बीच हुए समझौते के कारण यह सरकार अस्तित्व में आई है। यह वह स्वतंत्रता नहीं है, जो सभी भारतीयों को दी गई है। इस स्वतंत्रता से गैर-कांग्रेसी लोगों को कोई लाभ नहीं हुआ है। वे कहीं भी प्रतिनिधित्त्व नहीं करते हैं। जातिवाद की बुराई भी गायब नहीं हुई है।
  • आर्यों ने द्रविड़ों को दीपावली, राम का जन्मदिन, कृष्ण का जन्मदिन त्यौहार मनाने के लिए बनाए। इसी तरह उत्तर भारतीयों ने स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए 15 अगस्त बनाया। इस सब के सिवा कोई अन्य लाभ या प्रशंसनीय कार्य नहीं है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। यह उसका अभिव्यक्ति के अपने अधिकार के प्रयोग करने का अधिकार है। इस अधिकार को अस्वीकार करना अन्यायपूर्ण है। बोलने की आजादी लोकतंत्र का आधार है।

श्रमिक

  • अमीर लोग जो मजदूरों का शोषण करते हैं और अपनी संपत्ति की रक्षा करने की कोशिश करते हैं और जो लोग एक खुशहाल जीवन का आनंद लेना चाहते हैं और जो लोग अधिक धन के लिए भगवान से याचना करते हैं और जो मृत्यु के बाद भी नाम और प्रसिद्धि चाहते हैं और जो अपनी संपत्ति अपने बेटों और पोतों के लिए छोड़ना चाहते हैं, वे हमेशा शाश्वत चिंता में रहते हैं। किन्तु एक कठोर श्रम करने वाले श्रमिक के साथ ऐसा नहीं है।
  • विश्व में श्रम समस्या हमेशा लोगों की समस्या है। यह श्रमिक ही है, जो विश्व में सब कुछ बनाता है। लेकिन यह श्रमिक ही चिंताओं, कठिनाइयों और दुःखों से गुजरता है।
  • कुरल (Kural) एक दुर्लभ किताब है जो जाति, धर्म, भगवान और अंधविश्वास से ऊपर है। यह उच्च गुणों और प्रेम की प्रतीक है।
  • तिरुवल्लुवार का कुरल अकेला ग्रन्थ है, जो हमारे देश के लोगों को शिक्षित करने के लिए पर्याप्त है।

बुद्धिवाद

  • ज्ञान का आधार सोच है। सोच का आधार तर्कवाद है।
  • कोई भी अन्य जीवित प्राणी अपने ही वर्ग को नुकसान नहीं पहुंचाता है। कोई भी अन्य जीवित प्राणी अपने ही वर्ग को निम्न स्तर का नहीं बनाता है। कोई भी अन्य जीवित प्राणी अपने ही वर्ग का शोषण नहीं करता है। लेकिन मनुष्य,  जो एक बुद्धिमान जीवित प्राणी कहा जाता है, इन सभी बुराइयों को करता है।
  • भेदभाव, घृणा, शत्रुता, ऊँच-नीच, गरीबी, दुराचरण इत्यादि, जो अब समाज में प्रचलित हैं, वह ज्ञान और तर्कवाद की कमी के कारण हैं। वे भगवान या समय की क्रूरता के कारण नहीं हैं।
  • विदेशी ग्रहों को संदेश भेज रहे हैं। हम ब्राह्मणों के माध्यम से हमारे मृत पूर्व पिता को चावल और अनाज भेज रहे हैं। क्या यह बुद्धिमानी का काम है?
  • मैं ब्राह्मणों के लिए एक शब्द कहना चाहता हूं, ‘भगवान, धर्म, शास्त्रों के नाम पर आपने हमें धोखा दिया है। हम शासक लोग थे। अब धोखा देने के इस जीवन को खत्म करो। तर्कवाद और मानवता के लिए जगह दो।’
  • मैंने 17 साल की उम्र में ही इन देवताओं और ब्राह्मणों का विरोध किया था। तब से आज तक, पिछले 53 सालों से मैं तर्कवाद का उपदेश दे रहा हूँI क्या मैं इसके लिए मारा गया हूँ? क्या मैं अपमानित किया गया हूँ? बिल्कुल नहीं। तो, आप डरते क्यों हैं? ज्ञान की तलाश करो।


 

सुधार

  • आम आदमी सोचता है कि शादी काम करने के लिए किसी की नियुक्ति करने की तरह है। पति भी ऐसा ही सोचता है! पति का परिवार भी ऐसा ही सोचता है। हर कोई सोचता है कि एक लड़की काम करने के लिए परिवार में आ रही है। लड़की का परिवार भी लड़की को घर का  काम करने के लिए प्रशिक्षित करता है।
  • शादी का मतलब क्या है? खुशी के साथ प्राकृतिक जीवन का आनंद लेने के लिए एक पुरुष और एक स्त्री परस्पर एक होते हैं। कड़ी मेहनत के बाद उससे सन्तोष मिलता है। ज्यादातर लोगों को यह एहसास नहीं होता कि विवाहित जीवन के साझा सुख विवाह हैं।
  • विवाह के परिणाम युगल की इच्छाओं के कारण होने चाहिए। यह उन हृदयों की बुनाई है, जो शादी का कारण बनते हैं।
  • बाल विवाह खत्म होने चाहिए। अगर तलाक का अधिकार है, तो विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए भी अधिकार हो और यदि महिलाओं को अब कुछ अधिकार दिए गए हैं, तो हम देश में वेश्यावृत्ति को नहीं देखेंगे। यह धीरे-धीरे गायब हो जाएगी।
  • एक पुरुष को आनंद के लिए, जो वह चाहता है, भटकने का अधिकार है। उसे कितनी ही लड़कियों से शादी करने का अधिकार है। इस प्रवृत्ति ने स्त्रियों को वेश्यावृत्ति की ओर अग्रसर किया है।
  • कोई भी राजनेता और अर्थशास्त्री समाज-सुधार की उन वास्तविक योजनाओं को स्वीकार करने को तैयार नहीं है, जिनकी समाज को जरूरत है।
  • मुझ पर दुनिया को बर्बाद करने का आरोप लगाया जाता है। दुनिया को बर्बाद करके मैं क्या हासिल करने जा रहा हूँ? मुझे समझ में नहीं आता कि ब्राह्मण भक्त वास्तव में क्या महसूस करते हैं। क्या कोई दुनिया को बर्बाद करने के लिए प्रचार करेगा? मुझे उम्मीद है कि वे जल्द ही इस पर तर्कसंगत विचार करेंगे।
  • यह पता लगाना बुद्धिमान लोगों का कर्तव्य है कि खादी आन्दोलन से देश को कोई लाभ हुआ है या नहीं? आज के आधुनिक औद्योगिक और राजनीतिक दौर में यह केवल एक अनाचारवाद है।
  • गरीबी का मूल कारण समाज में पूंजीपतियों का अस्तित्व है। यदि समाज में पूंजीपति लोग नहीं रहेंगे, तो गरीबी नहीं होगी।
  • जब तक हम शासक वर्गों को चाहते रहेंगे, यहां चिंताएं और चिंतित लोग बने रहेंगे। इसी वजह से देश में गरीबी और महामारी हमेशा बनी हुई है।
  • यदि हम मंदिरों की संपत्ति और मंदिरों में अर्जित आय को नए उद्योग शुरू करने के लिए खर्च कर दें, तो न कोई भिखारी,  न कोई अशिक्षित और न कोई निम्न स्तर वाला व्यक्ति होगा। एक समाजवादी समाज होगा, जिसमें सब समान होंगे।
  • जब से ब्राह्मण यहां आए (तमिलनाडु), शायद ही कभी हम किसी से पूछते हैं कि ब्राह्मण क्यों? शूद्र क्यों? यहां तक कि जिन लोगों ने पूछा था, उन्हें शांत कर दिया गया। वल्लुवार और कपिलर ने भी स्पष्ट रूप से कहा कि जन्म से कोई उच्च और निम्न जाति नहीं है। ब्राह्मण उनके विचारों का विरोध नहीं कर सके। उन्होंने बस उनके विचारों का प्रचार नहीं किया।
  • मूर्तियों तथा वेदों को, जो अज्ञानता पैदा करते हैं, और  उपनिषद, मनुस्मृति, बाराथम जैसे लोगों को मूर्ख बनाने वाले ग्रन्थों को हमारी तमिलनाडु की सीमाओं से बाहर निकाल दिया जायेगा।
  • मैंने ब्राह्मणों को तुच्छ मानने के लिए कुछ भी नहीं बोला है, सिर्फ इसलिए कि वे ब्राह्मणों के रूप में पैदा हुए हैं।
  • कांग्रेस पार्टी का नेता ब्राह्मण है। सोशलिस्टों का नेता ब्राह्मण है। कम्युनिस्टों का नेता ब्राह्मण है। हिन्दू महासभा का नेता ब्राह्मण है। आरएसएस का नेता ब्राह्मण है। ट्रेड यूनियन का नेता ब्राह्मण है। भारत का राष्ट्रपति ब्राह्मण है। वे सभी दिलों के दिल में हैं।

(उपरोक्त चयनित उद्धरण कलेक्टेड वर्क्स ऑफ पेरियार ई. वी. आर., संयोजन : डॉ. के. वीरामणि, प्रकाशक : दी पेरियार सेल्फ-रेसपेक्ट प्रोपगंडा इन्स्टीच्यूशन, पेरियार थाइडल, 50, ई. वी. के. संपथ सलाय, वेपरी, चेन्नई – 600007 के प्रथम संस्करण, 1981 के पृष्ठ संख्या 471 से लेकर 518 से लिए गए हैं।)

(अनुवाद : कँवल भारती, कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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