h n

संजय सहाय व ईश मिश्र को हृदयघात

हिंदी लेखकों- बुद्धिजीवियों की दुनिया के लिए पिछला सप्ताह पीड़ाजनक रहा। प्रसिद्ध कथा-मासिक हंस के संपादक संजय सहाय व राजनीति विज्ञानी ईश मिश्र को हृदयाघात से जूझना पड़ा। दोनों अब खतरे से बाहर हैं

नई दिल्ली : हिंदी लेखकों-बुद्धिजीवियों की दुनिया के लिए पिछला सप्ताह पीड़ाजनक रहा। प्रसिद्ध कथा-मासिक हंस के संपादक संजय सहाय व  राजनीति विज्ञानी ईश मिश्र को हृदयाघात से जूझना पड़ा। दोनों अब खतरे से बाहर हैं।

संजय सहाय (बाएं) और ईश मिश्र

संजय सहाय को उनके पैतृक शहर गया (बिहार) में हृदयघात हुआ, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती करवाया गया। संजय सहाय (जन्म : 21 अक्टूबर, 1958) की पहचान कथाकार, नाटककार और निर्देशक के रूप में हैं। उन्होंने बिहार के गया शहर में रेनेसां नाम से सांस्कृतिक केन्द्र का निर्माण किया है, जिसमें कला-संस्कृति के विभिन्न कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित किया जाता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर ईश मिश्र सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय रहते हैं तथा फारवर्ड प्रेस के नियमित लेखकों में से एक हैं। उन्हें यूनविर्सिटी लाइब्रेरी के निकलते समय हृदयघात हुआ। उन्हें मैक्स हॉस्पीटल में भर्ती करवाया गया। हालत में सुधार के बाद अब उन्हें घर भेज दिया गया है।

(कॉपी संपादन – अर्चना)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें 

 

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार

लेखक के बारे में

एफपी डेस्‍क

संबंधित आलेख

शिक्षा में पीछे छूट गए लोगों को पढ़ने का एक और मौका दे रहा पैकपेट
कोल्लुरी सथैया की दृष्टि और दृढ़ निश्चय से पैकपेट का जन्म हुआ। इस पहल का लक्ष्य है हाशियाकृत समुदायों के युवाओं को ज्ञान, कौशल...
वंचित वर्ग के छात्रों से अवसर छीनने को होते हैं पेपर लीक
समाज की कई जातियां हैं, जिन्हें पढ़ने से रोककर रखा गया। ऐसे लोग अपनी पूरी उर्जा कामयाबी के लिए लगा देते हैं। दूसरी तरफ...
राम मंदिर प्रकरण : धर्म के नाम पर धन की उगाही और लूट के इतिहास के संदर्भ में
अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि मंदिरों में डकैती केवल गैर हिंदू या विदेशी आक्रांताओं ने ही की थी, जबकि ऐतिहासिक तथ्य इसके...
त्रिवेणी संघ स्थापना दिवस : वर्तमान की चुनौतियां और विरासत पर मंथन
श्रीकांत ने कहा कि 1967 के बाद बिहार की राजनीति में हाशिए के समाज की निर्णायक भागीदारी त्रिवेणी संघ की वैचारिक विरासत का परिणाम...
सिर्फ़ तस्वीर नहीं, आंबेडकर का दृष्टिकोण भी अपनाए विपक्षी समूह
2014 के बाद से आरएसएस के वैचारिक दृष्टिकोण को लागू करने वाली मोदी सरकार के नीतिगत फैसलों की आलोचना में आंबेडकरवादी दृष्टिकोण बहुत कम...