13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ़ आदिवासी युवाओं ने फूंका मोदी का पुतला

विश्वविद्यालयों में विभागवार आरक्षण के खिलाफ़ विरोध देश की राजधानी दिल्ली से निकलकर रांची और बनारस जैसे छोटे और मीडिया के अटेंशन से दूर के शहरों और कस्बों में फैलने के साथ ही उग्र व्यापक और देशव्यापी होता जा रहा है

रांची (झारखंड) : बीते 6-7 फरवरी 2019 को झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासी युवाओं ने 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का पुतला फूंका। इस दौरान युवा “जब जब युवा बोला है, राजसिंहासन डोला है”, “आदिवासी विरोधी सरकार होश में आओ”, “13 प्वाइंट रोस्टर नहीं चलेगा” नारे लगा रहे थे।

गौरतलब है कि 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ़ विरोध देश की राजधानी दिल्ली से निकलकर रांची और बनारस जैसे छोटे और कथित राष्ट्रीय मीडिया की नजरों से दूर के शहरों और कस्बों में फैलने के साथ ही उग्र व्यापक और देशव्यापी होता जा रहा है। अब तक इन विरोध प्रदर्शनों में दलित, बहुजन ओबीसी की आवाज़ उठाने वाले डूटा और आइसा जैसे संगठनों के होर्डिंग बैनर ही ज्यादा दिखाई देते थे। लेकिन अब रांची में आदिवासी छात्र संघ ने अपने बैनर के साथ 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ़ आदिवासी समुदाय की पीड़ा और प्रतिरोध दर्ज करवाया है।

दो दिन चला आदिवासी छात्रों का प्रदर्शन

आदिवासी छात्र संगठन का यह विरोध प्रदर्शन 6 और 7 फरवरी दो दिनों तक चला। सबसे पहले 6 फरवरी को सभी युवा ‘आदिवासी छात्र संगठन’ के बैनर तले रांची के श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज के सामने एकत्रित हुए और नारेबाजी करते हुए विरोध मार्च निकाला। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संसाध्पन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का पुतला फूंका गया। इसके बाद एक प्रतिरोध सभा का आयोजन किया गया।

आदिवासी छात्र संघ के विरोध प्रदर्शन में आदिवासी छात्राओं ने भी लिया भाग

जनसभा को संबोधित करते हुए आदिवासी छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि “मुट्ठीभर मनुवादी विचारधारा के लोग 85 प्रतिशत आबादी पर शासन कर रहे हैं। सदियों तक इस देश में अत्याचार हुआ शासन हुआ। हमारे पूर्वजों ने लंबी लड़ाई लड़कर इन्हें हरा दिया और लोकतांत्रिक संविधान लागू करके सुनिश्चित किया कि जितनी जिसकी आबादी है उसकी उतनी हिस्सेदारी होनी चाहिए। लेकिन आज फिर मनुवादियों ने हमारा अधिकार छीनकर हमपर हमला किया है। आज पिर एक लड़ाई लड़ने की ज़रूरत है।”

उन्होंने आगे कहा कि “पहले हमें शिक्षा से वंचित रखा गया, वोट के अधिकार से वंचित रखा गया, संसाधनों में भागीदारी से वंचित रखा गया था वैसे ही अब 13 प्वाइंट रोस्टर लागू करके हमें यूनिर्सिटी में प्रोफेसर बनने से रोक दिया गया है। उच्च शिक्षा में प्रतिनिधित्व का यह मौका हमें 1997 में मिला था। उस समय 40 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम लागू हुआ था। लेकिन अब फिर देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 13 प्वाइंट रोस्टर लागू हो गया है। जिस दिन यह रोस्टर लागू हुआ उसके अगले ही दिन राजस्थान यूनिवर्सिटी में वैकेंसी का विज्ञापन जारी कर दिया गया। आनन-फानन में ये लोग अपने लोगों को भरने को तैयार हैं। जब तक 13 प्वाइंट रोस्टर रद्द नहीं होता तब तक किसी भी यूनिवर्सिटी में वैकेंसी का नोटिफिकेशन नहीं आना चाहिए।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का पुतला फूंकते आदिवासी छात्र

एक अन्य आदिवासी छात्र नेता सूरज टोप्पो ने कहा कि “शिक्षा का निजीकरण कर एसटी, एससी और ओबीसी के गरीब गांव के विधार्थियों की शिक्षा का गुणवत्ता खत्म किया गया, बाद मे वह किसी तरह देश के विभिन्न सरकारी विश्वविद्यालयो में उच्च शिक्षा के लिए आते हैं, तो उनकी छात्रवृत्ति रोक कर उन्हें शिक्षा से वंचित किया जाता है। और अब प्रोफेसर की नियुक्ति मे 13 प्वाइंट रोस्टर लाकर एसटी, एससी और ओबीसी के लोगो को पूरी तरह रोका जा रहा है।“

वहीं रांची कॉलेज के स्टूडेंट यूनियन प्रेसीडेंट अमनदीप मुंडा ने कहा कि “ मोदी सरकार ब्राह्मणवादी सरकार है। यह सरकार न्याय पसंद, समानता पसंद लोगों की विरोधी है। कोर्ट और मीडिया का चरित्र ब्राह्मणवादी है।” आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष सुशील उरांव ने कहा कि “जल्द ही पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी सांसदों को इस विषय में हस्तक्षेप करना चाहिए।”       

आदिवासी छात्रों के दो दिनों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व अमनदीप  मुण्डा ,रितेश उरांव ,सुमित उरांव, पिरियव्रत नाग (मुण्डा ), संदीप उरांव, मनोज उरांव, अरविंद गाड़ी, आदित्य ,अरविंद आदि ने किया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें

आरएसएस और बहुजन चिंतन (लेखक : कंवल भारती)

मिस कैथरीन मेयो की बहुचर्चित कृति : मदर इंडिया

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

About The Author

Reply