सरल, संयत, संकल्पबद्ध पत्रकारिता के लिए सम्मानित हुए निखिल वागले

दूसरा कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान मराठी पत्रकार निखिल वागले को दिया गया। इस अवसर पर चयन समिति ने कहा कि एक लोकतांत्रिक समाज के जिंदा रहने की यह अनिवार्य शर्त है कि साहसी कलमकारों की पौध निरंतर पनपती रहे और समाज उन्हें सींचता रहे

मराठी पत्रकार निखिल वागले को वर्ष 2018 का गांधी शांति प्रतिष्ठान का ‘कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान’ दिया गया। 20 अप्रैल 2019 को नई दिल्ली के कंस्टीच्यूशन क्लब में आयोजित एक समारोह में समाज शास्त्री आशीष नंदी ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने उन्हें सम्मानस्वरूप 1 लाख रुपये का चेक भेंट किया।

निखिल वागले को सम्मान पत्रकारिता की अनंत संभावनाओं को रेखांकित करने का प्रयास : चयन समिति

इस अवसर पर  चयन समिति की ओर से जारी प्रशस्ति- वक्तव्य में कहा गया कि निखिल वागले को उनकी “सरल, संयत, संकल्पबद्ध पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया गया है”। चयन समिति के सदस्य व फारवर्ड प्रेस के प्रबंध संपादक  प्रमोद रंजन ने प्रशस्ति- वक्तव्य का पाठ करते हुए कहा कि “सत्य हमेशा सत्ता के निशाने पर होता है और सत्ताएं जितनी मूल्यहीन और दिशाहीन होती जाती हैं, सत्य को उतनी ही प्रखरता के साथ अपनी जगह खडा होना पडता है।  निरंतर जागरूक कलमकार ही ऐसे दायित्व का वहन कर सकता है। किसी भी जिंदा लोकतांत्रिक समाज की यह अनिवार्य शर्त व शाश्वत पहचान है कि उसके यहां ऐसे कलमकारों की पौध निरंतर पनपती रहे और समाज उन्हें सींचता रहे। यह पत्रकारिता सम्मान इसी सामाजिक दायित्व के निर्वाह का प्रमाण है।”

मराठी पत्रकार निखिल वागले को कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित करते समाज शास्त्री आशीष नंदी। इस मौके पर (बाएं से) प्रमोद रंजन, नीरजा चौधरी, मीना कार्णिक, आशीष नंदी, निखिल वागले, कुमार प्रशांत, ओम थानवी और जयशंकर गुप्ता

उन्होंने चयन समिति की ओर से कहा कि “मराठी भाषा में दिनांक अखबार से शुरू कर श्री वागले ने कई स्तरों पर मराठी भाषा की पत्रकारिता को प्रभावित किया है। फिर टेलीविजनों की शोर-शराबे से भरी दुनिया में सत्य की प्रखर प्रस्तुति लेकर वे उतरे तो सरोकारों को सनसनी में और सत्य को पक्षधारिता में बदल देने की कायर चतुराई को पीछे हटाया और तथ्य और विवेक की शक्ति को रेखांकित किया। मराठी पत्रकारिता को श्री वागल ने उसकी सहज मानवीय गरिमा लौटाई। टीवी पर अपने कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने जो विश्वसनीयता हासिल की है, उसने टीवी पत्रकारिता को वह गहराई और गरिमा दी है जिसके अभाव में वह सत्ता और संपत्ति का खिलौना रह जाती है। श्री निखिल वागले को कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान-2018 समर्पित करते हुए हम भारतीय पत्रकारिता की अनंत संभावनाओं को रेखांकित कर रहे हैं।”

जेपी से मिली प्रेरणा, गांधी से साहस और आंबेडकर ने किया मार्गदर्शन : वागले

सम्मान समारोह में अपने  संबोधन में निखिल वागले ने कहा कि वे अपना सम्मान भारत के विभिन्न भाषाओं में पत्रकारिता कर रहे बहादुर पत्रकारों को समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस पुरस्कार के तहत प्राप्त राशि को दो संस्थाओं को देंगे। इनमें से एक पी. साईंनाथ द्वारा संचालित पीआरएआई को है जो मूल रूप से ग्रामीण क्षेत्र के मुद्दों को लेकर पत्रकारिता कर रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिक जीवन में उन्होंने कई बार हमले झेले हैं और हर बार उन्हें सच के साथ खड़ा होने का साहस मिला है। उन्होंने कहा कि उनके उपर सबसे पहला हमला 1979 में हुआ जब वे महज 20 वर्ष के थे। उस समय शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के एक इंटरव्यू को लेकर उनके समर्थक भड़क गए थे। तब अचानक उनके उपर ब्लेड से हमला किया गया। वागले ने यह भी बताया कि उनके उपर जितने हमले हुए, वे सब कांग्रेस के कार्यकाल में हुए।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पत्रकारिता तब शुरू की जब देश में आपातकाल का दौर था। तब जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े। इस आंदोलन ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। बाद में उन्होंने गांधी को पढ़ा और उनके विचारों से प्रभावित हुए और सच के साथ खड़ा होने का साहस मिला। बाद में आंबेडकर के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया और इसके कारण समाज के आखिरी आदमी जो कि वंचित और शोषित है, उसके लिए पत्रकारिता करने की प्रेरणा मिली।

कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान-2018 के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते निखिल वागले

इस मौके पर वागले ने कहा कि आम तौर पर दिल्ली में हिंदी या अंग्रेजी भाषा में पत्रकारिता को ही नेशनल मीडिया का दर्जा दिया जाता है। उन्होंने दु:ख जाहिर किया कि भारत की विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में पत्रकार सच लिखने का साहस दिखा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई तवज्जो नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तरीय पत्रकारिता के विन्यास का विस्तार किया जाना चाहिए।

निर्भीक पत्रकार रहे हैं निखिल वागले : ओम थानवी

वरिष्ठ पत्रकार और हरि सिंह गौड़ पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति ओम थानवी ने इस मौके पर निखिल वागले की पत्रकारिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि निखिल वागले निर्भीक पत्रकारिता के पर्याय रहे हैं। महज 19 वर्ष की उम्र में वे मराठी दैनिक दिनांक के संपादक बने। बाद में उन्होंने कई पत्रिकाओं का प्रकाशन भी किया। 1990 के दशक में उन्होंने मराठी में महानगर नामक अखबार का प्रकाशन किया। मुंबई में उनका दफ्तर शिवसेना के मुख पत्र सामना के ठीक सामने था। 1991 में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के खिलाफ एक खबर प्रकाशित होने पर शिवसेना के समर्थकों ने महानगर के दफ्तर पर हमला बोला। बाद में नारायण राणे के खिलाफ एक खबर पर भड़के शिवसेना समर्थकों ने निखिल वागले पर हिंसक हमला किया।

ओम थानवी ने कहा कि उन दिनों वे एडिटर गिल्ड के सदस्य थे और संभवत: जिस समय शिवसेना के समर्थक निखिल वागले पर हमला बोल रहे थे, उसी समय उन्होंने फोन किया था। तब भी वागले डरे नहीं थे। उन्होंने पूरी मजबूती के साथ सामना किया।

ओम थानवी ने एक और घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले विधायक के निधन पर महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा शोक प्रस्ताव के संबंध में निखिल वागले ने सवाल उठाया था और इसके लिए विधानसभा की अवमानना के आरोप में उन्होंने सात दिनों तक जेल की सजा काटी लेकिन पीछे नहीं हटे।

याद किए गए कुलदीप नैयर

कार्यक्रम के प्रारंभ में जानी-मानी पत्रकार नीरजा चौधरी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में कुलदीप नैयर के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

नीरजा चौधरी ने बताया कि कुलदीप नैयर ने हमेशा जनता के पक्ष में पत्रकारिता की और आजीवन पत्रकार बने रहे। उनके पास स्कूप की कमी नहीं होती थी। जनता की समस्याओं के बारे में उन्हें जानकारी तो होती ही थी, सरकार से जुड़े लोगों के बीच भी उनकी पैठ होती थी। खबर लिखते समय वे हमेशा इसका प्रयास करते थे कि उनकी खबरों की विश्वसनीयता बनी रहे। वे मानते थे कि एक पत्रकार केवल अपने संपादक या संस्थान के प्रति ही जिम्मेदार नहीं होता बल्कि उसे आम जनता के प्रति भी जवाबदेह होना चाहिए। यही पत्रकार होने की अनिवार्य शर्त है।

यह भी पढ़ें : आपातकाल के कुलदीप नैय्यर और आज के रवीश कुमार

नीरजा चौधरी ने कहा कि कुलदीप नैयर ने अपने जीवन में बुलंदियों को छुआ। फिर चाहे वह भूतपूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के निधन से जुड़ी खबर हो या फिर आपातकाल हटाए जाने के संबंध में खबर, उन्होंने बड़ी से बड़ी खबर को न सिर्फ ब्रेक किया बल्कि यह कोशिश की कि पत्रकारिता के मानक तत्व बरकरार रहें। उन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ आम नागरिक के कर्तव्यों का भी निर्वाह किया। नीरजा चौधरी ने इस संबंध में कुलदीप नैयर द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच शांति बहाली हेतु की गयी पहल का जिक्र भी किया।

डर और बंट रहा है भारत : कुमार प्रशांत

कार्यक्रम में दूसरे वक्ता रहे गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि इन दिनों देश के हालात दिन-पर-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। देश में डर का माहौल है। हालत यह हो गयी है कि भारत आज की तारीख में डर और बंट रहा है। जिस तरीके से पूरे देश में हिंसा का माहौल है, वह भयभीत करने वाला है। आज आवश्यकता इस बात की है कि डर के इस माहौल से देश और समाज को बाहर निकालने के लिए पहल की जाय। इस काम में पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कुमार प्रशांत ने कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान के संबंध में कहा कि 2017 में यह सम्मान पहली बार रवीश कुमार को दिया गया था। करीब दो वर्षों के बाद 2019 में यह सम्मान निखिल वागले को दिया जा रहा है। इस बीच कुलदीप नैयर का निधन भी हो गया। लेकिन जैसा कि उन्होंने अपने जीवन काल में ही इस सम्मान की स्थापना की थी कि इसके जरिए भारतीय भाषाओं में पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को प्रोत्साहित किया जाए, पुरस्कार चयन/संचालन समिति ने निखिल वागले का चयन किया है।

आशीष नंदी के निशाने पर रहे नरेंद्र मोदी

कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान के चयन/संचालन समिति के अध्यक्ष व समाज शास्त्री आशीष नंदी ने इस मौके पर निखिल वागले को बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इन दिनों हम एक ऐसे दुश्मन का सामना कर रहे हैं जिसके पास कोई जायज आधार नहीं है। वह एक बहुरूपिया है और सत्ता के लिए पूरे देश को उन्माद की आग में झोंक रहा है।

आशीष नंदी ने कहा कि लोग कहते हैं कि भारत में प्रेस डरा हुआ है। परंतु, सच तो यह है कि जो व्यक्ति पिछले पांच वर्ष से प्रधानमंत्री है उसके पास साहस नहीं है कि वह प्रेस का सामना करे। ऐसा भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है कि प्रधानमंत्री ने पांच साल तक कोई प्रेस कांफ्रेंस नहीं किया हो।

आशीष नंदी ने कहा कि आज विश्व के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के अराजक तत्व पनप रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका में भी इसी तरह का माहौल बनाया जा रहा है। उनकी फोटो कॉपी बनने का प्रयास भारत में नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।

कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान-2019 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

कार्यक्रम का संचालन विजय प्रताप ने किया।  उन्होंने कहा कि इस बार पुरस्कार संचालन समिति ने सर्वसम्मति से पृथक चयन समिति के गठन का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि अभी इसकी संचालन समित में आशीष नंदी, नीरजा चौधरी, संजय पारीख, ओम थानवी, रिजवान क़ैसर, विजय प्रताप, कुमार प्रशांत, जयशंकर गुप्त, प्रियदर्शन,  प्रमोद रंजन व अनिल सिन्हा हैं।

विजय प्रताप ने लोगों से आग्रह किया कि कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान-2019 के लिए सभी भारतीय भाषाओं में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों के बारे में सूचनाएं गांधी शांति प्रतिष्ठान को भेजें। उन्होंने कहा कि कुलदीप नैयर की इच्छानुसार इस सम्मान को अंग्रेजी को छोडकर सभी भारतीय भाषाओं के लिए खुला रखा गया है।

उन्होंने बताया  कि ईमेल अथवा पत्र के जरिए ‘पत्रकारिता सम्मान – 2019’ विषय लिखकर सूचना दी जा सकती है। इसके लिए gpf18@rediffmail.com पर ईमेल भेजा जा सकता है। साथ ही ‘गांधी शांति प्रतिष्ठाान, 221-223, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली-110002’ पर पत्र भेजा जा सकता है।

(कॉपी संपादन : अर्चना)


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