डीयू का फरमान : क्रीमीलेयर सर्टिफिकेट के साथ इनकम भी बताएं ओबीसी अभ्यर्थी

दिल्ली विश्वविद्यालय ओबीसी अभ्यर्थियों को 30 मार्च 2019 को या इसके बाद जारी गैर क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र जमा करने को बाध्य कर ही रहा है, साथ ही ऑनलाइन फार्म भरने के समय विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आय के बारे में जानकारी मांगकर उन्हें परेशान किया जा रहा है

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में स्नातक, परास्नातक व परास्नातकोत्तर (एमफिल व पीएचडी) कोर्सों में प्रवेश के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नामांकन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर अभ्यर्थियों को सुविधा दी है। परंतु अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियेां को फार्म में उलझाया जा रहा है। गैर क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र के अलावा उनसे यह कहा जा रहा है कि वे विभिन्न स्रोतों से होने वाली आय का उल्लेख करें। विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा निर्धारित इस प्रक्रिया के कारण बहुत सारे ओबीसी वर्ग के छात्र/छात्राओं को परेशानी यह हो रही है कि आय वाले कॉलम में वह किस तरह की सूचना दें।

ध्यातव्य है कि फारवर्ड प्रेस द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय में आरक्षित वर्गों के छात्र-छात्राओं को होने वाली परेशानियों के मद्देनजर एक पहल की गयी। इसके तहत यह आह्वान किया गया है कि यदि वे किसी तरह की परेशानी का सामना कर रहे हों तब हमें सूचित करें। इसी कड़ी में प्राप्त एक ईमेल में यह बताया गया है कि ऑन लाइन फार्म भरने के क्रम में ‘ओबीसी के लिए पारिवारिक वार्षिक आय’ संबंधी विवरण देने को कहा जा रहा है। विकल्प को खोलने पर एक ड्रापडाउन मेन्यू सामने आता है। इसमें पांच विकल्प दिए जा रहे हैं। इनमें वेतन से आय, कृषि से आय, प्रोफेशनल/व्यवसायिक आय, किराये से प्राप्त आय और अन्य स्रोतों से प्राप्त आय शामिल है।

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अभ्यर्थियों की परेशानी यह हे कि एक तरफ तो उन्हें 30 मार्च 2019 या फिर इसके बाद के जारी गैर क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र देने जाने को बाध्य किया जा रहा है जिसमें इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख होता है कि अभ्यर्थी की पारिवारिक सरकार द्वारा ओबीसी के गैर क्रीमीलेयर के लिए निर्धारित आय आठ लाख रुपए से कम है। इसके बावजूद उन्हें फार्म भरते समय अलग-अलग मदों से प्राप्त आय की जानकारी देने के लिए कहा जा रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय का मुख्य प्रशासनिक भवन

अभ्यर्थियों को यह परेशानी भी हो रही है कि पारिवारिक आय में कृषि, वेतन, व्यवसाय, किराया व अन्य स्रोतों से प्राप्त आय क्या अलग-अलग उल्लेखित करने होंगे। क्या ये सभी कुल पारिवारिक आय में शामिल नहीं हैं?

इस संबंध में दिल्ली विश्वविद्यालय के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन कहते हैं कि यह तो सीधे-सीधे ओबीसी अभ्यर्थियों को परेशान करने एवं उलझाए रखने की साजिश है। इसका विरोध किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही मात्र इसी से समाप्त नहीं हो जाती है कि वह पंजीकरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन मुहैया करा रही है। यह उसका दायित्व है कि वह सभी अभ्यर्थियों के लिए फार्म को सरल बनाए।

दिल्ली विश्वविद्यालय के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन व प्रो. शशि शेखर सिंह

वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. शशि शेखर सिंह के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन की यह कार्यवाही पूर्णतया गलत है। परास्नातकोत्तर कोर्सों यथा एमफिल और पीएचडी के लिए नामांकन करने वाले ओबीसी अभ्यर्थियों को आरक्षण से वंचित रखने का तरीका भी है। इसका मतलब यह है कि यदि पारिवारिक आय आठ लाख रुपए की सीमा से कम है तब अभ्यर्थी की अपनी आय को मिलाकर उन्हें क्रीमीलेयर घोषित कर दिया जाय। इससे ओबीसी अभ्यर्थियों को नुकसान होगा।

प्रो. राजीव गुप्ता, डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर, दिल्ली विश्वविद्यालय

दरअसल, अभ्यर्थियों की परेशानी  का सबब केवल यह नहीं है कि फार्म में उन्हें अलग से विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आय के बारे में जानकारी देनी पड़ रही है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किसी तरह की सहायता नहीं उपलब्ध कराना भी है। कहने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक शिकायत निवारण कोषांग का गठन किया गया है। इसका नंबर भी विश्वविद्यालय के अधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। मसलन 011-27667092 एवं 011-27006900 पर फोन कर सहायता लेने की बात कही गयी है।

फारवर्ड प्रेस ने जब उपरोक्त नंबरों पर फोन कर जानकारी लेने का प्रयास किया तो दोनों नंबर हमेशा व्यस्त बताए गए। बताते चलें कि विश्वविद्यालय के अधिकारिक वेबसाइट पर डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. राजीव गुप्ता के कार्यालय से सहायता लेने की बात कही गयी है। लेकिन इसके लिए मंगलवार से लेकर शुक्रवार तक सुबह दस बजे से लेकर शाम के चार बजे तक की समयसीमा निर्धारित है। ऐसे में वे अभ्यर्थी जो अधोवर्णित समय से अलग यानी सुबह, रात या फिर शनिवार और रविवार को आवेदन करना चाहते हैं, उनकी सहायता की जिम्मेदारी से विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाथ उठा रखा है।

फारवर्ड प्रेस ने इस संबंध में  प्रो. राजीव गुप्ता से उनके अधिकारिक नंबरों (011-27666518, 27667092) पर फोन कर जानकारी लेने का प्रयास किया। लेकिन हर बार कॉल जाने के बाद रिसीव नहीं किया गया।

(दिल्ली विश्वविद्यालय में नामांकन के दौरान अगर आपके अथवा आपके के किसी परिचित के साथ  नाइंसाफी होती है तो फारवर्ड प्रेस को अवगत करायें। मोबाइल – 7004975366, ईमेल – editor@forwardpress.in )

(कॉपी संपादन : सिद्धार्थ)


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