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इस किताब में पढ़ें, जाति को लेकर क्या थी कबीर की राय?

फारवर्ड प्रेस द्वारा प्रकाशित ‘जाति के प्रश्न पर कबीर’ पुस्तक लिखने की जरूरत कमलेश वर्मा को क्यों पड़ी। इस संबंध में वे बताते हैं कि कबीर केवल वर्णाश्रम के विरोधी कवि नहीं हैं, वे जातिवाद के केवल भावुक विरोधी नहीं हैं; बल्कि समाज की निर्मिति में जातियों की भूमिका पर विचार करनेवाले कवि हैं

कबीर की कविताएँ जातियों के विवरण और विन्यास के माध्यम से अनेक बातें कहती हैं. वे अपने परिवेश में जातियों की सामाजिक स्थिति को बखूबी समझते हुए भक्तिपरक बातें करते हैं. उन्हें जरा भी भ्रम नहीं है कि जातियों की असलियत क्या है? ‘जाति के प्रश्न पर कबीर’ पुस्तक में कबीर से सम्बन्धित उन प्रश्नों पर विचार किया गया है जिनका जुड़ाव ‘जाति’ से है.

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लेखक के बारे में

कमलेश वर्मा

राजकीय महिला महाविद्यालय, सेवापुरी, वाराणसी में हिंदी विभाग के अध्यक्ष कमलेश वर्मा अपनी प्रखर आलोचना पद्धति के कारण हाल के वर्षों में चर्चित रहे हैं। 'काव्य भाषा और नागार्जुन की कविता' तथा 'जाति के प्रश्ने पर कबीर' उनकी चर्चित पुस्तकें हैं

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