h n

ओबीसी युवाओं को आईएएस बनने से रोक रहा है सरकार का यह नियम

सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे ओबीसी अभ्यर्थियों के मुताबिक वर्ष 2014 से लेकर अब तक 55 उम्मीदवारों को अच्छे रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद आईएएस में नियुक्त नहीं किया गया है। वहीं करीब 15 ऐसे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने ओबीसी होने के बावजूद सामान्य श्रेणी के तहत अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण माने जाने वाले पदों को स्वीकार किया है। नवल किशोर कुमार की खास रपट

देश में भले ही ओबीसी वर्ग से आने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार हो और ओबीसी के लिए आरक्षण लागू हो परंतु अब भी नौकरशाही में द्विजवाद हावी है। सार्वजनिक उपक्रमों में काम करने वाले ओबीसी वर्ग के ग्रुप सी और डी कर्मियों की संतानों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा है। परिणाम यह है कि वे अभ्यर्थी, जिन्होंने कड़ी मेहनत कर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा न केवल उतीर्ण की बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में नियुक्ति लायक रैंक भी हासिल की, उन्हें भी पदों की समतुल्यता संबंधी नियमों में अस्पष्टता का लाभ उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधीन केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय (डीओपीटी) द्वारा कम महत्वपूर्ण सेवाओं मसलन इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस), इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (आईआरटीएस), इंडियन पोस्टल सर्विस और इंडियन कॉरपोरेट लॉ सर्विस (आईसीएलसी) में नियुक्त किया गया है। वे ओबीसी अभ्यर्थीगण, जो 2018 से सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, उनसे प्राप्त जानकारी के मुताबिक करीब 55 ओबीसी अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने डीओपीटी के ऑफर को स्वीकार नहीं किया है।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : ओबीसी युवाओं को आईएएस बनने से रोक रहा है सरकार का यह नियम

लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

संबंधित आलेख

सबको दुखी कर गया राम बिलास भारती का अचानक चले जाना
बीते 26 सितंबर, 2026 को डॉ. राम बिलास भारती का हृदयगति रुकने के कारण दिल्ली में निधन हो गया। वे महज 52 वर्ष के...
अलबेले अर्थशास्त्री डॉ. आंबेडकर (संदर्भ : रुपए की समस्या, उद्गम और समाधान, पहला भाग)
डॉ. आंबेडकर के मुताबिक, “मुग़ल बादशाहों ने कभी भी अपने सिक्कों की गुणवत्ता कम नहीं की। सिक्का ढालने की तकनीक में कमियों को ध्यान...
पीली रोशनी में ओबीसी एकता की चमक और मजबूत इरादे पर जोर
दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब सभागार में आयोजित ओबीसी महासभा की बैठक में अधिकांश हिंदी-भाषी प्रदेशों से विभिन्न जातियों और पसमांदा के प्रतिनिधियों के अलावा...
एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम के तीन दशक बाद कितने बदले हालात
यह कानून लागू होने के बाद जब गिरफ्तारियां होने लगीं तब तथाकथित उच्च जातियों, पिछड़े वर्ग की जातियों को इस कानून की ताकत का...
करम परब : जंगल, खेत और रिश्तों को जोड़ने वाला आदिवासी उत्सव
करम परब को केवल करम वृक्ष की पूजा या एक रात के नाच-गाने तक सीमित करके नहीं समझा जा सकता है। यह उस समाज...