h n

बिहार चुनाव : संविधान के पक्ष में मुसलमान, सत्ता में नुमाइंदगी और सुरक्षा का सवाल भी अहम

इस बार बिहार के मुसलमान विधानसभा चुनाव में क्या चाहते हैं और उनका रूख क्या है, इस संबंध में ताबिश दे रहे हैं जमीनी जानकारी। उनके मुताबिक, बिहार के मुसलमान इस बार भारतीय संविधान को बचाने के पक्षधर है। रोजगार और नेतृत्व में हिस्सेदारी को लेकर भी उनके सवाल हैं

ग्राउंड रिपोर्ट 

बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव में 17 प्रतिशत की आबादी वाले मुस्लिम समाज का विजन इस बार बिल्कुल साफ है। इनमें पसमांदा और अशराफ दोनों शामिल हैं। राजनीतिक नेतृत्व को लेकर वे किसी दुविधा की स्थिति में नहीं हैं और अपनी मांगों को लेकर भी मुखर हैं। खास बात यह कि उर्दू का विकास, मदरसों की स्थापना, कब्रिस्तान की घेराबंदी, हज हाउस का निर्माण और वक्फ बोर्ड की संपत्ति जैसे पारंपरिक मुस्लिम पहचान वाले मुद्दों से वह अब धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है। मुस्लिम समाज सबसे पहले अपने संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और सत्ता में माकूल नुमाइंदगी चाहता है। रोजी-रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन और विकास ये वह मुद्दे हैं जो सभी के लिए समान है। सभी इसमें बेहतरी और बदलाव के हामी हैं।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : बिहार चुनाव : संविधान के पक्ष में मुसलमान, सत्ता में नुमाइंदगी और सुरक्षा का सवाल भी अहम

लेखक के बारे में

हुसैन ताबिश

हुसैन ताबिश बिहार के वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार हैं

संबंधित आलेख

दलित-बहुजनों की नजर में राम मंदिर चढ़ावा चोरी
राम मंदिर के लिए लोगों से चंदा वसूलने वाले घनश्याम ठठेरी कहते हैं कि अब चंदाचोरी, ज़मीन की ख़रीद में गड़बड़ी आदि सुनकर लग...
मुसलमानों में जाति को नकारना हिंदुत्व को मदद करना है
मुस्लिम धर्मगुरुओं, जिनमें ज़्यादातर अशराफ (सवर्ण) जातियों से हैं, में इस प्रवृत्ति की एक बड़ी वजह उनके द्वारा हिंदुत्व को हिंदू धर्म का पर्याय...
ओडिशा में मज़बूत दलित-ओबीसी-आदिवासी आंदोलन क्यों नहीं पनप सका?
राज्य के ओबीसी मानते हैं कि वे आरक्षण के लिए पात्र हैं लेकिन वे जाति-विरोधी आंदोलनों और दलितों के लिए आरक्षण को एक कलंक...
शिक्षा में पीछे छूट गए लोगों को पढ़ने का एक और मौका दे रहा पैकपेट
कोल्लुरी सथैया की दृष्टि और दृढ़ निश्चय से पैकपेट का जन्म हुआ। इस पहल का लक्ष्य है हाशियाकृत समुदायों के युवाओं को ज्ञान, कौशल...
वंचित वर्ग के छात्रों से अवसर छीनने को होते हैं पेपर लीक
समाज की कई जातियां हैं, जिन्हें पढ़ने से रोककर रखा गया। ऐसे लोग अपनी पूरी उर्जा कामयाबी के लिए लगा देते हैं। दूसरी तरफ...