बिहार : कुर्सी पर बैठे दलितों पर दबंगों ने ढाया कहर, आरोपियों के पक्ष में आए जगदीश मास्टर के रिश्तेदार

बीते 11 जुलाई को बिहार के जगदीशपुर में दबंगों ने नट जाति के लोगों पर कहर ढाया। आरोपियों का संबंध बिहार सरकार के पूर्व मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा से है जो कि बिहार मे नक्सलवादी आंदोलन के प्रणेता रहे जगदीश मास्टर के करीबी रिश्तेदार हैं। विशद कुमार की खबर

दलितों के उत्पीड़न की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सामान्य तौर पर इन घटनाओं में पीड़ित पक्ष दलित होते हैं और आक्रमणकारी पक्ष ऊंची जातियों के। लेकिन बीते 11 जुलाई, 2021 को बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर में दलित उत्पीड़न की एक घटना घटित हुई, जिसमें  पीड़ित पक्ष द्वारा जिन्हें आरोपी बनाया गया है, वे कुशवाहा जाति के हैं। यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि आरोपियों का संबंध जगदीश मास्टर के रिश्तेदार श्रीभगवान कुशवाहा से है। वही जगदीश मास्टर, जिन्होंने रामेश्वर अहीर और रामनरेश राम के साथ मिलकर बिहार में दलितों-पिछड़ों पर ऊंची जातियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ सशक्त आंदोलन की नींव रखी थी।

बताते चलें कि जगदीश मास्टर प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार लेखिका महाश्वेता देवी के उपन्यास ‘मास्टर साब’ के भी नायक हैं। वे आज भी भोजपुर के गांवों में जिंदा हैं। हर कोई यही कहता हुआ मिलता है, रात मास्साहेब मेरे घर रूके थे और कह रहे थे – हमारी लड़ाई बहुत लंबी है। जगदीश मास्टर रामेश्वर अहीर के साथ एक पुलिस कार्रवाई में मारे गए थे। भोजपुर विद्रोह में उनकी उल्लेखनीय भूमिका के कारण कम्युनिस्टों के द्वारा उन्हें और रामेश्वर अहीर को क्रमश: मार्क्स और एंगेल्स की उपाधि दी गई थी।

बिहार में नक्सल आंदोलन के प्रणेताओं की प्रतिमाएं। बाएं से दाएं – जगदीश मास्टर, रामेश्वर अहीर, रामनरेश राम, जौहर (सुब्रत दत्त) और विनोद मिश्र। (तस्वीर साभार : सीपीआई एमएल)

फिर ऐसी क्या बात हुई कि जगदीश मास्टर के रिश्तेदार श्रीभगवान सिंह कुशवाहा व उनके संबंधियों पर दलित उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है? यहां तक कि इस मामले में भाकपा माले के स्थानीय विधायक मनोज मंजिल ने अपने साथ दुर्व्यवहार का मामला दर्ज कराया है।

क्या है मामला? 

पीड़ित पक्ष द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे के मुताबिक, बीते 11 जुलाई, 2021 की रात करीब 9 बजे भोजपुर जिला के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के दुल्हिनगंज के नट टोली से श्रीभगवान सिंह कुशवाहा के भतीजे स्थानीय मुखिया नीरज सिंह कुशवाहा तथा उनके चचेरे भाई दीपू कुशवाहा कार से गुज़र जा रहे थे। नट टोली में सड़क किनारे धनोज कुमार और मुन्ना नट कुर्सी लगाकर बैठे थे। नीरज कुशवाहा और दीपू कुशवाहा ने उन्हें ठोकर मार दी। दोनों दलित युवक गिर पड़े और उन्होंने नीरज को अंधा बोल दिया। इस पर नीरज कुशवाहा ने कार को पीछे ले जाकर पुन: उन्हें धक्का मारने की कोशिश की। तब तक नट जाति के लोग जुट गए। लोगों को देखकर नीरज कुशवाहा और दीपू कुशवाहा वहां से भाग खड़े हुए। 

हमले में घायल नट जाति के लोग व महिलाएं

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विवाद समाप्त हो गया। हुआ यह कि थोड़ी देर बाद लगभग पचास लोगों के साथ आकर नीरज कुशवाहा व दीपू कुशवाहा ने नटों की बस्ती पर हमला बोल दिया। इस हमले में धनोज की मां राजकुमारी देवी (50 वर्ष), धनोज की पत्नी, उसकी बहन एवं उसके पिता कमलेश नट को बुरी तरह पीटा। वहीं आरोपियों ने धनोज की बहन को घसीट कर बाहर ले जाने की कोशिश की। हालांकि लोगों के प्रतिकार के सामने सफल नहीं सके। इस बीच घटना की जानकारी जगदीशपुर थाना को दी और उसने हस्तक्षेप किया तब जाकर स्थिति संभली। पुलिस ने सभी घायलों को आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया। 

दोनों पक्षों ने दर्ज कराया है मामला

श्रीभगवान सिंह कुशवाहा, पूर्व मंत्री, बिहार सरकार

ध्यातव्य है कि इस टोली में नट जाति के करीब दस परिवार हैं। ये लोग लंबे समय से बसे हुए हैं। घटना के दूसरे दिन घायल राजकुमारी देवी के बयान पर जगदीशपुर थाना में कांड संख्या – 244/21, दिनांक – 12.7.21 के तहत आईपीसी की धारा – 147, 148, 149, 323,307, 354, 279, 337, 504, 506 दर्ज किया गया है। लेकिन घटना के इतने दिनों बाद भी आरोपियों को गिफ्तारी नहीं हो सकी है। 

घटना के दूसरे दिन जब घटना की जानकारी अगियांव के विधायक मनोज मंजिल को हुई तो वे घायलों को देखने सदर अस्पताल पहुंचे। जहां श्रीभगवान सिंह कुशवाहा के लोगों ने मनोज मंजिल को जाति सूचक गालियां दी। 

मनोज मंजिल ने इस घटना के बारे में बताया कि उन्हें काफी भलाबुरा कहा और कहा कि आप यहां राजनीति करने आए हैं! यहां राजनीति मत करिए। यहां आपका नहीं चलेगानट लोगों को हम लोगों ने बसाया हैहम जैसा चाहेंगे, वैसा उनके साथ बर्ताव करेंगे। काफी बकझक के बाद जब पुलिस ने हस्तक्षेप किया तब वे लोग वहां से भागे। इस बाबत मनोज मंजिल ने आरा के हरिजन थाना में एक एफआईआर दर्ज कराई है।

वहीं दूसरी तरफ आरोपियों द्वारा भी पीड़ितों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। मामले में कहा गया है कि ये दलित लोग एससी-एसटी एक्ट में फंसा देने की धमकी देकर हमें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहते हैं।

वहीं इस संबंध में श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने फारवर्ड प्रेस से दूरभाष पर बातचीत में यह तो स्वीकार किया कि 11 जुलाई को दो पक्षों के बीच कहासुनी हुई थी। लेकिन इसके पीछे कोई जातिगत सवाल नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय विधायक मनोज मंजिल दलित अत्याचार के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।

बहरहाल, दोनों पक्षों द्वारा मामला दर्ज कराए जाने के बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं की गयी है। हालांकि मामले की जांच के लिए विधानसभा की एक कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी के अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी हैं। वहीं अन्य सदस्यों में मनोज मंजिल, रेखा देवी, सतीश कुमार, ज्योति देवी और निक्की हेम्ब्रम को शामिल किया गया है।

(संपादन : नवल/अमरीश)


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