जातिगत जनगणना के समर्थन में तेलंगाना विधानसभा में प्रस्ताव पारित, टाटा समूह ने गिरायी कर्मियों पर गाज, छत्तीसगढ़ व बिहार में याद किए गए महिषासुर-रावण

बहुजन साप्ताहिकी के तहत इस बार पढ़ें छत्तीसगढ़ व बिहार में महिषासुर व रावण को कृतज्ञतापूर्वक याद करने की खबरें। साथ ही एक खबर एयर इंडिया के कर्मियों के संबंध में जिनके उपर टाटा समूह ने गाज गिरा दी है

बहुजन साप्ताहिकी

बीते 15 अक्टूबर, 2021 को तेलंगाना विधानसभा में जातिगत जनगणना के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह जनगणना के दौरान पिछड़ी जातियों के लोगों की गणना भी कराये। इस आशय का प्रस्ताव तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने सदन में रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब व वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए यह आवश्यक है कि उनके संबंध में ठोस आंकड़े हों ताकि उनके कल्याणार्थ योजनाओं का निर्माण किया जा सके। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 15 के उपखंड 4 व 5 तथा अनुच्छेद 16 के उपखंड 4 के तहत जो प्रावधान सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए किये गए हैं, उन्हें ध्यान में रखकर जातिगत जनगणना कराया जाना जरूरी है।

एयर इंडिया के सात हजार कर्मियों पर गिरी गाज, सरकारी क्वार्टर खाली करने का निर्देश

टाटा समूह ने एयर इंडिया के सात हजार कर्मियों को अगले छह माह के अंदर सरकारी क्वार्टर खाली करने का निर्देश दिया है। ये क्वार्टर मुंबई के कलीना व सांताक्रुज इलाकों में बने हैं। कर्मियों को इस आशय का पत्र कल 15 अक्टूबर, 2021 को भेजा गया है। इसे लेकर मदुरै से लोकसभा सांसद एस. वेंकटेशन ने केंद्रीय नागरिक मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि अबतक ये कर्मी सरकारी क्वार्टरों में सम्मानजनक जीवन जी रहे थे। लेकिन अब उन्हें मजबूर किया जा रहा है कि वे बेघर हो जाएं। वेंकटेशन ने कहा है कि कर्मियों के आत्मसम्मान को चोट पहुंचायी जा रही है।

छत्तीसगढ़ और बिहार में याद किये गए महिषासुर व रावण 

बीते सप्ताह द्विजवादी नवरात्र उत्सव के दौरान छत्तीसगढ, बिहार और झारखंड के कई इलाकों में महिषासुर व रावण को पूरी श्रद्धा से याद किया गया। बताते चलें कि द्विजवादी महिषासुर व रावण को खलनायक मानते हैं और हर साल उनके वध का प्रदर्शन करते हैं। हाल के वर्षों में द्विजवादियों के इस हिंसक आडंबर का विरोध तेजी से होना शुरू हुआ है। मसलन, बीते 14 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के खुरसेखुर्द मानपुर में आदिवासी-ओबीसी-मूलनिवासी समाज ने राजा रावेन (रावण) और राजा महिषासुर की शहादत दिवस पर “पेन पुरखाज स्मृति” कार्यक्रम का आयोजन किया। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों में से एक कोरचा गढ़ के खुर्से कला में 124 गांव के 5000 से अधिक आदिवासियों ने राजा रावण, राजा बली, महिषासुर एवं मेघनाथ की पूजा की। 

छत्तीसगढ़ के खुरसेखुर्द मानपुर में उपस्थित जनसमूह

बताते चलें कि छत्तीसगढ़ के मानपुर ब्लॉक में 5000 से अधिक आदिवासियों ने अपनी पेन परम्परा को संविधानिक मान्यता देते हुए ग्राम सभा का आयोजन कर राजा रावण के दहन को प्रतिबंधित कर दिया है। इसके लिए विभिन्न गांव में ग्राम सभा का आयोजन कर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर तय किया की 124 गांव में रावण दहन में कोई भी आदिवासी कतई भी शरीक नही होगा, ना ही कोई सहयोग देगा ना ही ऐसा कोई आयोजन करेगा। इस बार के आयोजन में ओबीसी समाज के प्रतिनिधियों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इनमें ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष सगुन लाल वर्मा, विष्णु बघेल, साहू समाज के प्रतिनिधि रघुनंदन साहू, अर्जुन सिंह ठाकुर, अखिल भारतीय बौद्ध महासभा के प्रतिनिधि डा. आर. के. सुखदेव आदि शामिल रहे। आयोजन में बृजेश सिंह, ज्ञानेंद्र रामटेके, अंगद सलामे, वेद नेताम, दुष्यंत शाह मंडावी, भूषण धुर्वे, बालसिंह आचला, भुनेश्वर कुमेटी, अजय तुलावी, राजु मरकाम, रामजी तुलावी, ओमप्रकाश तुलावी, संतोष नेताम, सुकालू हिडको, धन साय तुलावी आदि की भूमिका अहम रही।

वहीं बिहार के सुपौल जिले में महिषासुर की प्रतिमा स्थापित की गयी। इस दौरान लोगों को संविधान एवं जोतीराव फुले व डॉ. आंबेडकर आदि महान बहुजन नायकों के योगदानों के संबंध में जानकारियां दी गयीं। बिहार में ही सुपौल के अलावा जहानाबाद, अरवल और गया आदि जिलों में महिषासुर शहादत दिवस समारोह मनाए जाने की सूचना प्राप्त हुई है।

जगदेव प्रसाद के छोटे भाई बीरेंद्र कुमार का निधन, घर की महिलाओं ने अर्थी को दिया कंधा

बिहार लेनिन के नाम से प्रसिद्ध शहीद जगदेव प्रसाद के छोटे भाई और अर्जक नेता बीरेंद्र कुमार का निधन बीते 13 अक्टूबर, 2021 को बिहार गया जिले में हो जाने की सूचना प्राप्त हुई है। वे आजीवन अर्जक संघी रहे और ब्राह्मणवादी कुरीतियों के विरोधी रहे। जगदेव प्रसाद के संघर्ष व उनकी स्मृतियों के संबंध फारवर्ड प्रेस द्वारा उनका एक साक्षात्कार भी प्रकाशित है। 

बीते 13 अक्टूबर को उनकी अंत्येष्टि गया में फल्गू नदी के किनारे अर्जक संघ के तरीके से किया गया, जिसमें ब्राह्मणवादी परंपराएं शामिल नहीं थीं। वहीं उनकी अर्थी को उनके घर की महिलाओं ने कंधा दिया। इस अवसर पर अर्जक संघ के नेता उपेन्द्र पथिक, शिवनंदन प्रभाकर, राजेन्द्र प्रसाद सिंह, शिशुपाल, शोषित समाज दल के नेता उमाकांत राही, पूनम कुमारी, अभय राज और रामविनय सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उनकी अंत्येष्टि के समय अर्जक संघी नारा ‘जन्मना मरना सत्य है’ लगान्या गया। 

(संपादन : अनिल)


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