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उत्तर प्रदेश : पहले चरण के चुनाव में महत्वपूर्ण रहेंगीं दलितों के लिए आरक्षित ये सीटें

उत्तर प्रदेश में पहले चरण के तहत 58 विधानसभा क्षेत्रों में आगामी 10 फरवरी को मतदान होंगे। इनमें 9 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इन क्षेत्रों की राजनीति, मुद्दे और मौजूदा हालातों के बारे में बता रहे हैं सुशील मानव

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। सूबे में सत्ता का रास्ता 86 आरक्षित (84 अनुसूचित जाति, 2 अनुसूचित जनजाति) सीटों से होकर जाता है। खासकर यदि सूबे के चुनावी इतिहास पर गौर करें तो इन 86 विधानसभा क्षेत्रों की अहमियत पुख्ता हो जाती है। मसलन, साल 2007 में सत्ता में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को इन 86 सीटों में से 62 सीटों पर जीत मिली थी और तब उत्तर प्रदेश में उसकी सरकार बनी थी। वहीं साल 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने 58 आरक्षित सीटें जीतीं और सूबाई हुकूमत पर कब्जा जमाया। जबकि साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 86 आरक्षित सीटों में से 76 सीटों पर जीत दर्ज़ की थी और प्रदेश में सरकार बनाने में सफल रही थी। दिलचस्प यह कि भाजपा ने 86 आरक्षित सीटों में से 65 सीटों पर गैरजाटव उम्मीदवारों को टिकट दिया था।

बता दें कि प्रदेश में दलित मतदाताओं की संख्या करीब 20-21 प्रतिशत है। इनमें भी 54 प्रतिशत जाटव हैं। अन्य जातियों में पासी 16 प्रतिशत, धोबी-कोरी-बाल्मीकि 15 प्रतिशत, तथा गोंडधानुक-खटीक करीब 5 प्रतिशत हैं। 

केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने एलान किया है कि सूबे में सात चरणों में मतदान होंगे जो आगामी 10 फरवरी से शुरू होकर 7 मार्च तक होंगे। इस तरह पहले चरण के चुनाव के तहत 10 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों के 58 सीटों पर मतदान होना है। इन 58 सीटों में 9 सीटें आरक्षित सीटें हैं। आइए, इन सीटों पर निगाह डालते हैं।

पुरकाजी विधानसभा क्षेत्र : निर्णायक रहेंगे मुस्लिम मतदाता

मुजफ्फरनगर जिले में 6 विधानसभा सीटें हैं– बढ़ाना, चरथावल, पुरकाजी, मुजफ्फरनगर, खतौली और मीरापुर। परिसीमन के बाद साल 2008 में पुरकाजी सीट अस्तित्व में आया जो कि अनुसूचित समुदाय के लिये आरक्षित है। यहां कुल 3,03,532 मतदाताओं में क़रीब एक लाख मुस्लिम, 58 हजार जाटव और 24 हजार जाट मतदाता हैं। उनके अलावा यहां पाल, ब्राह्मण, त्यागी और ठाकुर वोटर भी बहुत अधिक संख्या में हैं। 

पुरकाजी सीट पर अब तक दो बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। साल 2012 विधानसभा चुनाव में बसपा के अनिल कुमार ने कांग्रेस के दीपक कुमार को 8908 वोटों के अंतर से हराया था। जबकि साल 2017 में भाजपा उम्मीदवार प्रमोद उत्तवाली ने कांग्रेस के दीपक कुमार को क़रीब 11 हजार मतों से हराया था। 

इस बार भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक को ही दोबारा से चुनावी टिकट थमाया है। जबकि बसपा ने सुरेंद्र पाल सिंह को टिकट दिया है। वहीं सपा-आरएलडी गठबंधन की ओर से आरएलडी के अनिल कुमार मैदान में हैं।

मुजफ्फरनगर की समाजिक राजनीति पर सूक्ष्म नज़र रखने वाले आतिफ़ रज़ा कहते हैं कि दो प्रमुख नदियों गंगा-जमुना के दोआबा में बसे मुजफ्फरनगर की उपजाऊ भूमि के कारण किसान व मजदूर काफी सम्पन्न हैं। गन्ना और गेहूं यहां प्रमुख रूप से उगाया जाता है। इस जनपद में 8 चीनी की मिलें हैं। वहीं सैकड़ों की संख्या में पेपर मिल व स्टील प्लांट भी चलाए जा रहे हैं। इस जनपद की 70 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है।

वे आगे कहते हैं कि यह क्षेत्र शैक्षिक और आर्थिक रूप से कितना पिछड़ा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुरकाजी नगर पंचायत क्षेत्र में कोई भी सरकारी इंटरमीडिएट स्कूल और डिग्री कॉलेज नहीं है। क्षेत्र के लोगों द्वारा यहां शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने की मांग हुई, आंदोलन हुये, लेकिन हालात नहीं बदले। राजनीतिक समीकरणों के बारे में आतिफ़ रज़ा कहते हैं कि मुस्लिम-जाट का गठजोड़ इस सीट पर आरएलडी के पक्ष में है। जबकि जाटव-मुस्लिम का कंबिनेशन बसपा के पक्ष में जा सकता है। दोनों ही सूरतों में में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं और वो जिसके जीतने की उम्मीद ज़्यादा होगी, उसके साथ जायेंगे।

योगी आदित्यनाथ, प्रियंका गांधी, मायावती व अखिलेश यादव

हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक गुर्जर व मुस्लिम

मेरठ जिले की 7 विधानसभा सीटें– सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर, किठौर, मेरठ कैंट, मेरठ सदर, मेरठ दक्षिण हैं। हस्तिनापुर विधानसभा अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित सीट है। करीब 3 लाख 25 हज़ार मतदाताओं वाली इस सीट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम और गुर्जर मतदाता हैं, जिनकी संख्या लगभग 90 हजार है। दलित समुदाय के मतदाताओं की संख्या 60 हजार के क़रीब है। वहीं करीब 25 हजार जाट समाज के मतदाताओं के हैं। इनके अलावा करीब 12 हजार सिख और अन्य समुदाय के मतदाता हैं। 

गंगा नदी के किनारे के इलाकों वाली हस्तिनापुर सीट से फिलहाल भाजपा के दिनेश खटिक विधायक हैं, जिन्हें कैबिनेट विस्तार में जगह देते हुए मंत्री बनाया गया। वर्ष 2017 के चुनाव में दिनेश खटिक (99,436) ने बसपा के योगेश वर्मा (63,374) को 36,062 मतों के अंतर से हराया था। जबकि सपा के मौजूदा प्रत्याशी प्रभु दयाल जो कि तब इस क्षेत्र से विधायक थे, उन्हें 48,979 वोट मिले थे और वह तीसरे नंबर पर रहे थे। 2012 के चुनाव में सपा के टिकट पर प्रभुदयाल वाल्मीकि और उससे पहले 2007 में बसपा के योगेश वर्मा विधायक बने थे।

इस बार इस सीट से बसपा ने संजीव कुमार जाटव को टिकट दिया है तो भाजपा ने फिर से दिनेश खटीक को आजमाया है। वहीं कांग्रेस ने अभिनेत्री अर्चना गौतम को टिकट दिया है।

इस क्षेत्र में सबसे बड़ा मुद्दा बाढ़ से होने वाली समस्या है। लगभग हर साल ही हस्तिनापुर का खादर क्षेत्र बाढ़ के पानी से प्रभावित हो जाता है। विकास के कई दावे हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र के लिए किए जाते हैं और हस्तिनापुर एक पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित करने की कई बार बात की जा चुकी है लेकिन इस क्षेत्र का विकास अभी तक कम ही हुआ लगता है। वहीं इस क्षेत्र को सामान्य सीट में बदलने की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। 

हापुड़ सदर में दांव पर आरएलडी की साख 

हापुड़ जिले की तीन विधानसभा सीटों में धौलाना, गढ़ और हापुड़ सदर (सुरक्षित) शामिल हैं। हापुड़ सदर विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,26,998 मतदाता हैं, जिनमें करीब 80 हजार मुस्लिम, करीब 82 हजार जाटव सहित अन्य अनुसूचित जातियों के मतदाता, करीब 50 हजार जाट, करीब 28 हजार वैश्य, करीब 8 हजार ठाकुर, करीब 10 हजार त्यागी, करीब 21 हजार ब्राह्मण, करीब 3 हजार यादव, करीब 6 हजार सैनी, करीब 5 हजार सिक्ख व करीब 33 हजार अन्य जाति-समुदायों के मतदाता हैं।

इस बार इस सीट से बसपा ने मनीष कुमार सिंह उर्फ़ मोनू को जबकि भाजपा ने विजय पाल आड़ती को उतारा है। आरएलडी ने गजराज सिंह को टिकट दिया है। बता दें कि गजराज सिंह कांग्रेस छोड़कर आरएलडी में शामिल हुये हैं। गजराज सिंह हापुड़ विधानसभा से 1985, 1989, 1993, 2012 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुये हैं। हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के प्रत्याशी ने हराया था। साल 2017 में हापुड़ सदर (सुरक्षित) पर भाजपा के विजय पाल ने कांग्रेस के गजराज सिंह को 15006 वोटों के अंतर से हराया था।

बहरहाल, इस बार यहां मुस्लिम-जाटव समीकरण बसपा के पक्ष में बनता दिख रहा है। वहीं जाट, मुस्लिम और ओबीसी मतदाता का एक दूसरा समीकरण रालोद के पक्ष में भी जाता दिखता है। रोज़गार यहां बड़ा मुद्दा और मतदाताओं में भाजपा से नाराज़गी भी है। 

 खुर्जा में सभी को जातिगत समीकरणों की दरकार 

बुलंदशहर जिले की 7 विधानसभा सीटों में सिकंदराबाद, बुलंदशहर, स्याना, अनूपशहर, शिकारपुर, डिबाई और खुर्जा शामिल है। खुर्जा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। करीब 3,60,531 मतदाताओं वाले खुर्जा सीट पर मुख्य रूप से जाटव, प्रजापति, खटिक, वाल्मीकि, ठाकुर, ब्राह्मण, जाट और मुस्लिम समुदाय के मतदाता हैं। इस क्षेत्र में क़रीब 75 हजार ठाकुर, करीब 60 हजार मुसलमान, करीब 55 हजार जाटव, करीब 45 हजार ब्राह्मण, करीब 22 हजार हजार वैश्य और करीब 35 हजार जाट मतदाता हैं। 

इस क्षेत्र की खासियत यह है कि यहां जातिगत गठजोड़ जीत में निर्णायक भूमिका निभाता है। पिछली बार यानी 2017 के चुनाव में भाजपा के बृजेंद्र सिंह ने चुनाव जीता तो उन्हें ब्राह्मण, ठाकुर जाट और वैश्य मतदाताओं ने एकमुश्त वोट दिया था। तब बृजेंद्र सिंह को कुल 1,19,493 वोट मिले थे। उनका कुल वोट शेयर 50.79 प्रतिशत था। जबकि दूसरे नंबर पर रहे बसपा प्रत्याशी को महज 55,194 वोट मिले थे। इससे पहले 2012 में कांग्रेस के बंसी सिंह पहाड़िया ने बसपा के हरेराम सिंह को हराया था। तब बंसी सिंह पहाड़िया को 98,913 वोट मिले थे। 

इस सीट से बसपा ने विनोद कुमार जाटव और भाजपा ने मीनाक्षी सिंह को टिकट दिया है। वहीं सपा-रालोद ने अभी प्रत्याशी का नाम घोषित नहीं किया है

खैर विधानसभा क्षेत्र में चलेगी जाट राजनीति

अलीगढ़ जिले के 7 विधानसभा सीटें खैर, बरौली, अतरौली, छर्रा, कोल, अलीगढ़ और इगलास है। जिसमें दो सीटें खैर और इगलास अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित सीट है। यहां करीब 1 लाख दस हजार जाट मतदाता, करीब 51 हजार ब्राह्मण, करीब 45 हजार जाटव और करीब 20 हजार राजपूत जाति के मतदाता हैं। 

जाटों के वर्चस्व के चलते पिछले 5 विधानसभा चुनावों में से 3 बार रालोद को जीत मिली है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में जाट, ब्राह्मण, राजपूत गठजोड़ के चलते भाजपा के अनूप वाल्मीकि ने 50 हजार से अधिक अंतर से चुनाव जीता था। उन्हें कुल 1,24,198 वोट मिले थे। वहीं दूसरे स्थान पर बसपा के प्रत्याशी राकेश कुमार मौर्य को यहां पर 70721 वोट मिले थे। इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर राष्ट्रीय लोक दल के भगवती प्रसाद चुनाव जीते थे। इससे पहले 2007 में यहां से आरएलडी के सत्यपाल सिंह विजयी हुए थे।

इस बार इस सीट से बसपा ने प्रेम पाल सिंह जाटव और भाजपा ने अनूप प्रधान वाल्मीकि को अपना उम्मीदवार बनाया है। 

इगलास विधानसभा क्षेत्र में निर्णायक रहेंगे जाट

अलीगढ़ जिले की यह दूसरी विधानसभा सीट है जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इस विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या क़रीब 3,75,813 है। इस विधानसभा में सीट पर ब्राह्मण और जाट बिरादरी की निर्णायक भूमिका रहती है। कुल मतों का करीब 33 प्रतिशत यानि करीब 1 लाख 10 हजार जाट मतदाता हैं। इसके बाद ब्राह्मण मतदाता क़रीब 51 हजार, जाटव मतदाता क़रीब 45 हजार, मुस्लिम मतदाता 24 हजार, बघेल 30 हजार, ठाकुर मतदाता क़रीब 20 हजार, गडरिया 12 हजार 500 , वैश्य 12 हजार  और अन्य सामान्य जातियों के करीब 5 हजार मतदाता हैं।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के अनूप वाल्मीकि ने 1,24,198 वोट प्राप्त कर अपने प्रतिद्वंद्वी बीएसपी के राकेश मौर्य को 70721 मतों से हराया था। इस बार इस सीट पर बसपा ने सुशील कुमार जाटव को और भाजपा ने राजकुमार सहयोगी को उतारा है। जबकि बीरपाल सिंह दिवाकर को राष्ट्रीय लोकदल ने टिकट दिया है। 

अलीगढ़ के बाबू गौतम बताते हैं जाट बाहुल्य सीट होने के चलते जाट मतदाता इस सीट पर विजेता तय करते हैं। पिछली बार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के चलते जाट, ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्य मतदाताओं ने एकजुट होकर भाजपा प्रत्याशी को बंपर मतों से विजयी बनाया था। लेकिन अबकि बार किसान आंदोलन के चलते जाट मतदाता भाजपा से नाराज़ है, और टिकैत साहेब की अपील के बाद उसका रुझान रालोद-सपा गठबंधन को मजबूत करेगा। 

बलदेव विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा सरकार व विधायकों के खिलाफ नाराजगी 

मथुरा जिला की पांच विधानसभा सीटें छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा और बलदेव हैं। इसमें बलदेव सीट अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित सीट है। वर्ष 2008 परिसीमन के से पहले यह विधानसभा क्षेत्र गोकुल विधानसभा सीट के नाम से जाना जाता था। 

इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3 लाख 50 हजार मतदाता हैं। यह जाट बाहुल्य सीट है। यहां 1 लाख 5 हज़ार जाट मतदाता, करीब 60 हज़ार अनुसूचित जाति, करीब 50 हजार ब्राह्मण मतदाता, करीब 40 हजार सैनी, करीब 40 हजार बघेल और करीब इतने ही यादव जाति के मतदाता हैं। पिछले चुनावों की बात करें तो साल 2017 चुनाव में भाजपा के पूरन प्रकाश ने रालोद प्रत्याशी को 13,208 वोट से हराया था। पूरन प्रकाश को 88,411 वोट मिले थे। रालोद से निरंजन सिंह धनगर को 75,203 वोट मिले थे। बसपा से प्रेम चंद को 53,539 वोट मिले थे।

इस बार इस सीट से बसपा ने अशोक कुमार सुमन को जबकि भाजपा ने पूरन प्रकाश जाटव को प्रत्याशी बनाया है। रालोद ने बबिता देवी और कांग्रेस ने विनेश कुमार सनवाल वाल्मीकि को टिकट दिया है।

शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े मथुरा के सौरभ चतुर्वेदी बताते हैं कि अबकि बार मतदाताओं में मौजूदा विधायकों और सत्ता के प्रति नाराज़गी है। लोग मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। सड़कें और पानी बड़ी समस्या है। किसान लगातार सिंचाई के लिए पानी की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हैं। इसके अलावा यहां आलू का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। किसान आलू प्रोसेसिंग यूनिट की मांग कई वर्षों से करते आ रहे हैं। 

आगरा कैंट विधानसभा क्षेत्र में खाता भी नहीं खोल सकी है सपा और रालोद

आगरा जिले की 9 विधानसभा सीटें हैं – आगरा कैंट, आगरा नॉर्थ, आगरा देहात (ग्रामीण), आगरा दक्षिण, बाह, एत्मादपुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी और खेरागढ़। इसमें आगरा कैंट और आगरा ग्रामीण अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित सीट है।

करीब 4,27,525 मतदाताओं वाले इस विधानसभा क्षेत्र में क़रीब 75 हजार जाटव, 25 हजार वाल्मीकि, 30 हजार मुस्लिम, 65 हजार ब्राह्मण, राठौर 25 हजार, यादव 15 हजार, जाट 15 हजार, सिंधी और पंजाबी मतदाताओ की संख्या भी 30 हजार है। पिछले 8 चुनाव में यहां से 5 बार भाजपा और 3 बार बसपा प्रत्याशी जीते हैं। सपा और रालोद यहां से कभी नहीं जीते। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. गिरराज सिंह धर्मेश (1,13,178 मत) ने बसपा प्रत्याशी गुटियारी लाल दुवेश (66,853 मत) को 46,325 मतों के भारी अंतर से हराया था। जबकि साल 2012 में बसपा के गुटियारी लाल दुवेश ने (67,786) ने भाजपा के गिरराज सिंह धर्मेश (61,371) को 6,415 मतों से हराया था। साल 2007 में बसपा के जुल्फिकार अहमद भुट्टो (30,534) ने भाजपा के केशो मेहरा (27,149) को हराया था। 

इस बार बसपा ने भारतेंद्र अरुण को, भाजपा ने डॉ. गिरराज सिंह धर्मेश और समाजवादी पार्टी ने कुंवर सिंह वकील को अपना प्रत्याशी बनाया है।

स्थानीय निवासी प्रोफेसर विजय कुमार बताते हैं कि ब्राह्मण, राठौर, जाट और गैरजाटव मतदाताओं के बूते भाजपा का इस सीट पर दबदबा रहा है। लेकिन अबकि बार बसपा के जीतने की संभावना चांस ज़्यादा है, क्योंकि भाजपा के प्रति मतदाताओं में नाराज़गी है। आगरा में जूता बनाने का कुटीर उद्योग चलता है और करीब 5000 इकाइयां यहां काम करती हैं। सांप्रदायिक ताकतों द्वारा मॉब लिचिंग से दलित और मुस्लिम समुदाय में डर का माहौल है। इससे आगरा के चमड़ा उद्योग को नुकसान हुआ है।

आगरा देहात (ग्रामीण) विधानसभा सीट में त्रिकोणीय मुकाबला

पहले दयालबाग़ के नाम से जाने जानी वाली यह सीट भी आरक्षित सीट है। करीब 3,92,467 मतदाताओं वाला यह विधानसभा सीट जाट बाहुल्य है, जिनकी संख्या 1 लाख के क़रीब है। इसके बाद जाटव मतदाताओं की संख्या करीब 65 हजार है। यहां करीब 40 हजार ब्राह्मण मतदाता और करीब 28 हजार यादव मतदाता हैं। 

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हेमलता दिवाकर (1,29,887) ने बसपा के काली चरण सुमन (64,591) को 65,296 के भारी अंतर से हराया था। जबकि साल 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा के काली चरण सुमन (69,969) ने समाजवादी पार्टी की हेमलता (51,215) को 18,754 मतों से हराया था। 

इस बार इस सीट से बसपा ने किरण प्रभा केसरी, भाजपा ने बेबीरानी मौर्य और रालोद ने महेश कुमार जाटव को मैदान में उतारा है। जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार उपेद्र सिंह हैं।

स्थानीय निवासी विजय कुमार बताते हैं कि डेंगू और कोरोना का कहर इस क्षेत्र ने देखा है। लोगों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार के प्रति आक्रोश है। मलपुरा, धनोली, चमरोली, कजराई, समेत कई गांवो में मौजूदा विधायक के ख़िलाफ़ पोस्टर लगाये गये हैं। आक्रोश को देखते हुए भाजपा ने मौजूदा विधायक हेमलता दिवाकर कुशवाहा के बदले बेबीरानी मौर्य को प्रत्याशी बनाया है। 

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

सुशील मानव

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकार और साहित्यकार हैं। वह दिल्ली-एनसीआर के मजदूरों के साथ मिलकर सामाजिक-राजनैतिक कार्य करते हैं

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