h n

पेरियार की पत्रकारिता

पेरियार द्वारा संपादित अखबारों में ‘कुदी आरसु’ और ‘विदुथलाई’ के बाद ‘रिवोल्ट’ तीसरा महत्वपूर्ण अखबार था। पहले दोनों अखबार तमिल में थे, जबकि ‘रिवोल्ट’ को अँग्रेजी पाठकों के लिए निकाला गया था। उसका पहला अंक 7 नवंबर, 1928 को इरोद से निकला था। पेरियार द्वारा प्रकाशित/संपादित पत्र-पत्रिकाओं से परिचित करा रहे हैं ओमप्रकाश कश्यप

ई.वी. रामासामी पेरियार (17 सितंबर, 1879 – 24 दिसंबर, 1973) पर विशेष

पेरियार का सार्वजनिक जीवन बेहद सक्रिय और बहुआयामी था। तमिल समाज, विशेष रूप से गैर-ब्राह्मणों में आत्ससम्मान की भावना जाग्रत करने तथा उनके अधिकारों के लिए वे कई मोर्चो पर एक साथ लड़ रहे थे। जातीय भेदभाव, राजनीतिक-सामाजिक वर्चस्ववाद, धार्मिक आडंबरवाद, सामाजिक कुरीतियां और रूढ़ियां, स्त्री-स्वतंत्र्य, जातीय विषमता, देवदासी प्रथा, विधवा समस्या, बाल-विवाह आदि। मानव समाज का कोई ऐसा सरोकार न था जो उनका अपना सरोकार न हो। न कोई ऐसी त्रासदी नहीं थी, जिससे वे जूझे न हों। वे व्यापारी, नेता, समाज सुधारक, चिंतक, विचारक, भाषा-वैज्ञानिक, तर्कशास्त्री, आंदोलनकर्मी, मार्गदर्शक आदि सभी कुछ एक साथ थे। इसके अलावा उनका एक रूप और भी था। वह था, पत्रकार-संपादक का। अधिकांश लोग उनके इस रूप के बारे में ज्यादा नहीं जानते। हालांकि इस क्षेत्र में भी उनका योगदान इतना महत्वपूर्ण और मौलिक है कि यदि उनके दूसरे कार्यों को छोड़ दिया जाए तब भी वे ‘पेरियार’ (महान) कहे जा सकते हैं। ‘कुदी आरसु’ (1925), ‘द्रविड़ियन’ (1927), ‘रिवोल्ट’ (1928), ‘पुरात्ची’ (1933), ‘पाहुथरिवु (1934), ‘विदुथलाई’ (1935), ‘जस्टिस’ (1942), ‘उन्मई’ (1970) तथा दि माडर्न रेशनिलष्ट (1971) जैसे पत्र-पत्रिकाओं से उनका संबंध रहा। इनमें से कुछ की स्थापना उन्होंने स्वयं की। वहीं कुछ का संपादन दायित्व संभाला। अपनी अर्जित पूंजी का बड़ा हिस्सा उन्होंने इन अखबारों पर खर्च किया। व्यापारिक घाटा सहा। यहाँ तक कि जेल यात्राएं भी कीं। लेकिन अपने सरोकारों पर आंच न आने दी। मानव मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा बनी रही।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : पेरियार की पत्रकारिता

लेखक के बारे में

ओमप्रकाश कश्यप

साहित्यकार एवं विचारक ओमप्रकाश कश्यप की विविध विधाओं की तैतीस पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। बाल साहित्य के भी सशक्त रचनाकार ओमप्रकाश कश्यप को 2002 में हिन्दी अकादमी दिल्ली के द्वारा और 2015 में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के द्वारा समानित किया जा चुका है। विभिन्न पत्रपत्रिकाओं में नियमित लेखन

संबंधित आलेख

सरहुल पर्व : आदिवासी संस्कृति, प्रकृति पूजा और कृषि परंपरा का उत्सव
आज जब पूरी दुनिया ‘पेरिस समझौते’ और ‘कार्बन फुटप्रिंट’ जैसे तकनीकी शब्दों में उलझी है, सरहुल का दर्शन एक सरल लेकिन अचूक समाधान पेश...
मुस्लिम ओबीसी आंदोलन का एक महान योद्धा चला गया
शब्बीर भाई का जीवन निरंतर यात्रा का था। वे पूरे महाराष्ट्र में घूमते रहते थे। ऐसा शायद ही कोई गांव होगा, जहां पसमांदा मुस्लिम...
आंबेडकर को अपमानित करने वाले विजयेंद्र के खिलाफ हो कानूनी कार्रवाई 
फिल्म पटकथा लेखक व सांसद विजयेंद्र प्रसाद के मुताबिक, “जब आंबेडकर ने पानी मांगा तब जमींदार ने किसी से कहा कि एक गिलास में...
यूजीसी रेगुलेंशस : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, पटना में दिखा दलित-बहुजनों का जोर
बिहार के इतिहास में यह पहला मौका था जब प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में जोतीराव फुले, सावित्रीबाई फुले, रामासामी पेरियार, डॉ. आंबेडकर, जगदीश मास्टर,...
खरी-खरी : स्कूली शिक्षा का बुरा हाल है झारखंड में
राज्य सरकार तरह-तरह की घोषणाएं करती रहती है। उच्च शिक्षा केंद्रों में और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के लिए कभी कोचिंग सेंटर चलाने...