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बहुजन साप्ताहिकी : सुर्खियों में स्टालिन का आह्वान

बहुजन साप्ताहिकी के तहत इस बार पढ़ें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नये आह्वान के अलावा डीयू में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर बहाली के संबंध में स्पेशल ड्राइव चलाने के बारे में। साथ ही यह भी कि बिहार में जहरीली शराब पीकर मरनेवाले अधिकांश दलित-पिछड़े हैं

बीते 2 फरवरी, 2022 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री व द्रविड़ मुणेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेता एम.के. स्टालिन ने देश के 37 पार्टियों के नेताओं को पत्र लिखा। इन पार्टियों में केंद्र में सत्तासीन भाजपा शामिल नहीं है। उन्होंने अखिल भारतीय सामाजिक न्याय संघ का गठन करने का आह्वान किया है। उन्होंने सभी दलों के नेताओं से अनुरोध किया है कि वे वंचित समाज के लोगों को उनका वाजिब हक दिलाने व देश में मौजूदा केंद्रीय हुकूमत की जनविरोधी नीतियों का मुखालफत करने के लिए एक मंच पर आएं। स्टालिन के इस पत्र को मौजूदा दौर में गैर-भाजपाई दलों के बीच एकता के मद्देनजर देखा जा रहा है। 

अपने पत्र में स्टालिन ने कहा है कि तमिलनाडु के कण-कण में सामाजिक न्याय व्याप्त है। इसके प्रणेता थनथई पेरियार थे, जिन्होंने जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के दिलो-दिमाग में सामाजिक न्याय के बीज बोए। यही अदम्य दर्शन तमिल समाज की नींव है और इसी ने पिछले आठ दशकों में राज्य की राजनीति को आकार दिया है। स्टालिन ने उल्लेखित किया है कि सामाजिक न्याय पर हमारे जोर के चलते ही हम काफी हद तक असमानता का उन्मूलन कर सके हैं और प्रदेश का समग्र विकास संभव हो सका है।   

उन्होंने लिखा है कि केवल आरक्षण से सामाजिक न्याय सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। दमितों की हर कदम पर सकारात्मक मदद की जानी चाहिए ताकि वे दमन और समाज से बहिष्करण की सदियों पुरानी बेड़ियों को तोड़ सकें। आज हमें उसी तरह के संकल्प और मज़बूत इरादे से एक होने की ज़रुरत है जैसा हमने मंडल आयोग की नियुक्ति की मांग के समर्थन में किया था। हर राज्य में दमित वर्ग उत्कंठित है कि अवसरों के द्वार उसके लिए खोले जाएं।    

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन

स्टालिन ने यह स्पष्ट किया है कि यह संघ हमारे लिए एक ऐसा मंच होगा, जिसका इस्तेमाल हम सामाजिक न्याय के संघर्ष को आगे ले जाने के लिए रोडमैप बनाने और उन क्षेत्रों को चिन्हित करने के लिए कर सकेंगे, जिनमें और काम किये जाने की ज़रुरत है ताकि एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाया जा सके, जिसे सभी राज्य सामान रूप से अपनाएं।

हालांकि इस संबंध में अभी तक उन नेताओं की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिन्हें स्टालिन ने पत्र लिखा है।

डीयू ने किया असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली की प्रक्रिया को तेज, पत्र जारी

शिक्षकों की कमी से जुझ रहे दिल्ली विश्वविद्यालय ने एक बार फिर असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पड़े पदों की बहाली को लेकर स्पेशल ड्राइव चलाने का निर्णय लिया है। बीते 27 जनवरी, 2022 को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक पत्र सभी कालेज को भेजा गया है। पत्र में तीन तरह के सहायक अध्यापकों की बहाली जल्द से जल्द करने को कहा गया है। इनमें असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पड़े पदों के विरूद्ध विज्ञापन जारी करने, ऍडहॉक के आधार पर बहाली और अतिथि अध्यापक के रूप में नियोजन भी शामिल है। विश्वविद्यालय ने यह ताकीद किया है कि अतिथि अध्यापकों की बहाली 28 जनवरी, 2019 को यूजीसी द्वारा जारी अधिसूचना के आधार पर किया जाय। इसके साथ ही आरक्षण रोस्टर का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

बिहार में जहरीली शराब पीकर मरनेवालों में अधिकांश दलित-पिछड़े

एक बार फिर बिहार में जहरीली शराब के कारण लोगों के मारे जाने की सूचना है। बीते सप्ताह बिहार के बक्सर जिले में जहरीली शराब पीने से छह लोगों की जान चली गयी। वहीं 9 लोग अभी भी अस्पतालों में इलाजरत हैं। इसके पहले छपरा में 15 लोगों की मौत हुई थी। इनमें अधिकांश दलित-पिछड़े थे। देखें यह सूची–

मृतक का नामपताजाति/वर्ग
बीरेंद्र ठाकुर (उम्र 55 वर्ष) ग्राम- अमनौर डीहनाई/पिछड़ा वर्ग
समत महतो (उम्र 50 वर्ष) वहीनोनिया/ पिछड़ा वर्ग
रामनाथ राय (उम्र 52 वर्ष)ग्राम- नरसिंह भानपुरयादव/पिछड़ा वर्ग
मिथिलेश कुमार (उम्र 30 वर्ष) ग्राम- परमानंद छपरायादव/पिछड़ा वर्ग
मोहम्मद इशा ग्राम- बसंतपुरअंसारी/पसमांदा
टुन्ना महतो (उम्र 52 वर्ष)  जाति नोनियाग्राम- परमानंद छपरानोनिया/ पिछड़ा वर्ग
मुन्ना सिंह (उम्र 45 वर्ष)  ग्राम- जमालपुर, मढ़ौरा राजपूत/ सामान्य वर्ग
भूलन मांझी (उम्र 70 वर्ष) जाति ग्राम- कोलुआ, मढ़ौरामुसहर/दलित
जवाहिर महतो (उम्र 50 वर्ष) ग्राम- कर्णपुरा, मढ़ौरानोनिया/ पिछड़ा वर्ग
राजेश शर्मा (उम्र 48 वर्ष) ग्राम- कर्णपुरा, मढ़ौरालोहार/पिछड़ा वर्ग
सूरज बैठा (उम्र 28 वर्ष)अमनौर वार्ड संख्या 8धोबी/दलित
बृजबिहारी राय (उम्र 75 वर्ष)नंदन कैतुकायादव/पिछड़ा वर्ग
भरत राय (उम्र 65 वर्ष)नावकढायादव/पिछड़ा वर्ग
मृतक बनाई सिंह (उम्र 40 वर्ष)  सर्वोदय बाजारकुशवाहा/पिछड़ा वर्ग
अनिल मिस्त्रीवहीलोहार/पिछड़ा वर्ग

स्रोत : स्थानीय प्रशासन व स्थानीय लोगों से मिली जानकारी

एससी-एसटी वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट

बीते 28 जनवरी, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्नति में आरक्षण को संविधानसम्मत करार दिया है। हालांकि जस्टिस एल. नागेश्वर राव, जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस बी.आर. गवई की खंडपीठ ने एक बार फिर यह अवश्य कहा है कि राज्य सरकारें अनुसूचित जाति व जनजाति के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण देने से पहले मात्रात्मक डेटा एकत्र करने के लिए बाध्य हैं। उस डेटा का मूल्यांकन और प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता का आकलन अनिवार्य है। अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र यह तय करे कि डेटा का मूल्यांकन एक तय अवधि में ही हो और यह अवधि क्या होगी, यह भी केंद्र सरकार ही तय करे। कोर्ट ने कहा कि नागराज (2006) और जरनैल सिंह (2018) मामले में संविधान पीठ के फैसले के बाद शीर्ष अदालत कोई नया पैमाना नहीं बना सकती। 

बताते चलें कि पीठ ने मामले में गत वर्ष 26 अक्तूबर, 2021 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। केंद्र और राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से आरक्षण के मानदंडों के बारे में भ्रम को दूर करने का आग्रह करते हुए कहा था कि इसमें अस्पष्टता के कारण कई नियुक्तियां रुकी हुई हैं। विभिन्न राज्यों से संबंधित आरक्षण नीतियों की वैधता से जुड़ी केंद्र सरकार की याचिका पर अब 24 फरवरी को सुनवाई होगी।

(संपादन : अनिल, इनपुट सहयोग : नागमणि)

लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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