बहुजन साप्ताहिकी : नीतीश में हैं राष्ट्रपति के सारे गुण, खासमखास श्रवण कुमार का बयान

इस बार नीतीश कुमार से जुड़ी खास खबर के अलावा पढ़ें पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह सहित दो टीवी कलाकारों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों के संदर्भ में हरियाणा सरकार के नये पेंच के बारे में

राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की घोषणा कल 9 जून, 2022 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने की। उनके मुताबिक यदि चुनाव की स्थिति बनी तब आगामी 18 जुलाई को इसके लिए चुनाव कराया जाएगा और मतों की गणना 21 जुलाई को होगी। इस बीच बिहार की सियसत गरमा गई है। दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खासमखास मंत्री श्रवण कुमार, जो कि बिहार सरकार में संसदीय कार्य मंत्री भी हैं, ने कल ही बयान दिया है कि मुख्यमंत्री में राष्ट्रपति बनने के सारे गुण हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि नीतीश कुमार देश के नये राष्ट्रपति बनते हैं तो इससे केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश को फायदा होगा।

दरअसल, श्रवण कुमार का बयान उन कयासबाजियों के सच होने का संकेत भी हो सकता है, जिसमें कहा जा रहा था कि इस बार नीतीश कुमार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे। इसके लिए उन्होंने भाजपा के विरोध के बावजूद राज्य में जातिगत जनगणना को मंजूरी दी। इसके अलावा उन्होंने मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव के साथ मिलकर इस संभावना को मजबूती प्रदान की। कयासबाजियों में यह भी कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार बिहार में सीएम की कुर्सी तेजस्वी यादव के लिए छोड़ सकते हैं।

हालांकि एक दूसरी संभावना जो कयासबाजियों का हिस्सा ही हैं, के मुताबिक नीतीश कुमार भाजपा पर दबाव बनाना चाहते हैं कि वह उन्हें राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाए और राज्य में एनडीए की ही सरकार बनी रहे। इसके लिए वह सीएम की कुर्सी भाजपा को देने से भी गुरेज नहीं करेंगे।

नीतीश कुमार के खासमखास और उनके मंत्रिमंडल सहयोगी श्रवण कुमार

बहरहाल, इस पूरे मामले में केवल यह कयासबाजी नहीं है कि श्रवण कुमार ने अपने नेता नीतीश कुमार को राष्ट्रपति पद के लिए सबसे काबिल बताया है। जाहिर तौर पर ‘यस मैन’ की भूमिका हमेशा निभानेवाले श्रवण कुमार ने अपने मन से यह बात नहीं कही होगी। फिर भी इस संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी ही होगी।

युवराज, मुनमुन और युविका चौधरी को बचाने में जुटी हरियाण सरकार, जारी किया नया आदेश 

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्य युवराज सिंह, प्रसिद्ध टीवी अभिनेत्री मुनमुन दत्ता (उर्फ बबीता) जी तथा फ़िल्म अभिनेत्री युविका चौधरी के खिलाफ दर्ज मुकदमो की जांच अब हरियाण की हांसी जिले की पुलिस के बदले स्टेट क्राइम ब्रांच करेगी। इस आशय की जानकारी इन तीनों के खिलाफ हांसी के थाना में मुकदमा दर्ज कराने वाले दलित अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता रजत कल्सन ने दी। 

बताते चलें कि उपरोक्त तीनों ने सोशल मीडिया पर दलितों को अपमानित करनेवाले शब्दों का उपयोग किया था। रजत ने बताया कि इन तीनों मामलों में नये सरकारी आदेश जारी किये गये हैं। इसके तहत इनकी जांच स्टेट क्राइम ब्रांच हरियाणा की हिसार शाखा के अधिकारी करेंगे। वहीं इस बात की पुष्टि हांसी के डीएसपी व उपरोक्त मुकदमों के जांच अधिकारी विनोद शंकर ने भी की है। हालांकि रजत कल्सन ने हरियाणा सरकार के इस फैसले को गैर-कानूनी कहा है। उन्होंने कहा कि हांसी पुलिस उपरोक्त सेलिब्रिटीज के खिलाफ दर्ज मुकदमों की जांच पूरी कर चुकी थी तथा केवल हिसार की एससी-एसटी एक्ट के तहत स्थापित विशेष अदालत में चार्जशीट पेश करना बाकी रह गया था। कल्सन ने आशंका जताई कि साजिश के तहत इन तीनों सिलेब्रिटीज को बचाने के लिए जांच की दिशा को बदल कर मुकदमों को खारिज किया जा सकता है। 

कानपुर तनाव मामले में राज्य सरकार पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में बीते 3 जून को हुए हिंसक तनाव को लेकर पीयूसीएल, रिहाई मंच, ऑल इंडिया लायर्स कौंसिल ने राज्य सरकार पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। साथ ही, इन संगठनों ने पूरे मामले की न्यायिक जांच हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश से कराने की मांग की है। इस संबंध में पीयूसीएल के प्रतिनिधि आलोक अग्निहोत्री, रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव, ऑल इंडिया लायर्स कौंसिल के महामंत्री शरफुद्दीन अहमद ने बीते 7 जून को संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि भाजपा प्रवक्ता नुपर शर्मा के खिलाफ सरकार से कार्रवाई की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन को पुलिस ने हिन्दू-मुस्लिम तनाव में तब्दील कर दिया, जिसमें पुलिस भी दंगाइयों के साथ नजर आई। पुलिस द्वारा कार्रवाई के नाम पर एकतरफा एफआईआर, गिरफ्तारियां करते हुए कथित आरोपी के नाम पर शहर भर में लगाए गए पोस्टर निजता संबंधी नागरिक अधिकारों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। विरोध के आह्वान को तनाव का कारण बताते हुए एक समुदाय के विरोध-प्रदर्शन को आपराधिक घोषित कर लोकतांत्रिक अधिकारों से लोगों को वंचित किया जा रहा है। 

ध्यातव्य है कि 3 जून को भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा के बयान के विरोध में कानपुर बाजार बंद की स्थानीय संगठनों द्वारा घोषणा की गई थी। चूंकि इसी दिन शहर में राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री का कार्यक्रम था, जिसमे राज्यपाल उत्तर प्रदेश को सम्मलित होना था। इसके मद्देनजर प्रशासन के साथ वार्ता में आयोजकों ने कार्यक्रम को पांच जून के लिए स्थगित कर दिया था। लेकिन विरोध स्वरूप कुछ दुकानदारों ने दुकानें बंद रखीं क्योंकि यह शुक्रवार का दिन था। दोपहर नमाज के बाद लोग वापस लौट रहे थे और उसी दरमियान दूसरे पक्ष के लोगों से कहासुनी के बाद तनाव बढ़ गया।

वक्ताओं ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को देखते हुए प्रथम द्रष्टया यह स्पष्ट होता है कि खुफिया तंत्र और पुलिस प्रशासन ने अपनी नाकामी को छिपाते हुए दो एफआईआर व चंदेश्वर हाते के नागरिक द्वारा एक और एफआईआर कराकर वर्ग विशेष के लोगों को नामजद कर दिया। अब उसी बिनाह पर वर्ग विशेष के लोगों की गिरफ्तारियां की जा रही हैं। इसके अलावा पोस्टर लगाकर लोगों की जान को सरकार खतरे में डाल रही है, क्योंकि पोस्टर में तस्वीरें लगाई गई हैं और इससे आरोपितों की मॉबलिंचिंग की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में प्रो. रतनलाल

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू काॅलेज में प्रोफेसर रतनलाल एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियों में हैं और आलोचनाओं का शिकार हो रहे हैं। लेकिन इस बार उनकी आलोचना दलित वर्ग के लोग ही कर रहे हैं। दरअसल प्रो. रतनलाल ने बीते 9 जून को कांशीराम उद्धृत करते हुए सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों यथा फेसबुक और ट्वीटर पर एक संदेश जारी किया कि वे भैंस की सवारी नहीं, हवाई जहाज की सवारी करते हैं। उनके इस संदेश की तीखी आलोचना हुई। इस संबंध में तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर के इतिहास के प्रोफेसर विलक्षण रविदास ने भी फेसबुक पर पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने प्रो. रतनलाल पर समाज के लिए जमीन पर संघर्ष करनेवाले कार्यकर्तांओं का अपमान करने का आरोप लगाया।

झारखंड में स्कूल शिक्षकों की बहाली का आदेश जारी

हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य के 510 प्ल्स टू स्कूलों में 3119 शिक्षकों व 690 प्रयोगशाला सहायकों की नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया है। इस आशय की जानकारी कल राज्य शिक्षा विभाग द्वारा दी गई। इसके मुताबिक सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को उपरोक्त पदों पर नियुक्ति के लिए आगे की प्रकिया को जल्द से जल्द शुरू करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने सूबे के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है।

(संपादन : अनिल)


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