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अत्यचार व उत्पीड़न से त्रस्त दलितों ने रायपुर में किया नग्न प्रदर्शन

गत 18 जुलाई को कुछ दलित युवाओं ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नग्न प्रदर्शन किया। वे राज्य सरकार से मांग कर रहे थे कि दलितों के खिलाफ उत्पीड़न व अत्याचार बंद हो। बता रहे हैं तामेश्वर सिन्हा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कल 18 जुलाई, 2022 को अनुसूचित जाति वर्ग पर हो रहे अत्याचार, कानून और शासन की उदासीन रवैया के खिलाफ युवाओं ने आंबेडकर चौक के पास नग्न प्रदर्शन किया। हालांकि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस बल कपड़े लेकर पहले से तैनात थी। जैसे ही गढकलेवा सांस्कृतिक भवन रोड से नग्न अवस्था मे प्रदर्शनकारी आंबेडकर चौक तक पहुचे, पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों पर कपड़ा लेकर दौड़ी। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। 

प्रदर्शनकारियों में संजीत बर्मन, धनंजय बरमाल, मनीष गायकवाड़, सुरेंद्र लहरे, राजकुमार सोनवानी, आशीष टंडन, विनय कौशल, शैलेन्द्र केशकर, गगन राय, आदर्श नागवंशी, रविन्द्र मार्कण्डे, पंकज भास्कर, सोनबरसा अहिरे, सतनाम दीप भास्कर आदि शामिल रहे।

प्रदर्शन के दौरान ही युवाओं ने उन 15 घटनाओं की सूची जारी की, जिसके विरोध में उन्होंने नग्न प्रदर्शन किया। इसके तहत एक मामला कबीरधार जिले के धरमपुरा थाना पिपरिया का है। वहां विगत वर्ष सतनामी समाज के द्वारा बनाए जा रहे गुरुद्वारा को तहसीलदार के आदेश अनुसार पुलिस बलपूर्वक लाठी चार्ज करते हुए जेसीबी से ध्वस्त करवा दिया गया। तहसीलदार के आदेश के अनुसार वहां नोटिस बोर्ड लगाया गया है कि 5 एकड़ 39 डिसमिल जमीन पर सतनामी समाज के लोगों ने काबिज कर रखा है। 

दूसरा मामला बालौद जिला के सुरडोंगर थाना का है। यहां के जातिवादी ग्रामवासियों ने एक दलित परिवार के घर को जेसीबी के माध्यम से जमींदोज करवा दिया तथा जरूरत के समानों को अपने साथ लेकर चले गए। वहीं बची हुई वस्तुओं को आग के हवाले कर दिया। जब दलित परिवार ने अपने घर पर जेसीबी चलाने का विरोध किया तब ग्रामवासियों ने मिलकर नाबालिग बच्चों सहित माता-पिता की सामूहिक पिटाई की। इस प्रकरण में सामान्य धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। साथ ही, आरोपियों ने पीड़ित परिवार पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया। अब हालात यह है कि पीड़ित दलित परिवार को प्रखंड मुख्यालय परिसर में रहना पड़ रहा है।

एक मामला गंगा प्रसाद मारकंडे का है जो कि रायपुर के तेलीबांधा के निवासी थे। उनकी जमीन हड़पने की नीयत से उन्हें इतना प्रताड़ित किया गया कि उन्हें आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में खुद के साथ हुए गंगा प्रसाद मारकंडे ने जातिगत गाली गलौज एवं आपबीती के साथ आरोपी और उनके अन्य साथियों का नाम एवं चेहरे का जिक्र किया। लेकिन रायपुर पुलिस द्वारा इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। एक मामला बिलासपुर के नेहरू नगर में गुरु घासीदास गुरूद्वारा एवं स्कूल का है। प्रदर्शनकारी युवाओं के मुताबिक, लगभग 60 वर्ष पूर्व से ही इस स्थान पर गुरु घासीदास जी का वार्षिक मेला लगता आ रहा था। सड़क निर्माण के नाम पर प्रशासन ने स्कूल तथा गुरूद्वारा को ध्वस्त कर दिया।

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

तामेश्वर सिन्हा

तामेश्वर सिन्हा छत्तीसगढ़ के स्वतंत्र पत्रकार हैं। इन्होंने आदिवासियों के संघर्ष को अपनी पत्रकारिता का केंद्र बनाया है और वे विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रिपोर्टिंग करते हैं

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