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जब पहली बार जातिगत तानों का जवाब दिया मुलायम सिंह यादव ने

वर्ष 1977 में राम नरेश यादव की सरकार में मुलायम सिंह यादव को सहकारिता और पशुपालन मंत्री बनाया गया। उन्हें उस दौरान कोई गंभीरता से नहीं लेता था और सवर्ण उनकी तरफ इशारा करके कहते थे कि बचपन से जो काम करते आये हैं, मंत्रालय भी वैसा ही थमा दिया गया है। पढ़ें, मंत्री के रूप में मुलायम सिंह यादव का पहला संबोधन

[उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के कई राजनीतिक किस्से मशहूर हैं। उन्होंने छात्र नेता के रूप में अपने जीवन का सबसे पहला चुनाव लड़ा था। इसके बाद वह 1967 में उत्तर प्रदेश के जसवंतनगर से विधायक बने और लगातार तीन बार विधायक रहने के बाद उन्हें पहली बार यूपी की जनता पार्टी की सरकार में मंत्री पद मिला। साल 1977 में उत्तर प्रदेश में हुए चुनाव के बाद सूबे में जनता पार्टी की सरकार बनी और मुख्यमंत्री पद पर बैठे राम नरेश यादव।

राम नरेश यादव की नजर पहली बार मुलायम सिंह यादव पर गई। मुलायम तीसरी बार जीतकर उत्तर प्रदेश की विधानसभा में पहुंचे थे। राम नरेश यादव की सरकार में मुलायम सिंह यादव को सहकारिता और पशुपालन मंत्री बनाया गया। मुलायम सिंह यादव को उस दौरान कोई गंभीरता से नहीं लेता था और सवर्ण उनकी तरफ इशारा करके कहते थे कि बचपन से जो काम करते आये हैं, मंत्रालय भी वैसा ही थमा दिया गया है।

मुलायम सिंह यादव को इन तानों से कोई फर्क नहीं पड़ता था। वह तो बस अपना काम ठीक से करना चाहते थे। उन्होंने इन तानों को अपनी ताकत बनाने का हुनर हासिल कर लिया। 

सहकारिता मंत्री रहते हुए मुलायम सिंह यादव ने प्रथम बार विधान सभा द्वारा पारित विधेयक विधान परिषद में 12 अक्टूबर, 1977 को “उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक 1977” के नाम से पेश किया गया। प्रस्तुत है मुलायम सिंह के यादव के भाषण का प्रारंभिक संबोधन]

माननीय अधिष्ठाता महोदय, मैं आपकी आज्ञा से प्रस्ताव करता हूं कि उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक, 1977, जैसा उत्तर प्रदेश विधान सभा द्वारा पारित हुआ, पर विचार किया जाय।

मान्यवर, हमारा देश कृषि प्रधान देश है और यह सर्वविदित है कि बिना सहकारिता के हमारे देश के किसानों, निर्बल वर्ग के लोगों तथा ग्रामीण क्षेत्रों का विकास संभव नहीं है। जब सहकारी आंदोलन इतना महत्वपूर्ण है, तो उसके प्रति देश की जनता की आस्था तथा विश्वास होने की बहुत जरूरत है। पिछले 30 वर्षों में जो सहकारी आंदोलन चला है, वह आंदोलन कुछ निजी व्यक्तियों के स्वार्थों को लेकर अपनी सरकार को मजबूत करने के लिये, अपने दल को मजबूत करने के लिये चला है। तो इसमें इतना भ्रष्टाचार तथा भाई, भतीजावाद बढ़ा है कि इसके प्रति इस देश तथा प्रदेश की आस्था तथा विश्वास नहीं रहा। ऐसी परिस्थिति में जो विधेयक मैं पेश कर रहा हूं, वह निजी स्वार्थों की धारणा को दूर करेगा और इस आंदोलन के द्वारा जो लोग अब तक अपने निजी स्वार्थों को हल किया करते थे, उनको भी यह दूर करेगा।

छात्र नेता के रूप में मुलायम सिंह यादव

दूसरी तरफ इस तरह के आंदोलन के लिये, मैं समझता हूं, कि जो यह कहा जाता रहा है कि अब यह सहकारी आंदोलन जनप्रतिनिधियों के हाथ में न रह कर, सरकारीकरण के हाथ में आ गया है, सरकारी कर्मचारियों के निहित चंगुल में फंस गया है, तो उसे उस चंगुल से निकालने के लिये, यह सहकारिता का विधेयक आज इस सदन के सामने प्रस्तुत है।

मान्यवर, इसी आधार पर इस विधेयक की धारा 20 में यह संशोधन किया गया है कि इसके पश्चात् किसी सदस्य को बाकीदार नहीं समझा जायेगा, यदि वह उस धनराशि का, जिसका भुगतान न करने के कारण, बाकीदार हुआ हो। इसमें स्पष्ट कर दिया गया है। इसी तरह इस विधेयक में यह संशोधन भी किया गया है जिससे सहकारी आंदोलन के स्वरुप में तेजी आये और इसके लिये मंडलों में जो विभिन्न समितियां हैं, तो उनमें प्रत्यक्ष रूप से तथा निष्पक्ष रूप से चुनाव कराए जाएं, जिससे कि यह वास्तविक रुप में जन आंदोलन का रूप धारण कर सके। इसकी धारा 28 में इस तरह की व्यवस्था की गई है। ऐसे नियम और प्रतिनिधि एकता के रूप में उसके समक्ष आएं, इसके लिये संशोधन किया गया है। इस प्रकार के संशोधनों का उद्देश्य प्रस्तुत विधेयक में रखा गया है। 

मान्यवर, हमारे इस सदन के सदस्य विद्वान और अनुभवी हैं। वह इस विधेयक के संबंध में अपने महत्वपूर्ण सुझाव देंगे। वे इस विधेयक का समर्थन करने की कृपा करें और सारे सदन से इसे पास कराएं।

(प्रस्तुति : शिवकुमार, संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

मुलायम सिंह यादव

मुलायम सिंह यादव (22 नवंबर, 1939 – 10 अक्टूबर, 2022) उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री, भूतपूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक रहे

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