h n

भंवर मेघवंशी बने पीयूसीएल की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष

सम्मेलन में राजस्थान में दलितों और आदिवासियों पर अत्याचारों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की गई और मांग की गई प्रदेश सरकार द्वारा इसकी रोकथाम के लिए हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। पुलिस तथा न्यायाधीशों को संवेदनशील रवैया अपनाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिये जाने चाहिए। पढ़ें, यह खबर

गत 2 अप्रैल, 2023 को पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की राजस्थान इकाई का दो दिवसीय सम्मेलन भीलवाड़ा में संपन्न हो गई। इस अवसर पर प्रदेश कार्यकारिणी का चुनाव हुआ, जिसमें प्रसिद्ध दलित सामाजिक कार्यकर्ता व लेखक भंवर मेघवंशी को प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। इनके अलावा तथा तारा अहलूवालिया को उपाध्यक्ष, डॉ. अनंत भटनागर को प्रदेश महासचिव और डॉ. मीता सिंह को कोषाध्यक्ष चुना गया।

सम्मेलन के संयोजक राकेश शर्मा ने बताया कि सम्मेलन का दूसरा दिन संगठनात्मक गतिविधियों, रणनीतियों और कार्ययोजनाओं को समर्पित रहा। उन्होंने बतया कि पीयूसीएल के प्रदेश सम्मेलन को जस्टिस गोविंद माथुर, अरुणा रॉय, पीयूसीएल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव, राष्ट्रीय सचिव रोहित प्रजापति, ‘मूकनायक’ वेब पत्रिका की संस्थापक की मीना कोटवाल तथा लखनऊ से आये वरिष्ठ पत्रकार नासीरूद्दीन ने संबोधित किया।

इस मौके पर विभिन्न प्रस्ताव पारित कर मानवाधिकार, लोकतंत्र व धर्मनिरपेक्षता की रक्षा की मांग की गई। सम्मेलन में मांग की गई कि न्यायिक प्रणाली में न्यायपालिका की सर्वोच्चता कायम रखी जाए। सरकारी दखल तथा अवांछित टिप्पणियां बंद हों तथा न्यायिक शुचिता बनाए रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृति पश्चात राजनैतिक व अन्य लाभ के पदों पर नियुक्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगायी जाए। इसके अलावा स्वयंसेवी संगठनों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं के कार्यों में बाधा पहुंचाने, अनावश्यक सरकारी जांच, झूठे मुकदमों तथा प्रताड़ना का वातावरण समाप्त किया जाए।

अधिवेशन में मौजूद पीयूसीएल के अधिकारीगण

सम्मेलन में राजस्थान में दलितों और आदिवासियों पर अत्याचारों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की गई और मांग की गई प्रदेश सरकार द्वारा इसकी रोकथाम के लिए हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। पुलिस तथा न्यायाधीशों को संवेदनशील रवैया अपनाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिये जाने चाहिए। सम्मेलन में यह मांग भी की गई कि 2 अप्रैल 2018 के संदर्भ में एससी/ एसटी अत्याचार निरोधक कानून को कमजोर बनाने वाले कानूनी प्रस्तावों के खिलाफ हुए भारत बंद के दौरान कार्यकर्ताओं और अन्य नागरिकों के खिलाफ हुए आपराधिक मामलों और झूठे मुकदमों को अविलंब वापिस लिए जाए।

सम्मेलन में मांग की गई कि अभिव्यक्ति और संघ (संगठनात्मक जुड़ाव) की स्वतंत्रता रोकने के सरकारी व गैर सरकारी प्रयासों को रोका जाए। साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों को स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर मुकदमों में फंसाने तथा भयभीत करने पर रोक लगाई जाए। साथ ही, राजस्थान में सशक्त जवाबदेही कानून लाने की मुख्यमंत्री की घोषणा लागू की जाए। कानून शीघ्र बने और लागू हो।

राकेश शर्मा ने कहा कि पीयूसीएल राज्य सरकार द्वारा लाए गए स्वास्थ्य के अधिकार कानून का स्वागत करती है। सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षण संस्थाओं में अकादमिक स्वतंत्रता कायम हो तथा शिक्षा का सांप्रदायिकीकरण समाप्त हो।

सम्मेलन द्वारा पारित 11 प्रस्तावों में राजस्थान सहित देश भर में गाय के नाम पर की जा रही हत्याओं पर रोक लगाने की मांग भी शामिल रही। सम्मेलन में कहा गया कि यह मानवता के नाम पर कलंक है। गौरतलब है कि हाल ही में भरतपुर जिले के घाटमिका गांव के नौजवान जुनैद और नासिर का अपहरण करके उनकी नृशंस हत्या और गाड़ी सहित जला दिया गया। सम्मेलन ने चिंता व्यक्त की कि ऐसे भयानक मामले हमारे समाज के लिए बहुत चिंता का विषय है, इससे देश के नागरिकों में विधि के शासन के प्रति विश्वास कम हुआ है जो कि हमारे संवैधानिक लोकतंत्र के लिए ख़तरे की निशानी है। 

(संपादन : नवल/अनिल)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

लेखक के बारे में

एफपी डेस्‍क

संबंधित आलेख

कर्मकांड नहीं, सिद्धांत पर केंद्रित धर्म की दरकार
आंबेडकर की धर्म की सिद्धांत-केंद्रित व्याख्या, धर्मावलंबियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करती है कि वे धर्म के कर्मकांडी पक्ष का न केवल...
किसान संगठनों में कहां हैं खेतिहर-मजदूर?
यह भी एक कटु सत्य है कि इस देश के अधिकतर भूमिहीन समाज के सबसे उपेक्षित अंग इसलिए भी हैं, क्योंकि वे निम्न जाति...
उत्तर प्रदेश : स्वामी प्रसाद मौर्य को जिनके कहने पर नकारा, उन्होंने ही दिया अखिलेश को धोखा
अभी कुछ ही दिन पहले की बात है जब मनोज पांडेय, राकेश पांडेय और अभय सिंह जैसे लोग सपा नेतृत्व पर लगातार दबाव बना...
पसमांदा केवल वोट बैंक नहीं, अली अनवर ने जारी किया एजेंडा
‘बिहार जाति गणना 2022-23 और पसमांदा एजेंडा’ रपट जारी करते हुए अली अनवर ने कहा कि पसमांदा महाज की लड़ाई देश की एकता, तरक्की,...
‘हम पढ़ेंगे लिखेंगे … क़िस्मत के द्वार खुद खुल जाएंगे’  
दलित-बहुजन समाज (चमार जाति ) की सीमा भारती का यह गीत अब राम पर आधारित गीत को कड़ी चुनौती दे रहा है। इस गीत...