h n

कह रहे प्रयागराज के बहुजन, कांग्रेस, सपा और बसपा एकजुट होकर चुनाव लड़े

राहुल गांधी जब भारत जोड़ो न्याय यात्रा के क्रम में प्रयागराज पहुंचे, तब बड़ी संख्या में युवा यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना को देश का एक्स-रे बताया। सुशील मानव ने इस यात्रा में शामिल दलित-बहुजनों से बातचीत की

बीते 19 फरवरी, 2024 को कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) जिले में पहुंची थी। उनसे मिलने हजारों की संख्या में बेरोज़गार युवा और छात्र हाथों में बेरोज़गारी और पेपर लीक के बैनरों और प्लेकार्डों को लेकर पहुंचे। बेरोज़गारी के मारे हुए, पेपर लीक के मारे हुए छात्र – आरओ-एआरओ परीक्षा के पेपर लीक, सिपाही भर्ती पेपर लीक, शिक्षक भर्ती में धांधली और भर्ती आयोग की तानाशाही आदि की तख्ती लिए खड़े थे। उनमें से एक छात्र को अपने वाहन पर बुलाकर राहुल गांधी ने उससे उसका नाम और वर्ग पूछा। उस युवा ने बताया कि वह ओबीसी वर्ग से आता है और कई साल से शिक्षक भर्ती के लिए तैयारी कर रहा है। उसने बताया कि कोचिंग में उसे लाखों रुपए ख़र्च करने पड़े, हजारों रुपए हर साल फॉर्म भरने में खर्च करना पड़ता है, लेकिन परीक्षा से पहले पेपर लीक हो जाता है और भर्ती नहीं होती।

इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि “पेपर लीक करना आपको आगे बढ़ने से रोकने का तरीका है। पिछले 7 सालों में 70 से ज़्यादा पेपर लीक हुए हैं।” कांग्रेसी नेता ने युवक से पूछा कि क्या तुम जानते हो कि तुम्हारी आबादी कितनी है इस देश में? लड़के द्वारा ग़लत आंकड़ा बताने पर राहुल गांधी ने उससे कहा कि “देश में 50 प्रतिशत ओबीसी आबादी है, 15 प्रतिशत दलित और आठ प्रतिशत आदिवासी आबादी है। आपकी इतनी बड़ी ताक़त के बावजूद हिंदुस्तान में शीर्ष 200 कंपनियों में से एक कंपनी का मालिक ओबीसी, दलित, आदिवासी नहीं हैं। देश के सबसे बड़े 90 आईएएस अधिकारियों की सूची में महज तीन लोग आपके वर्ग के हैं। मीडिया और कचहरी में आपके लोग नहीं हैं।”

राहुल गांधी ने स्थानीय लक्ष्मी टॉकीज चौराहे पर युवाओं को संबोधित करते हुए मीडिया, न्यायपालिका, निजी क्षेत्र में 73 प्रतिशत दलित-बहुजन आबादी की भागीदारी नहीं होने का सवाल उठाते हुए जातीय जनगणना को देश का एक्सरे और ग़रीबों का हथियार बताया। उन्होंने जातीय जनगणना की ज़रूरत पर बल देते हुए कहा कि “जातीय जनगणना इस देश का एक्स-रे है। जाति जनगणना आपका हथियार है। आपको पता लगाना है कि आपकी आबादी कितनी है और यह भी पता लगाना है कि देश के धन पर आपकी कितनी हिस्सेदारी है। इस देश में 73 प्रतिशत आबादी के पास कितना धन है। यह जाति जनगणना के एक्स-रे से पता चल जाएगा। इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।” 

प्रयागराज (इलाहाबाद) में राहुल गांधी

गौरतलब है कि भारत में असमानता पर पिछले साल जनवरी, 2023 में आई ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट ‘सर्वाइवल ऑफ़ द रिचेस्ट: द इंडिया स्टोरी’ में दावा किया गया था कि देश के 5 फ़ीसदी आबादी के पास देश की 60 प्रतिशत से अधिक संपत्ति पर क़ब्ज़ा है। जबकि निचली 50 प्रतिशत आबादी के पास केवल 3 फ़ीसदी संपत्ति है।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन के केंद्र में पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों के सवालों को रखा। उन्होंने प्रधानमंत्री को लक्ष्य करके कहा कि “वह नहीं चाहते हैं कि देश को आगे ले जाने वाले 73 फ़ीसदी बब्बर शेर जागें। सरकार ने अपनी नीतियों से उन्हें डरा रखा है। जिस दिन वे जागेंगे, उस दिन क्रांति आ जाएगी।” 

उन्होंने रामपुर खास विधानसभा क्षेत्र के इंदिरा चौराहे पर जनसभा को खुली जीप पर खड़े होकर संबोधित करते हुए राममंदिर उद्घाटन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को न बुलाने को आदिवासी अस्मिता का सवाल बनाते हुए कहा कि “राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में देश की राष्ट्रपति नहीं दिखी। न ही उनकी कोई तस्वीर नज़र आई। आदिवासियों, मज़दूरों, किसानों को दूर रखा गया। फिल्मी सितारों और उद्योगपतियों को महत्व दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि देश में केवल दो जातियां है ग़रीब और अमीर। लेकिन 73 फ़ीसदी दलित, आदिवासी, और पिछड़ा वर्ग के लोगों की हक़ की बात नहीं करते।” 

कांग्रेस नेता ने नौकरशाही और न्यायपालिका में बहुजनों की भागीदारी का मुद्दा उठाते हुए आगे कहा कि “केंद्र की सरकार विभिन्न मंत्रालयों में बैठे सिर्फ़ 90 अधिकारी चला रहे हैं। दलित और पिछड़ी जातियों के अधिकारियों को डराकर खामोश कर दिया जाता है। अदालतों और ब्यूरोक्रेसी में इनका प्रतिनिधित्व मामूली है। पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों को उनका अधिकार न मिले इसलिए मोदी सरकार जाति जनगणना से भाग रही है।” 

वहीं प्रतापगढ़ की जनसभा में 100 रुपए का नोट दिखाते हुए उऩ्होंने लोगें से कहा कि “इसमें आम आदमी को 6 रुपए और दस पैसे की ही हिस्सेदारी मिल रही है।” यानि 100 रुपए में बाक़ी का 93 रुपए और 90 पैसे पूंजीपतियों को जा रहा है। 

पिछले दस सालों से देश के दो बड़े कार्पोरेट को निशाने पर लेते आये कांग्रेस नेता ने एक बार फिर गौतम अदानी और मुकेश अंबानी के प्रति मौजूदा सरकार और सरकारी बैंकों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि “ये लोग (केंद्र सरकार) कभी किसानों का कर्ज़ा माफ़ नहीं करते। लेकिन यही लोग उद्योगपतियों का 14 लाख करोड़ का कर्ज़ा माफ़ किए हैं। अंबानी-अदानी लाखों करोड़ो रुपए का बैंक कर्ज़ मांगते हैं और उन्हें सेकेंडों में मिल जाता है। लेकिन आप शिक्षा के लिए कर्ज़ लेने जाएंगे तो बैंक से आपको भगा दिया जाता है।” इस दौरान ट्रेड यूनियन और कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने पुरानी पेंशन, आठवें वेतन आयोग गठन के मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता को ज्ञापन सौंपा। बेरोज़गार और प्रतियोगी छात्रों ने कांग्रेस नेता को ज्ञापन सौंपा।

प्रयागराज के करछना तहसील निवासी राकेश हरिजन सहसों में एक गेस्ट हाउस में हेल्पर का काम करते हैं। काम से लौटते हुए वे राहुल गांधी को देखने आऩंद भवन पहुंचे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद लौटते वक्त ऑटो में हमने उनसे पूछा कि रहुल गांधी कि कौन-सी बात अच्छी लगी। पांच बेटियों के पिता राकेश ने बताया कि “वह (राहुल गांधी) हमारी बात करते हैं, हमारे हक-ओ-हकूक की बात करते हैं। हमारे बच्चों की पढ़ाई और नौकरी की बात करते हैं।” मैंने उनसे पूछा कि बात तो मोदी जी भी करते हैं वो पांच किलो अनाज और सिलेंडर भी देते हैं। इस पर राकेश कहते हैं कि राशन, मिट्टी का तेल, चीनी ये सब तो पहले भी मिलता था। पर ऐसी महंगाई पहले की सरकारों में ना थी; नून, तेल, दाल, सब्जी सब में तो आग लगी है। वह मायावती की पार्टी द्वारा अकेले चुनाव लड़ने पर दुखी हैं। वे कहते हैं कि सबको गठबंधन करके लड़ना चाहिए। नहीं तो मोदी को हरा नहीं पाएंगे। 

एक अधेड़ दलित महिला जो यात्रा में पीछे-पीछे चल रही थीं, उनका कहना था कि “राहुल गांधी की भले ही सरकार न हो, लेकिन वह लोगों के दुख-दर्द में खड़े होते हैं। फिर वह हाथरस में दलित महिला से बलात्कार और हत्या का मामला हो, या सोनभद्र में ज़मीन के विवाद में दस आदिवासियों के नरसंहार का मामला हो, या चाहे लखीमपुर खीरी में किसानों पर गाड़ी चढ़ाकर उनको कुचलने का मामला हो या फिर कोई और मामला हो, राहुल गांधी हर जगह दलित, आदिवासी और  किसानों के साथ खड़े हुए है।”

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के शोध छात्र और दलित समुदाय से आऩे वाले पूर्वांचल जिले के निवासी भानु भी यात्रा में शामिल होने पहुंचे। उनका कहना था कि “इंडिया गठबंधन बनने के बाद ये एक मिनिमम एजेंडा बना है। जिसमें जातीय जनगणना और वंचित समुदायों के लिए सामाजिक न्याय की बात तय की गई है, उसी के तहत राहुल गांधी लगातार उत्तर प्रदेश में ये मुद्दे उठा रहे हैं।” वे आगे कहते हैं कि “उत्तर प्रदेश में बसपा के उभरने से पहले दलित वर्ग कांग्रेस का कोर मतदाता हुआ करता था। लेकिन बसपा के उभार और यूपी में अस्मितावादी राजनीति के उभार के बाद यहां कांग्रेस हाशिए पर चली गई। यही कारण है कि जब भी कांग्रेस दलितों के हक़ की बात करती है, बसपा प्रमुख मायावती कांग्रेस पर हमलावर हो जाती हैं और भाजपा के बजाय कांग्रेस से लड़ती नज़र आती हैं, क्योंकि इस वक़्त वह अपने कोर मतदाताओं को बसपा में जोड़े रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।”

राम लाल यादव पेशे से किसान हैं और वो भी राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि “जिस तरह से राहुल गांधी ने राम मंदिर में दलितों और पिछड़ों की गैर-भागीदारी का सवाल उठाया है, उससे जाहिर होता है कि सामाजिक न्याय का सवाल ही हिंदुत्ववादी नफ़रत की काट है।” सपा और कांग्रेस गठबंधन को सकरात्मक दृष्टि से देखने वाले रामलाल कहते हैं कि “हिंदुत्व का जो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण है उसका तोड़ यही है कि सभी दलित-बहुजन जातियों के नेता और पार्टियां एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ़ चुनाव लड़ें।” 

(संपादन : राजन/नवल/अनिल)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, संस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

लेखक के बारे में

सुशील मानव

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकार और साहित्यकार हैं। वह दिल्ली-एनसीआर के मजदूरों के साथ मिलकर सामाजिक-राजनैतिक कार्य करते हैं

संबंधित आलेख

अनुज लुगुन को ‘मलखान सिंह सिसौदिया सम्मान’ व बजरंग बिहारी तिवारी को ‘सत्राची सम्मान’ देने की घोषणा
डॉ. अनुज लुगुन को आदिवासी कविताओं में प्रतिरोध के कवि के रूप में प्रसिद्धि हासिल है। वहीं डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी पिछले करीब 20-22...
गोरखपुर : दलित ने किया दलित का उत्पीड़न, छेड़खानी और मार-पीट से आहत किशोरी की मौत
यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की असंवेदनशील कार्यशैली को उजागर करता है, क्योंकि छेड़खानी व मारपीट तथा मौत के बीच करीब एक महीने के...
फुले-आंबेडकरवादी आंदोलन के विरुद्ध है मराठा आरक्षण आंदोलन (पहला भाग)
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन राजनीतिक और सामाजिक प्रश्नों को जन्म दे रहा है। राजनीतिक स्तर पर अब इस आंदोलन के साथ दलित राजनेता...
ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड : बिहार की भूमिहार राजनीति में फिर नई हलचल
भोजपुर जिले में भूमिहारों की राजनीति अब पहले जैसी नहीं रही। एक समय सुनील पांडे और उसके भाई हुलास पांडे की इस पूरे इलाके...
लोकसभा चुनाव के बाद उपचुनावों में भी मिली एनडीए को हार
अयोध्या लोकसभा क्षेत्र में हार के सदमे से अभी भाजपा उबरी भी नहीं थी कि उपचुनाव में बद्रीनाथ विधानसभा सीट हारने के बाद सोशल...