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जंतर-मंतर पर धरने में शामिल ओबीसी महिलाओं ने कहा– ‘साडा हक, इत्थे रख’

धरने में शामिल महिला प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक महिला आरक्षण में ओबीसी जो बहुसंख्यक समूह है, की महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता है, तब तक यह अधूरा है और इसके खिलाफ वे आंदोलन करती रहेंगी। पढ़ें, यह खबर

दिल्ली में जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर आम दिनों की तुलना में अधिक संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे। प्रदर्शन स्थल पर जाने के लिए एक संकीर्ण रास्ता बैरिकेडों के जरिए बनाया गया था। सुरक्षा जांच के लिए एक स्कैनर मशीन एक वाहन पर लगाया गया था। आनेवाले हर स्त्री-पुरुष की गहन जांच की जा रही थी और लगभग सभी के हाथों में एक-एक प्लेकार्ड था। इन प्लेकार्ड्स पर कुछ नारे लिखे थे। मसलन, ‘हिस्सेदारी हमारी है, ये लड़ाई जारी है’, ‘जब तक सबकी हिस्सेदारी नहीं, तब तक लड़ाई जारी’, ‘आधी आबादी, पूरा हक, साडा हक इत्थे रख’, ‘बिना एससी, एसटी, ओबीसी महिलाओं के महिला आरक्षण अधूरा है’।

यह दृश्य गत 16 अप्रैल, 2026 को दिखा। इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ के द्वारा किया गया था। इसके लिए एक मंच बनाया गया था, जिसके पार्श्व में बने एक बड़े बैनर पर लिखा था– “33 प्रतिशत आरक्षण में एससी, एसटी, ओबीसी महिलाओं की हिस्सेदारी के लिए धरना।” प्रतीक के रूप में सोनिया गांधी, अहिल्याबाई होलकर, झलकारी बाई, इंदिरा गांधी, रानी अवंतीबाई लोधी, सावित्रीबाई फुले, फूलन देवी और प्रियंका गांधी वाड्रा की तस्वीरें बड़े से बैनर पर चित्रित थीं।

दरअसल, इस विरोध प्रदर्शन के पीछे केंद्र सरकार द्वारा संसद में महिला आरक्षण हेतु तीन संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जाना रहा। कांग्रेस के बैनर तले ओबीसी समुदाय की महिलाएं जुटी थीं। उनकी संख्या करीब दो सौ के करीब थी।

कड़ी धूप में भी अनेक जगहों से आईं महिलाएं जुटी थीं। वहीं कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पेड़ की छांव में बैठे थे। मानो वे धरनास्थल पर लगाई गईं कुर्सियाें के भरने का इंतजार कर रहे हों।

विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाएं

खैर, हरियाणा से आईं एक महिला ने कहा कि “जबसे भाजपा सरकार आई है, महिलाओं का शोषण बढ़ा है, उनके खिलाफ अत्याचार बढ़ा है। महिलाओं को बराबर का हक मिलना चाहिए। होना यह चाहिए कि 2027 में जातिगत जनगणना के हिसाब से सभी वर्गों की महिलाओं को समुचित भागीदारी मिले। लेकिन यह सरकार ऐसा नहीं करना चाहती है।”

वहीं बवाना के जेजे कॉलोनी से आईं रूखसाना शेख ने कहा कि “हमारे नेता राहुल गांधी जब महिला आरक्षण जल्दी से जल्दी लागू करने की बात कर रहे थे तब नरेंद्र मोदी जी ने कुछ नहीं किया। आज वे जल्दबाजी में क्यों हैं। पहले कहां थे वे? पहले क्या वे सो रहे थे? अभी जब बंगाल में चुनाव आ गया है तो वे महिला आरक्षण की बात कर रहे हैं। इसके बहाने अपने हिंदुत्व के एजेंडे को लागू करना चाहते हैं।”

धरने में शामिल महिला प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक महिला आरक्षण में ओबीसी जो बहुसंख्यक समूह है, की महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता है, तब तक यह अधूरा है और इसके खिलाफ वे आंदोलन करती रहेंगी।

धरने में अनेक पुरुष प्रतिनिधि भी शामिल रहे। राजस्थान कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हरसाय यादव ने इस मौके पर कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण में ओबीसी महिलाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं कर रही है। हम चाहते हैं कि जिस प्रकार महिला आरक्षण में एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है, ओबीसी महिलाओं के लिए भी प्रावधान हो। यदि ओबीसी महिलाओं को मौका नहीं मिला तो अन्य समुदायों के प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ जाएगी। हमारा धरना महिला आरक्षण के विरोध में नहीं है। हमारी मांग यह है कि इसमें ओबीसी महिलाओं की हिस्सेदारी भी तय हो।

बहरहाल, जंतर-मंतर पर आयोजित इस धरने में कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल हुए। यह धरना सांकेतिक ही सही, इस बात का प्रमाण रहा कि एक समय महिला आरक्षण में ओबीसी महिलाओं के लिए कोटे के अंदर कोटा को नकारने वाली कांग्रेस अब ओबीसी महिलाओं के पक्ष में खड़ी है।

(संपादन : अनिल)


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लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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