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छत्तीसगढ़ : विरोध करती रह गई भाजपा, भूपेश सरकार ने कर दिया 76 फीसदी आरक्षण

विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि राज्य में जिस समुदाय की जितनी आबादी है, उसके हिसाब से ही आरक्षण तय किया गया है। न किसी को ज्यादा और ना किसी को कम। बहुजन साप्ताहिकी के तहत इसके अलावा पढ़ें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को के. वीरामणि सोशल जस्टिस अवार्ड दिये जाने की घोषणा के बारे में

आरक्षण का सवाल फिर केंद्र और राज्यों के बीच तकरार बढ़ाने लगा है। हालांकि इसके राजनीतिक मायने भी हैं। दरअसल, भाजपा के सदस्यों के तीखे विरोध के बावजूद छत्तीसगढ़ विधानसभा में गत 2 दिसंबर, 2022 को राज्य में आरक्षण की सीमा 68 प्रतिशत से बढ़ाकर 76 प्रतिशत किये जाने संबंधी दो विधेयकों को पारित कर दिया गया। अब यदि राज्यपाल द्वारा इन विधेयकों को मंजूरी मिल जाती है तो राज्य में अनुसूचित जनजाति को 32 फीसदी, अनुसूचित जाति को 13 फीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी आरक्षण राज्याधीन सेवाओं व उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में मिलेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार के द्वारा आर्थिक आधार पर कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए दिये गये 10 फीसदी आरक्षण को 6 फीसदी घटाकर 4 फीसदी कर दिया है। 

हाई कोर्ट ने लगा दी थी आरक्षण पर रोक

गौर तलब है कि गत 19 सितंबर, 2022 को बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य में आरक्षण के अनुपालन पर रोक लगा दी थी। इसके पहले सूबे में 68 प्रतिशत आरक्षण था। इनमें से अनुसूचित जाति को 12 फीसदी, अनुसूचित जनजाति को 32 फीसदी, अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 फीसदी और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी आरक्षण था। हाई कोर्ट द्वारा आरक्षण पर लगाए गए रोक को हटाने के लए राज्य सरकार ने यह पहल की। 

बघेल ने कहा, कोर्ट में रखेंगे आंकड़ा

विधेयकों के पारित होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि “छत्तीसगढ़ विधानसभा ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने वाले दो नये विधेयकों को बहुमत से पारित कर दिया है। इसे राज्यपाल को भेजा गया है। उनके हस्ताक्षर करने के बाद विधेयक अधिनियम बन जाएंगे। असाधारण राजपत्र में प्रकाशित होते ही यह प्रदेश में आरक्षण की नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। उसके बाद ही प्रदेश में नई भर्तियों और स्कूल-कॉलेजों में दाखिले के लिए आरक्षण का रोस्टर जारी होगा।” 

भूपेश बघेल, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

इसके पहले सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि राज्य में जिस समुदाय की जितनी आबादी है, उसके हिसाब से ही आरक्षण तय किया गया है। न किसी को ज्यादा और ना किसी को कम। उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी क्वांटिफिएबल डाटा के साथ अपना पक्ष रखेगी। वहीं सदन में विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का विरोध किया। उनके विरोध के केंद्र में ईडब्ल्यूएस का आरक्षण 10 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी करने को लेकर भी था।

विरोध में रहे भाजपाई

अपने संबोधन में नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि क्वांटिफिएबल डाटा आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश ही नहीं की गई। सदन को उसकी कोई जानकारी नहीं है। सरकार कह रही है जनसंख्या के अनुपात को आरक्षण का आधार बनाया है तो बिना डाटा के कैसे आधार बना दिया। पहले डाटा पेश कर देते। फिर कानून बना लेते। सरकार को इतनी हड़बड़ी क्यों थी। वहीं भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आज का दिन संविधांन के लिए काला दिन है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या छोटे से चुनाव के लिए संविधान के विरुद्ध कानून बनाए जाएंगे?

बहरहाल, विधानसभा ने बहुमत से आरक्षण संशोधन विधेयक और शैक्षणिक संस्था (प्रवेश में आरक्षण) संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। अब देखना यह शेष है कि राज्य सरकार के इस पहल को राजभवन से कब मंजूरी मिलती है और यह भी कि इसे लेकर कोर्ट का रूख क्या होगा।

स्टालिन को के. वीरामणि सोशल जस्टिस अवार्ड

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को के. वीरामणि सोशल जस्टिस अवार्ड-2022 से सम्मनित किया जाएगा। इस आशय की घोषणा चेन्नई में गत 2 दिसंबर, 2022 को द्रविड़ कषगम के प्रसिद्ध नेता रहे के. वीरामणि के 89वें जन्मदिन के मौके पेरियार इंटरनेशनल, अमेरिका द्वारा आयोजित एक कर्यक्रम के दौरान की गई। इस मौके पर स्टालिन स्वयं भी मौजूद थे। अपने संबोधन में उन्होंने सम्मान के लिए संस्था के सदस्यों के प्रति आभार प्रकट किया तथा के. वीरामणि के साथ संस्मरणों को साझा किया। बताते चलें कि के. वीरामणि सोशल जस्टिस अवार्ड सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया जाता है। 

गाजियाबाद के विजयनगर में याद किए जाएंगे डॉ. आंबेडकर

आगामी 6 दिसंबर, 2022 को डॉ. आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के विजय नगर इलाके के माता कॉलोनी स्थित आंबेडकर पार्क में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर चित्रकला प्रदर्शनी, दलित-बहुजनों की वैचारिकी पर आधारित पुस्तकों का विमोचन के अलावा ‘बाबासाहब डॉ. आंबेडकर की आधुनिक भारत की परिकल्पना और बुद्ध धम्म’ विषयक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया है। यह आयोजन डॉ. भीमराव आंबेडकर विचार मंच एवं जन्मोत्सव समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है, जिसके सदस्यों में वीर सिंह, मदनपाल गौतम, राजकुमार, लखमीचंद आदि शामिल हैं। यह संगठन हर साल डॉ. आंबेडकर की जयंती व महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर कार्यक्रमों का आयोजना करती है। इस बार जन चौक के सलाहकार संपादक डॉ. सिद्धार्थ, मेरठ कॉलेज के प्रोफेसर सतीश प्रकाश, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सविता पाठक, ग्लोबल लॉ कॉलेज के निदेशक भरत सत्यार्थी, डीएवी कॉलेज के डॉ. मुकेश बैरवा सहित अनेक गणमान्य वक्ता अपना विचार रखेंगे।

(संपादन : अनिल)


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लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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