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बिहार में जगदेव-रामस्वरूप का बिखर रहा सपना, मेला बना विवाद की जड़

मौजूदा विवाद के केंद्र में मेले का आयोजन है। इस बार यह विवाद तब आगे बढ़ा जब एक साथ दो गुटों ने मेले के आयोजन की अनुमति के लिए कुर्था के एसडीओ को आवेदन दिया। दोनों गुटों ने यह दावा किया कि वह मेले के आयोजन के अधिकारी हैं। पढ़ें, यह खबर

जगदेव प्रसाद की जयंती के मौके पर बिहार के अरवल जिले के कुर्था में हर साल 2 फरवरी को एक मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले को अमर शहीद जगदेव मेला कहा जाता है। अब यह मेला ही विवाद का जड़ बन गया है और हालत यह है कि जगदेव प्रसाद और रामस्वरूप वर्मा द्वारा गठित शोषित समाज दल विघटन की राह पर अग्रसर हो गया है। इस दल का गठन 7 अगस्त, 1972 को किया गया था। 

एक तरफ इसके मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र कटियार ने पार्टी की बिहार इकाई के तीन अहम अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है तो दूसरी तरफ पार्टी की राष्ट्रीय समिति की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष को ही पार्टी से बाहर निकाल दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि जगदेव प्रसाद की जयंती के मौके पर तीन दिवसीय मेला लगाने की परंपरा 1992-93 से प्रारंभ हुई। इस मेले में समाजवाद और मानववाद के प्रसार हेतु सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा व्याख्यान आदि का आयोजन किया जाता है। इस दौरान नाटकों का मंचन व पाखंडवाद के खात्मे के लिए विशेष जादू कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र होते हैं।

बीते 2 फरवरी, 2024 को अमर शहीद जगदेव मेले के उद्घाटन के मौके पर शोषित समाज दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र कटियार (पहली पंक्ति में दाएं से दूसरे) व बिहार सरकार के पूर्व मंत्री आलोक मेहता, राजद विधायक फत्ते बहादुर सिंह व अन्य

दरअसल, मौजूदा विवाद के केंद्र में मेले का आयोजन है। इस बार यह विवाद तब आगे बढ़ा जब एक साथ दो गुटों ने मेले के आयोजन की अनुमति के लिए कुर्था के एसडीओ को आवेदन दिया। दोनों गुटों ने यह दावा किया कि वह मेले के आयोजन के अधिकारी हैं। 

एक गुट उमाकांत राही का है जो शोषित समाज दल के राष्ट्रीय महामंत्री हैं। इस गुट के रामप्रवेश यादव ने मेले के आयोजन के लिए आवेदन दिया था। दूसरा गुट अखिलेश कुमार का है जो पार्टी के पटना जिला इकाई के अध्यक्ष हैं। पिछले साल जब मेले का आयोजन हुआ तब मेला आयोजन समिति की बैठक में अखिलेश कुमार को दो साल के लिए मेला आयोजन समिति का अध्यक्ष बनाया गया था।

मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को मानववाद व समाजवाद के बारे में जागरूक किया जाता है। इस बार हुए आयोजन की झलकियां

बताते चलें कि मेला कौन आयोजित करेगा, इसका फैसला मेला समिति करती है। इस समिति में स्थानीय लोगों के अलावा शोषित समाज दल व अर्जक संघ के सदस्य होते हैं। यह समिति दो साल के लिए आयोजन समिति का चुनाव करती है। 

कायदे से इस साल भी अखिलेश कुमार को मेले का आयोजन करना चाहिए था, लेकिन विरोधी गुट ने दावा कर इस महत्वपूर्ण आयोजन की राह में बाधा खड़ा कर दिया। विवाद जब आगे बढ़ा तब एसडीओ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र कटियार से बात की और उनके अनुमोदन पर अखिलेश कुमार को मेले का अयोजन करने की अनुमति दे दी गई। 

शोषित समाज दल की राष्ट्रीय समिति के सदस्य रामानुज सिंह बताते हैं कि पार्टी के संचालन के लिए एक विधान है, जिसका निर्माण महामना रामस्वरूप वर्मा और जगदेव प्रसाद ने किया था। मेले का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। मेला समिति ही तय करती है कि आयोजन कैसे होगा। विवाद के बारे में वह कहते हैं कि कुछ लोग दल में पद पा जाने के बाद खुद महामहिम समझने लगते हैं और अपना ही राग अलापने लगते हैं। आखिरी बार अक्टूबर, 2022 में मेला आयोजन समिति की बैठक हुई थी और उसमें आयोजन समिति का अध्यक्ष अखिलेश कुमार को बनाया गया था। रामप्रवेश यादव के समर्थक बिनोद अर्जक समिति के कोषाध्यक्ष थे। मेले के आयाेजन को लेकर जो चंदा संग्रह हुआ, वह उन्होंने अभी तक नहीं दिया है।

अब इस मामले में विवाद बढ़ता ही जा रहा है। बीते 22 जनवरी, 2024 को बनारस के समीप गोराई गांव में शोषित समाज दल की राष्ट्रीय समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बारे में उमाकांत राही का कहना है कि बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, क्योंकि उन्होंने ऐसे व्यक्ति को मेले के आयोजन का अधिकारी बनाया जो पहले से ही पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल था तथा पार्टी की उसकी सदस्यता रद्द की जा चुकी थी। बैठक में अविश्वास मत के प्रस्ताव के विरोध में केवल दो मत प्राप्त हुए।

वहीं शोषित समाज दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र कटियार का कहना है कि जगदेव प्रसाद की जयंती के मौके पर लगनेवाला मेला बेशक बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन अब इसे व्यवसाय बना लिया गया है। कुछ लोग इसे कमाने का जरिया बना लिये हैं। इसलिए विवाद होता है। 

उनका कहना है कि वे लखनऊ में रहते हैं और मेले के आयोजन का विषय राज्य इकाई को देखना चाहिए। इस बार जब विवाद सामने आया तो कटियार के मुताबिक उन्होंने पिछले साल हुए निर्णय के आलोक में अखिलेश कुमार को मेला लगाने की अनुमति दी। 

यह पूछे जाने पर कि कुछ लोगों ने आपको राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटा दिया है, तो कटियार ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किया जाता है, राष्ट्रीय समिति की बैठक में कोई प्रस्ताव पारित कर अध्यक्ष को नहीं हटाया जा सकता है। यह पार्टी का संविधान कहता है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उमाकांत राही व दो अन्य राष्ट्रीय मंत्री के.एन. भास्कर व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजवल्लभ सिंह को पार्टी से निष्कासन हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

शोषित समाज दल में चल रहे झगड़े का असर इस दल को अपना माननेवालों पर पड़ रहा है। अर्जक संघ से जुड़े उपेंद्र पथिक का कहना है कि शोषित समाज की पहली पीढ़ी में रामस्वरूप वर्मा, जगदेव प्रसाद, पेरियार ललई सिंह और दूसरी पीढ़ी में प्रो. जयराम प्रसाद सिंह, लक्ष्मण चौधरी और रघुनीराम शास्त्री ने शोषित समाज दल का संचालन सफलतापूर्वक किया है। लेकिन अब कुछ लोगों के कारण स्थिति निराशजनक हो गई है। इससे लोगों का मनोबल टूटता है।

बहरहाल, शोषित समाज दल बिहार में अपनी प्रासंगिकता रोज-ब-रोज खोती जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर भी यह बस नाम के वास्ते रह गया है। यह एक कड़वी सच्चाई है और अब जिस तरह के विवाद सामने आ रहा है, उससे यह तो साफ है कि जगदेव प्रसाद की शहादत का मोल भी उनके समर्थकों को नहीं रहा।  

(संपादन : राजन/अनिल)


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लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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