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Arun Narayan

‘लोकविद्याधर’ : लोककला, श्रम और असमान विकास की विडंबना की कहानी
रामजी यादव की कहानी ‘लोकविद्याधर’ लोककला के क्षरण, पारंपरिक कारीगर जातियों के रोजगार-संकट, बाजार के अमानवीय दबाव और...
‘अप्पन समाचार’ की ग्रामीण महिला पत्रकारों के प्रयासों को मिली सराहना
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता अनिल चमड़िया ने कहा कि हिंदी मीडिया को मुख्यधारा की मीडिया कहना कहीं से...
हाशिए पर धकेल दिए गए महानायक के जीवन-संघर्ष का सिनेमाई दस्तावेज
फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह जगदेव प्रसाद के जीवन को किसी चमत्कारी नायक की...
ब्राह्मणवादी कर्मकांडों से परे एक विदाई : बुद्ध शरण हंस की स्मृति में गूंजे आंबेडकरवादी सरोकार
बुद्ध शरण हंस के निधन के बाद उनके परिवार और बिहार के नागरिक समाज ने जिस तरह की...
पटना में अली अनवर की किताब के लोकार्पण के मौके पर जाति के सवाल के साथ जवाब भी
दरभंगा के कुशेश्वरस्थान की घटना का उल्लेख करते हुए हेमंत ने कहा कि खबर को वास्तविकता से काटकर...
वीरेंद्र यादव : हिंदी में परिवर्तनकामी आलोचना के एक युग का अवसान
वीरेंद्र यादव का लेखन विपुल और बहुआयामी था। वे प्रगतिशील आंदोलन की उपज थे, लेकिन बहुजन लोकेशन से...
पेरियार पर केंद्रित एक अलग छाप छोड़नेवाली पुस्तक
यह किताब वस्तुनिष्ठ स्वरूप में पेरियार के जीवन दर्शन के वृहतर आयाम के कई अनछुए सवालों को दर्ज...
स्मृति शेष : आजीवन हाशिये का मजबूत स्वर रहे बाबूलाल मधुकर
हिंदी और मगही के शीर्ष साहित्यकार व बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य रहे बाबूलाल मधुकर का निधन...
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