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किताबें

‘गैर-भारतीय इतिहासकारों ने ही लिखा है बहुजन आंदोलनों का इतिहास’
एक गैर-भारतीय की पद्धति क्या है? गैर-भारतीय काम करता है किसी भारतीय व्यक्तित्व पर या भारतीय समाज पर तो वह कैसे काम करता है— उसका एक नमूना है यह किताब। पढ़ें, डॉ. सिद्धार्थ का संबोधन
कबीर का इतिहासपरक निरपेक्ष मूल्यांकन करती किताब
आमतौर पर हिंदी में कबीर के संबंध में उनके पदों का पाठ उनकी व्याख्या और कबीर के काव्य में सामाजिकता जैसे शीर्षक पर साहित्य मिलते हैं। पहली बार इस पुस्तक में कबीर, कबीर का साहित्य,...
‘अगर हमारे सपने के केंद्र में मानव जाति के लिए प्रेम है, तो हमारा व्यवहार भी ऐसा होना चाहिए’
गेल ऑम्वेट गांव-गांव जाकर शोध करती थीं, उससे जो तथ्य इकट्ठा होता था, वह बहुत व्यापक था और बहुत लोगों से जुड़ा होता था। उससे जो निष्कर्ष बाहर आता था, वह सत्य के ज्यादा नजदीक...
बहुजन विमर्श की ‌एक‌ महत्वपूर्ण पुस्तक
प्रेमकुमार मणि के मुताबिक, उपेक्षित और उत्पीड़ित राष्ट्रीयताओं तथा अस्मिता और पहचान के लिए अलग-अलग चल रहे संघर्षों को समन्वित करना बड़ी बात ‌होगी। बुद्ध विचार से ज़्यादा करुणा पर ज़ोर देते थे। बहुजन साहित्य...
कबीर और कबीरपंथ
कुल ग्यारह अध्यायों में बंटी यह पुस्तक कबीर के जन्म से लेकर उनके साहित्य, कबीरपंथ के संस्कारों, परंपराओं...
दलित विद्रोह का जीवंत दस्तावेज
ज. वि. पवार ने इस आंदोलन को आंबेडकर के बाद दलित आंदोलन का स्वर्णकाल माना है। इस संगठन...
गांधी और गांधीवाद की असलियत बताती किताब
आज भारत के एक वैकल्पिक इतिहास लेखन की जरूरत है, जिसमें दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक सभी शामिल...
पुस्तक समीक्षा : आंबेडकर का चिंतन गांधी की आलोचना का तीसरा स्कूल
गांधी और गांधीवाद पर डॉ. आंबेडकर की आलोचना को जानना इसलिए भी जरूरी है कि आंबेडकर-विचार के बिना...
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