इस क्रिसमस पर हम झिलमिलाते बल्बों और साज-सज्जा से आगे देखें – हमारे जगत के उस प्रकाश को देखें, जो अंधेरे से भरी हमारी दुनिया में इसलिए आया है ताकि वह व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों...
सच तो यह है कि सभ्यता के आरंभिक चरण में प्रकृति के सान्निध्य में रहकर, उसका करीब से अध्ययन करने वाले श्रमण, ज्ञान और अनुभव का चलता-फिरता विश्वविद्यालय हुआ करते थे। आरंभिक भारतीय गणित के...
गाड़िया लुहारों का रहन-सहन भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करता है। सार्वजनिक शौचालयों का अभाव या उनसे दूरी, इन्हें खुले में शौच के लिए मजबूर करता है। महिलाओं के लिए खुले में शौच...
‘हिंद दि चादर’ – यह वाक्यांश कब और कैसे अस्तित्व में आया? इसे किसने गढ़ा और सबसे पहले इसका उपयोग किस कृति में किया गया? क्या ऐसा नहीं लगता कि यह सिक्ख गुरुओं को हिंदुत्व...