गणतांत्रिक प्रणाली के अस्तित्व में आने से पहले, लोकायत देशज व्यवस्था का हिस्सा था। उसमें छोटे-छोटे आत्मनिर्भर और स्वायत्त गांव या गांवों के समूह शामिल थे, जो धर्म, धर्मसत्ता या राजसत्ता से नहीं, बल्कि लोकेच्छा...
भारत में दलित आंदोलन ने लंबे समय तक मुख्य रूप से हिंदू दलितों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन मुस्लिम और ईसाई समाज के दलित समुदायों की समस्याओं को उतनी प्राथमिकता नहीं मिली...
आज जब पूरी दुनिया ‘पेरिस समझौते’ और ‘कार्बन फुटप्रिंट’ जैसे तकनीकी शब्दों में उलझी है, सरहुल का दर्शन एक सरल लेकिन अचूक समाधान पेश करता है। ‘प्रकृति पूजा’ का अर्थ केवल पेड़ के आगे झुकना...
श्रमणों की तरह, चिकित्सक भी ज्ञान के साधक थे। वे घूमते-फिरते, रोग का कारण तथा उसके लिए नई औषधि, उपचार और चिकित्सा ज्ञान प्राप्त करने में निरंतर लगे रहते थे। इसके लिए वे उन अन्य...