फोटो फीचर : यहां हाहाकार, वहां चुप्पी

ये सभी छायाचित्र आपने पहले भी देखे होंगे। परंतु इन्हें एक बार फिर ध्यान से देखिए। आपको अधिकांश मध्यमवर्गीय युवा नजर आएंगे, कई युवतियां भी, लगभग सभी अंग्रेजी में लिखे पोस्टर और प्लेकार्ड लिए हुए हैं-ये सब नई दिल्ली में 23 वर्षीया फिजियोथेरेपी छात्रा के भयावह सामूहिक बलात्कार से आक्रोशित हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है सिवाय इसके कि…

15 अक्टूबर 2012 को वृंदा करात समेत अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व मे हरियाणा के रोहतक में हजारों महिलाओं ने विरोध रैली में भाग लिया था। ध्यान दें कि इनमें से अधिकांश महिलाएं श्रमिक वर्ग की हैं और वे हरियाणा मे बलात्कार की घटनाओं की बाढ़ का विरोध कर रही हैं। बलात्कार की शिकार महिलाओं में से अनेक दलित थीं और उनमें से कई ने बाद में आत्महत्या कर ली। इसलिए इन्हें मीडिया ने कोई खास तव्वजो नहीं दी। अब आप समझ गए होंगे कि आपको इस प्रदर्शन के बारे में कुछ देखने या सुनने को क्यों नहीं मिला।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(फारवर्ड प्रेस के फरवरी, 2013 अंक में प्रकाशित)


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