h n

हे ईश्वर कहां पर रहते हो तुम?

पॉल माल्तो की कविता

धरती को देखने पर धरती (जमीन) सूखी दिखती है
आसमान को देखने पर आसमान ऊंचाई पर दिखता है
तकलीफ से ही दिन गुजरता है।
हे ईश्वर कहां पर रहते हो तुम?
हमारा दिल (मन) तुम्हें खोजता है

पहाड़ पर रहने वाले लोग पहाडिय़ा मानते हैं
बीमारी से मरते जा रहे हैं जो
हमलोगों को देखने वाला कोई नहीं है
हम पर हंसने वाले लोग ज्यादा हैं
तकलीफ से ही दिन गुजरता है
हे ईश्वर कहां पर रहते हो तुम?
हमारा दिल (मन) तुम्हें खोजता है

पहले सूखाड़-अकाल के दिनों में
भूखमरी से मर गए बहुत से लोग
भूखमरी में ताड़ और ओल खाकर जीवित रहे
तकलीफ से ही दिन गुजरता है

हे ईश्वर कहां पर रहते हो तुम?
हमारा दिल (मन) तुम्हें खोजता है

(फारवर्ड प्रेस, बहुजन साहित्य वार्षिक, मई, 2014 अंक में प्रकाशित )


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +919968527911, ईमेल : info@forwardmagazine.in

लेखक के बारे में

पॉल माल्तो

पॉल माल्तो आदिम आदिवासी समुदाय 'पहाडिय़ा' के सदस्य हैं और साहेबगंज जिला के पगार पहाड़ गांव के रहने वाले हैं जो राजमहल की पहाडिय़ों पर घने जंगल में बसा है

संबंधित आलेख

Rajesh Paswan: Criticism within Dalit Literature is still in its infancy
Our Dalit writers don’t take criticism well. They begin enquiring about the caste and ideology of the critic. They evaluate criticism on these parameters,...
Memoir: When Rajendra Yadav visited Gorakhpur
Both Rajendra Yadav and Namvar Singh participated in a seminar on Premchand in Gorakhpur University. At the seminar, Namvar Singh declared that fiction was...
War cry for true socialism in Dalitbahujan poetry of 1960-1980
While poets with Dalit consciousness were identifying the Bahujan as the proletariat, the Marxists had no respect for them and ignored them. The Dalit-Backward...
‘Dalit autobiographies are like rock inscriptions bearing Dalit history’
These autobiographies tell us where the Dalits stood in terms of the human development index, their lifestyle, what they ate, what kind of behaviour...
A new way to search through Dr Ambedkar’s ‘democracy of texts’
The creation of the new website, BAWS.in, represents an epochal leap forward for those of us who study Ambedkar and caste. Driven by the...