विकास खांडेकर : सतनाम पंथ और पत्नी ने दी संघर्ष की ताकत

विकास खांडेकर पर आरोप था कि उन्होंने फेसबुक पर दुर्गा से संबंधित एक पोस्ट शेयर किया। इस आरोप में उन्हें करीब साढ़े तीन महीने की जेल यात्रा करनी पड़ी और लगभग दो वर्षों तक जिला बदर रहना पड़ा। इस बीच उन्होंने अपनी मां और दादी को खो दिया। प्रेमा नेगी की रिपोर्ट :

वह 4 अक्टूबर, 2016 का दिन था जब छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के सतनाम पंथ के प्रदेशाध्यक्ष व दलित नेता विकास खांडेकर को सोशल मीडिया फेसबुक पर हिंदू देवी दुर्गा के खिलाफ कथित अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के आरोप में जेल में डाल दिया गया। उन्हें अगले साल 24 जनवरी 2017 को हाईकोर्ट से जमानत तो मिली, मगर कंडीशनल। जिला बदर होने की शर्त पर उन्हें रिहा किया गया। कहा गया कि जब तक माहौल शांत न हो 6 महीने या साल भर तक या इसे भी ज्यादा, आप मुंगेली जिले में नहीं रह सकते, उसके बाद हाईकोर्ट स्थितियों को देखते हुए आपको इजाज़त देगा कि आप वहां जा सकते हैं या फिर कंडीशन खत्म की जाएगी।

उन्हें  लगभग दो वर्ष तक अपने घर-परिवार से दूर बिलासपुर में रहना पड़ा। कोर्ट के निर्देश के बाद वह इसी वर्ष बीते 27 जुलाई 2018 को वापस मुंगेली जिले में अपने पत्नी-बच्चों व परिजनों के पास वापस आए हैं। लेकिन उन्हें हर महीने के दसवें दिन थाने में हाजिरी लगानी होगी।

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