शहीद जगदेव स्मारक मेला संपन्न, रघुनीराम शास्त्री फिर बने शोषित समाज दल के अध्यक्ष

बिहार के अरवल जिले के कुर्था में बीते 2 फरवरी से शुरू तीन दिवसीय शहीद जगदेव स्मारक मेले का समापन हो गया। इस मौके पर शोषित समाज दल की राष्ट्रीय बैठक हुई और रघुनीराम शास्त्री को एक बार फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया

बिहार के लेनिन अमर शहीद जगदेव प्रसाद (2 फरवरी 1922 – 5 सितंबर 1974) की जयंती के माैके पर अरवल जिले के कुर्था प्रखंड कार्यालय परिसर में तीन दिवसीय शहीद जगदेव स्मारक मेले का आयोजन हुआ। मेले के अंतिम दिन शोषित समाज दल की 18वीं राष्ट्रीय बैठक हुई और इस बैठक में रघुनी राम शास्त्री को एक बार फिर सर्वसम्मति से दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया।

मेले  में शोषितों की दशा और दिशा पर गहन चिंतन और विचार मंथन किया गया। मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र सहित विभिन्न प्रदेशों के अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने इस मौके पर जगदेव प्रसाद के सपनों को साकार करने और संपूर्ण भारत में शोषितों का राज कायम करने का संकल्प लिया।

बताते चलें कि जगदेव प्रसाद 1960 के दशक में बिहार के पिछड़े समाज के बड़े नेता थे। उन्होंने सामंती व्यवस्था को खुली चुनौती दी थी। भूमिहीन और खेतिहर मजदूरों के हितों के लिए उन्होंने व्यापक संघर्ष छेड़ा था। उन दिनों उनका नारा बहुत लोकप्रिय हुआ था। यह नारा था – अबकी सावन-भादो में, गोरे-गोरे हाथ कादो में। वे शासन और प्रशासन में दलितों और पिछड़ों के समुचित प्रतिनिधित्व की लड़ाई लड़ते थे। उन्होंने ही नारा दिया था – सौ में नब्बे भाग शोषित, नब्बे पर दस का शासन नहीं चलेगा, नहीं चलेगा। इससे पहले कि उनका आंदोलन और व्यापक असर दिखाता कुर्था प्रखंड परिसर में ही 5 सितंबर 1974 को एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उनपर पुलिस ने गोलियां चलायी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी।

शहीद जगदेव स्मारक मेले के दौरान पदयात्रा का नेतृत्व करते शोषित समाज दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुनीराम शास्त्री

उनकी स्मृति में इस मेले का आयोजन शोषित समाज दल के द्वारा पिछले 40 वर्षों से लगातार किया जाता रहा है। इस दल का गठन 1972 में जगदेव प्रसाद और उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व वित्त मंत्री व अर्जक संघ के संस्थापक रामस्वरूप वर्मा ने किया था।

इस बार मेले का आयोजन शोषित समाज दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुनीराम शास्त्री के नेतृत्व में किया गया। इस मौके पर शोषित समाज दल के कार्यकर्ताओं ने बाजे-गाजे के साथ जुलूस निकाला और ‘सौ में से नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है, दस का शासन नब्बे पर नहीं चलेगा’ आदि नारे लगाए। बाद में शहीद स्थल पर पहुंचकर लोगों ने जगदेव प्रसाद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

मेले के पहले दिन अपने संबोधन में रघुनीराम शास्त्री ने कहा कि वर्ण व्यवस्था राष्ट्र के निर्माण में बाधक है। जनसंख्या के आधार पर आरक्षण लागू होना चाहिए। काका कालेलकर की रिपोर्ट को सरकार पूरी तरह से लागू करे। इस मौके पर सभा के माध्यम से पूंजीवादी व्यवस्था व साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ संगठित होकर अपने हक की लड़ाई को तेज करने और शहीद जगदेव बाबू के सपनों को साकार करने के लिए मिलकर काम करने की लोगों से अपील की गई।

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इस मौके पर स्थानीय विधायक सत्यदेव कुशवाहा ने कहा कि जगदेव बाबू व्यक्ति नहीं विचार थे। वे हमेशा दबे-कुचले लोगों के उत्थान के लिए संघर्ष करते रहे। नब्बे प्रतिशत दबे-कुचले लोगों के उत्थान के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने अपनी आहुति दे दी। उन्होंने सामाजिक समरसता का जो सपना देखा था, उस पर राज्य सरकार चलते हुए समाज के सबसे निचले तबके के लोगों के लिए योजनाएं संचालित कर रही है जिसका लाभ जल्द ही बहुजन को दिखने लगेगा। अंत में उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू को याद इसलिए भी रखना होगा क्योंकि उनके विचारों पर चलकर ही समता मूलक समाज की स्थापना की जा सकती है।

शहीद जगदेव स्मारक मेले में मुख्य आकर्षण पाखंड मिटाओ प्रदर्शनी रही। इसके अलावा मेले में खिलौनाें, चाट-पकौड़ा, जलेबी, गोलगप्पा की दुकानें लगी हैं जहां बच्चों की खासी भीड़ देखी गई। साथ ही आंबेडकरवादी और अर्जक साहित्य के पुस्तक के स्टॉल भी लगाए गए। लोगों ने पुस्तकों में गहरी रूचि ली।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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