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महिषासुर आंदोलन : सांस्कृतिक हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे उदयन राय

बिहार में दलित-बहुजनों के सामाजिक-सांस्कृतिक सवाल मुखर तरीके से उठाने वाले उदयन राय को जमानत मिल गयी है। उनके उपर पुलिस ने एक व्हाट्सअप संदेश के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा को लेकर साजिश रचने का आरोप लगाया है

बिहार की राजधानी पटना के सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता उदयन राय अभी खुली हवा में सांस ले रहे हैं। लेकिन यह सांस भी दमघोंटू है, क्‍योंकि इस पर प्रशासन की पाबंदी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मार्च में पटना में होनी वाली सभा से जुड़े उनके एक वाट्सएप मैसेज को प्रशासन में आपत्तिजनक माना था और इसी आधार पर 25 फरवरी को प्रशासन ने उठा लिया था और बाद में उन्‍हें जेल भेज दिया गया। करीब 100 दिन फुलवारी कैंप जेल में रहने के बाद बीते 31 मई को उन्‍हें जमानत मिली और 1 जून को रिहा हुए। अभी उनका मामला अंडर ट्रायल है और मामले की नियमित सुनवाई शुरू हो गयी है।

उदयन राय की गिरफ्तारी को लेकर पटना के सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने सवाल खड़ा किया था। इससे संबंध में फारवर्ड प्रेस ने ‘उदयन राय की गिरफ्तारी : क्या बहुजन संस्कृति की बात करना आतंकवाद है?’ शीर्षक खबर प्रकाशित किया था।

जेल से छूटने के करीब एक महीने बाद फारवर्ड प्रेस के साथ उन्‍होंने अपने विचार साझा किये। उदयन राय ने अपने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों की चर्चा करते हुए कहा कि वे बचपन से व्‍यवस्‍था के खिलाफ लड़ते रहे हैं। किसी का शोषण और उत्‍पीड़न बर्दाश्‍त नहीं कर सकते हैं। धार्मिक परंपराओं में हिंसा के खिलाफ भी वे रहे हैं। हालांकि वे कहते हैं कि भारतीय परंपराओं का सम्‍मान करते हैं। लेकिन धार्मिक मान्‍यताओं के आधार पर हिंसा के उत्‍सव के खिलाफ हैं। दशहरा के मौके पर रावण वध या दुर्गा पूजा के दौरान महिषासुर वध की परंपरा हिंसा का उत्‍सव है और इसे कभी स्‍वीकार नहीं किया जा सकता है।

उदयन राय, सामाजिक कार्यकर्ता, पटना

बहरहाल, उदयन राय सामाजिक सक्रियता और मुखरता के कारण प्रशासन के निशाने पर थे। प्रशासन उनको फंसाने की कोशिश कर रहा था। उदयन कहते हैं कि वे संविधान और कानून का सम्‍मान करते हैं। संविधान ने ही बहुजनों को ताकत और अधिकार दिया है।  

(कॉपी संपादन : नवल)


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लेखक के बारे में

वीरेंद्र यादव

फारवर्ड प्रेस, हिंदुस्‍तान, प्रभात खबर समेत कई दैनिक पत्रों में जिम्मेवार पदों पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र यादव इन दिनों अपना एक साप्ताहिक अखबार 'वीरेंद्र यादव न्यूज़' प्रकाशित करते हैं, जो पटना के राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चित है

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