दलाई लामा पर प्रणब का व्याख्यान, कानून खोजेगी अपराध की मानसिकता तो कविता के दिन दिखेंगे पटना में

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला के राधाकृष्णन व्याख्यान में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शिरकत कर रहे हैं तो देश के दूसरे बड़े शिक्षा संस्थानों में भी आने वाले दिनों में कई बड़े आयोजन हैं। इस हफ्तावार कॉलम में पढ़ें देश के संस्थानों में होने वाली गतिविधियों का ब्यौरा

अकादमिक दुनिया में समाज व इतिहास

शिक्षा में गांधी की अहमियत

स्कूली पाठ्यक्रम में गांधीवादी विचारधारा को लेकर भोपाल में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई है। 30 से 31 जनवरी 2020 को होने वाले इस कार्यक्रम को क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान जो कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद नई दिल्ली और श्यामला हिल्स भोपाल ने आयोजित किया है। कार्यक्रम की प्रस्तावना में आयोजकों ने कहा है इस समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संदेश और आदर्शों के प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी 150वीं जयंती मनाई जा रही है। यह अवसर सिर्फ उत्सव मनाने का नहीं बल्कि उनके आदर्शों और सिद्धांतों को जीवन के विभिन्न पहलुओं में उतारने का भी है।

आयोजकों के मुताबिक, गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर भारत का नागरिक होने के नाते, उनके नजरिए को समझने और साकार करने की हमारी भी जिम्मेदारी है। शिक्षा सभ्य समाज का मजबूत आधार है और स्कूली शिक्षा इसकी बुनियाद और आत्मा। शिक्षा को गांधीजी व्यक्ति समाज और राष्ट्रीय विकास एवं उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण जरिया मानते थे। व्यावहारिक और प्रायोगिक शिक्षा पर उनका बल सबसे ज्यादा था। उन्हें आधुनिक भारतीय शिक्षा का क्रांतिकारी विचारक भी कहा जाता है। अपनी शैक्षणिक योजना द्वारा वह हमारी समाज में एक नई क्रांति लाना चाहते थे जिससे एक नई सामाजिक व्यवस्था बन सके। शिक्षा जगत में उन्हें प्रायोगिक और व्यावहारिक शैक्षिक विचारधारा के चिंतक के रूप में सम्मान प्राप्त है। उन्होंने जीवन, कला-केंद्रित और समाजोन्मुखी शिक्षा को महत्व दिया। उनके शैक्षिक विचार जीवन शैली के अनुरूप थे जिसके अनुसार शिक्षा का प्रसार करते थे। गांधीवादी विचारधारा शिक्षा के क्षेत्र में कई सजीव आयाम आज भी उपलब्ध हैं। शिक्षा पर गांधीवादी साहित्य प्रचुर मात्रा में है। परंतु, इस शिक्षा के कई आयाम अभी भी अनछुए रह गए हैं, जिन पर चर्चा करना बाकी है। इसी उद्देश्य से इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य गांधी जी और उनके सहयोगी द्वारा स्कूली के लिए शैक्षिक विचारधारा पर चर्चा और विचार करना है।

संगोष्ठी के विषय हैं: गांधी दर्शन- गांधीवादी सिद्धांत, सत्य अहिंसा, समानता, न्याय, स्वराज, समानता, सद्भाव, सर्वोदय, प्रेम, एकादश व्रत। नैतिक मूल्य और अभिविन्यास। व्यक्तित्व निर्माण। लिंग भेद और जाति प्रथा। कार्य सिद्धांत- आत्मनिर्भरता, स्वदेशी दक्षता आधारित कौशल, बुनियादी शिक्षा (नई तालिम) के सिद्धांत- शिक्षा एवं सार्वभौमिकरण। बुनियादी शिक्षा के प्रयोग (वर्धा और साबरमती आश्रम में) स्वावलंबन एवं श्रम विभाजन। गांधीवादी शिक्षा- शिल्प एवं कला केंद्रित गांधीवादी विचारधारा और शालेय पाठ्यक्रम। पाठ्यक्रम के मुख्य क्षेत्र- समाज विज्ञान पाठ्यचर्या, ग्राम स्वराज की अवधारणा, सामूहिक सहभागिता, ट्रस्टीशिप और सहकारिता। राष्ट्रीय आंदोलन, सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन- अन्य महत्वपूर्ण बिंदु।

भाषा पाठ्यक्रम- मातृभाषा आधारित शिक्षा, मातृभाषा एक अध्ययन के रूप में और शिक्षा के माध्यम के रूप में। गांधीवादी विचारों का बहुभाषिकता पर प्रभाव- गांधीवादी विचारों में अंतरविषयक अवधारणाएं। शांति और एकता पर गांधी के विचार। शांति एवं भाईचारे के लिए शिक्षा। धार्मिक सद्भाव और विभिन्न आस्थाओं के मध्य सद्भाव। विश्व शांति के लिए आपसी समझ- पूर्व एवं पश्चिम के संदर्भ में। शिक्षा और गांधी- ध्यान और योग की भूमिका। प्राकृतिक चिकित्सा उपवास एवं शाकाहार। नशामुक्ति। प्रकृति और गांधी- प्रकृति सबके लिए आवश्यकता और लौलुपता। स्वच्छता-बोध। अपशिष्ट और जल प्रबंधन। जैविक खेती।

शिक्षकों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण तिथियां हैं- पूर्ण आलेख भेजने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2019। आलेख स्वीकृति की सूचना 30 नवंबर 2019। राष्ट्रीय संगोष्ठी 30-31 जनवरी 2020। ज्यादा जानकारी के लिए www.riebhopal.nic.in देखें। ईमेल एड्रेस है nigtsc2020@gmail.com

आपराधिक विकृतियों पर मनोविज्ञान

भागलपुर विश्वविद्यालय, बिहार ने 2 और 3 दिसंबर को यूजीसी के सहयोग से “अपराध के मनोविज्ञान” विषय को लेकर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है। कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग ने भारतीय मनोवैज्ञानिक संघ की भी मदद ली है।

आयोजकों के अनुसार ऐसा माना जा रहा है कि 21वीं सदी की पहली तिमाही में दुनिया ने पृथ्वी और जीवन की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक शांति और मानव संसाधनों के महत्व और प्रमुखता को महसूस किया है। हाल के दशकों में भू-राजनीतिक परिवर्तनों और सामाजिक-आर्थिक जटिलताओं ने जीवन की गुणवत्ता में मानवीय मूल्यों में तनाव के स्तर बढ़ाया है और गड़बड़ियों को जन्म दिया है। इसने समाज के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है और सामाजिक नियमों को खंड-खंड किया है। यह समस्या और बढ़ सकती है अगर इस तरह की असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए। इसके उन्मूलन में पूरे समाज का कल्याण निहित है।

आपराधिक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार कारकों की खोज करने का विचार विवेकपूर्ण लगता है। यह विषय अपने आप में दिलचस्प है कि आज तक आपराधिक व्यवहार को उकसाने वाले कारकों का पता लगाने के लिए कितने ही प्रयास किए गए हैं। आपराधिक साहित्य, अपराधियों और परिकल्पनाओं के व्यक्तित्व और पृष्ठभूमि की विशेषताओं के वर्णन से परिपूर्ण है जो अपराध में धकेलती है। भारत में जांचकर्ताओं ने भी इस संबंध में सराहनीय प्रयास किए हैं। वे वास्तव में, व्यवस्थित और सटीक हैं, और आपराधिक व्यवहार को उकसाने वाले विभिन्न कारकों को उजागर करते हैं। हालांकि, यहां उल्लेख करना प्रासंगिक लगता है कि अपराधियों के तौर तरीके भांति-भांति के हैं। एक ही तरह का अपराध करने वाले तत्व उस अपराध को भिन्न तरीकों से अंजाम देते हैं, उनकी गतिविधि भिन्न होती है। दरसअल, अपराध एक बहुआयामी गतिविधि है, जिसमें चोरी, पिक-पॉकेटिंग, सेंधमारी, गड़बड़ी और अधिक गंभीर गतिविधियों जैसे कि हत्या, डकैती, दंगे, गुंडागर्दी, धोखाधड़ी, आदि शामिल हैं। 

उप-विषयों में निम्नलिखित या कोई अन्य प्रासंगिक विषय शामिल हैं: मनोविज्ञान और अपराध को समझना, फोरेंसिक मनोविज्ञान, नैतिक मनोविज्ञान/ नैतिकता, आपराधिक इंथ्रोपलॉजी, व्यक्तित्व विकार, मनोरोगी, सैडिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, आपराधिक आचरण का मनोविज्ञान, आपराधिक व्यवहार, प्रत्यक्षदर्शी अध्ययन, आपराधिक प्रोफाइलिंग, खोज का मनोविज्ञान, कानूनी प्रणाली में मनोविज्ञान की भूमिका, विभिन्न प्रकार के अपराध में लिंग अंतर, अपराध की रोकथाम के मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप, अपराध से संबंधित कोई भी पहलू।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रो. मध्या जीर्गन, मलेशिया, डॉ. रूमा खोंडेकर, बांग्लादेश, प्रो. शिशिर सुब्बा, नेपाल, प्रो. खालिद, ढाका, बांग्लादेश, प्रो. लीला प्रधान, नेपाल, प्रो. जीपी ठाकुर, नई दिल्ली, प्रो. एमजी हुसैन, नई दिल्ली, प्रो. जी.डी. शर्मा, बिलासपुर, छत्तीसगढ़,. ब्रज किशोर गुप्ता, बेंगलुरु, प्रो. एवीएस मदावत, राजस्थान, प्रो. नवरतन शर्मा, हरियाणा, प्रो. तरनी जी अध्यक्ष, भारतीय मनोवैज्ञानिक संघ और डीआईजी, भागलपुर

शिक्षक और छात्र इस संबंध में 15 नवंबर, 2019 तक अपने आलेख और शोधपत्र भेज सकते हैं। पूर्ण पेपर जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर, 2019 हैं जिनके बारे में 25 नवंबर तक स्वीकृति की सूचना भेजी जाएगी। पंजीकरण के लिए आखिरी तारीख 25 नवंबर, 2019 है जबकि मौके पर 2 दिसंबर, 2019 तक पंजीकरण कराया जा सकता है। कार्यक्रम की अधिक जानकारी के लिए 9534675123/ 7033293009 (प्रोग्राम), 9433936021/ 8862968902 (शोध सार), 7408807646 (लॉजिस्टिक) पर संपर्क करें। इमेल एड्रेस हैं- janakshri@yahoo.comicpc.bhagalpur@gmail.com

झगड़ों से बचें, सुलह करें

लखनऊ विश्वविद्यालय के लॉ डिपार्टमेंट ने ‘मध्यस्थता और सुलह’ विषय पर 20 अक्टूबर 2019 को सम्मेलन आयोजित किया है। लखनऊ विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी का देश में नाम है। मध्यस्थता और सुलह विषय पर चर्चा के दौरान कानून की चुनौतयों पर खास जोर होगा। आयोजकों ने कहा कि एडीआर (ऑल्टरनेट डिप्सूट रिजोलेशन) प्रणाली के दर्शन को अब्राहम लिंकन ने ठीक ही कहा है: “मुकदमेबाजी को त्यागें, जब भी आप कर सकते हैं, कोशिश करें कि अपने पड़ोसी को समझौता करने के लिए राजी करें। ये ध्यान देने योग्य बात है कि (मुकदमों के) सामान्य विजेता अक्सर फीस, खर्च, लागत और समय के लिहाज से देखें तो एक तरह से हारे हुए होते हैं। ”मुकदमेबाजी हमेशा संतोषजनक परिणाम नहीं देती है। यह समय और धन के लिहाज से देखें तो यह बहुत महंगा है।

कानून की अदालत में जीता या हारा हुआ शख्स मुकदमों को लेकर अपनी मानसिकता को नहीं बदलता है कि किस तरह से उसका प्रतिकूल असर हो रहा है जब वह अपील के बाद अपील करता है। एडीआर सिस्टम विभिन्न पक्षों के मानसिक दृष्टिकोण में परिवर्तन को सक्षम बनाता है।  दावा किया गया है कि यह सम्मेलन एडीआऱ के विकास को और आगे ले जाने और उसे वैश्विक परिदृश्य में देखने में मददगार होगा।

कार्यक्रम के सम्मिलित उपविषय हैं- वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली (एडीआऱ), एडीआर में न्यायपालिका की भूमिका, अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता, भारत के कानून और एडीआर का प्रचलन, मध्यस्थता, सुलह, मध्यस्थता और बातचीत में उभरते मुद्दे, अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता, विदेशी पुरस्कार की मान्यता और प्रवर्तन, परिवार और वैवाहिक विवादों में मध्यस्थता, ऑनलाइन विवाद समाधान, इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन में आर्बिट्रल इंस्टीट्यूट और इमर्जिंग ट्रेंड की भूमिका, एडीआर से संबंधित अन्य मामले।

आयोजकों ने इसके लिए शिक्षाविदों, वकीलों, विद्वानों और नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों को इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए पेपर समिट करने का अपील की है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पूर्व पंजीकरण जरूरी होगा ताकि सम्मेलन की व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने में मदद मिले। संभावित प्रतिभागियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपने यात्रा कार्यक्रम को एडवांस में तैयार करें। इस बारे में laweminarlu@gmail.com ई-मेल पर संपर्क किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए मोहम्मद अहमद, आयोजन सचिव, मोबाइल नंबर: 8090623232 से संपर्क किया जा सकता है। कार्यक्रम के लिए छात्र सह-संयोजक भी बनाए गए हैं। इसके लिए सचिन वर्मा, मोबाइल नंबर: 9120671865, विनय कुमार यादव मोबाइल नंबर 7905610778।

राधाकृष्णन व्याख्यान में प्रणब

डॉ. राधाकृष्ण सर्वपल्ली राधाकृष्णन व्याख्यान (आरकेएमएल) में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शिरकत करेंगे। इस कार्यक्रम को शिमला उच्च शिक्षण अध्ययन संस्थान ने राधाकृष्ण फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया है। कार्यक्रम यूनिवर्सल एथिक्स विषयक है और ये दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के फाउंटेने लॉन में 21 नवंबर को होगा। कार्यक्रम दलाई लामा से संबंधित है। आयोजकों की ओर से इस बारे में 29 अक्टूबर तक आमंत्रण भेजा जाएगा।

आईआईएएस, शिमला का परिसर और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति, दार्शनिक-राजनेता डॉ. एस राधाकृष्णन ने 1965 में शिमला के भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान की नींव रखी थी। उनकी स्मृति में 1991 में व्याख्यानमाला शुरू की गई थी। इस व्याख्यानमाला में अब तक कई बड़े शिक्षाविद् और अकादमिक लोग व्याख्यान दे चुके हैं। पिछले साल इसमें बिबेक डेबरॉय ने शिरकत की थी।

शिमला संस्थान के मुताबिक, आज के समय में पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की बातें अहम हैं। इसकी याद शिमला भी दिलाता रहा है। राधाकृष्णन संस्कृतियों का सम्मिलन, सभ्यताओं का सम्मिलन तथा विभिन्न दृष्टिकोणों का सम्मिलन युग की एक महानत्तम घटना मानते थे। वे कहते थे कि हम मात्र एक आस्था से नहीं बंधे हैं। आस्थाओं की भिन्नता का भी सम्मान करते हैं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि लोगों में एकजुटता, मित्रता बनी रहे तथा एक ऐसे जगत का निर्माण हो जहां हम प्रसन्नतापूर्वक, एकता तथा मित्रवत जीवन बसर कर सकें। इसलिए आओ अनुभव करें कि बढ़ती हुई परिपक्वता स्वयं अपनी क्षमतानुरूप अन्य दृष्टिकोणों को समझने के सक्षम हो। यही हमारी कोशिश होनी चाहिए। दो संस्कृतियों को पृथक करने वाला लौह-आवरण टूट गया है। यह अच्छा है कि हमने एक दूसरे की संस्कृतियों, सभ्यताओं व संस्कृतियों को यथासंभव पहचाना और उसकी आवश्यकता पर बल दिया। यह कमजोर आस्था का नहीं, अपितु बढ़ती परिपक्वता का प्रतीक है। यदि मनुष्य दूसरी संस्कृतियों को सहानुभूतिपूर्वक देखने में असमर्थ है तथा उनके साथ सहयोग करने में भी समर्थ नहीं हैं तो उसके अंदर मानवीय अपरिपक्वता है। हमें सहयोग की आवश्यकता है न कि संघर्ष की। ऐसे कठिन समय में शांति व सहयोग की बात करना एक बहुत ही साहसिक कार्य है। शत्रुता, विरोध व युद्ध की बात करना आसान है। हमें इस दुःसाहस पर लगाम लगानी चाहिए। हमेशा हमारा प्रयास सहयोग, भाईचारा, मित्रता स्थापित करने तथा एक ऐसा जगत निर्मित करने की ओर होना चाहिए जहां हम सब मिलजुलकर खुशी, मधुर संबंध स्थापित कर व मित्रवत जीवन बसर कर सकें। आओ ऐसे में महसूस करें कि यह बढ़ती परिपक्वता स्वंय अपनी समझ की क्षमता के अनुरूप दूसरी दृष्टिकोणों को अभिव्यक्त करे

आयोजकों का कहना है कि सन् 1965 में कही गई बात आज भी सत्य साबित होती है। यह संस्थान का विशेष अधिदेश है जो मानवीय अवस्थाओं पर भयमुक्त तथा पूर्वाग्रह रहित गहन चितंन करने के लिए बहु-अध्ययनों के लिए एक मंच प्रदान करता है।

शिमला अध्ययन संस्थान चाहता है कि इस बार के कार्यक्रम को लेकर तमाम बौद्धिकों और अकादमिक लोगों तक आयोजन की जानकारी पहुंचे। इस बारे में जल्द ही आमंत्रण कार्ड भेजने की तैयारी की जा रही है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शिमला अध्ययन संस्थान के संपर्क सूत्र प्रेम चंद से बात की जा सकती है। उनके फोन नंबर हैं- 0177-2830102, 9816016593 और 9418045822।

नारी अब भी नारा है

‘महिला सशक्तिकरण, कानून, फेमनिज्म, लिंग भेदभाव और महिला नेतृत्व : 21 वीं सदी में मुद्दे और चुनौतियां’ (नारीवाद- 2019) विषय पर कृषि संस्कृत, नई दिल्ली, संस्था ने 9 नवंबर, 2019 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में अतंरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है।

आयोजकों के मुताबिक नारीवाद की अवधारणा प्राचीन समय से है और उसके ही अर्थ में आगे देखें तो पुरुष और महिला जहां एक दूसरे की पूरक माने गए लेकिन 21 वीं शताब्दी के पहला चौथाई हिस्से गुजरने तक भी स्थिति ऐसी नहीं है। नारीवाद के बाद के युग में जब कई लोग यह तर्क देने की कोशिश कर रहे हैं कि नारीवाद की अब कोई जरूरत नहीं है क्योंकि महिलाओं को कानूनन सभी व्यवसायों में जगहों पर समानता मिल चुकी है, वास्तविकता एक अलग कहानी दिखाती है। उदाहरण के लिए, महिला राजनेताओं को अभी भी उनके लुक जैसे आधार पर जांचा जाता है। इसके अलावा कई पेशे अभी भी मर्दाना काम के पैटर्न के अनुसार चल रहे हैं और इस प्रकार कई कार्यस्थल उनसे बहुत दूर दिखते हैं। उदाहरण के लिए, न्यूज़रूम में महिलाएँ संपादकीय पदों को प्राप्त करने में सफल नहीं हो सकती हैं क्योंकि पेशे में अभी भी काफी हद तक पुरुष हैं जो राजनीति, और दिन-रात की मुख्य ख़बरों के बारे में बताते हैं जबकि महिलाएँ अभी भी जीवनशैली, भोजन और स्वास्थ्य तक ही सीमित हैं। हालाँकि, जब पारंपरिक महिला विषय एजेंडे में आते हैं तो हम पुरुष पत्रकारों को इसके बारे में लिखते हुए देखते हैं।

विज्ञापन  की दुनिया में भी देखें तो स्थिति बेहतर नहीं है जहां अभी भी यौन उत्पीड़न का एक प्रमुख मुद्दा है। वह भेदभाव की शिकार हैं। जनसंपर्क में, विद्वान उस उद्योग के नारीकरण की बात करते हैं जिसमें महिलाओं को पीआर उद्योग में अधिक संख्या में भागीदारी करते देखा गया था, लेकिन इसमें उनके साथ कई वेतन विसंगतियां हैं। भले ही महिलाएं अधिकांश कार्यबल का निर्माण करती हैं, लेकिन वे अभी भी वेतन असमानताओं से जूझ रही हैं। कुछ देशों में यहां भी एक दशक के बाद महिलाओं की संख्या घटने लगी। ये कुछ ही उदाहरण हैं, लेकिन स्थिति कहीं कुछ और ही (या बदतर) है। समाज अभी भी पितृसत्तात्मक मूल्यों पर आधारित हैं।

उदाहरण के लिए, भले ही पुरुषों के लिए पैतृक छुट्टियां लेना और बच्चों और घर की देखभाल के लिए घर पर रहना संभव है, फिर भी यह महिलाओं की परेशानियों औऱ जिम्मेदारियों का अंत नहीं है। इसके अलावा कुछ देशों में तो महिलाओं को अभी भी बुनियादी अधिकारों जैसे कि मतदान का अधिकार, सभी पदों पर काम करने और यहां तक कि गाड़ी चलाने के अधिकार पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

समाज में कई पुरुष हैं जो पारिवारिक हिंसा में फंसे हैं लेकिन अभी भी ऐसी स्थिति में महिलाएं ज्यादा हैं जो दुर्व्यवहार से पीड़ित हैं। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बहुत सारे काम इस सदी में हुए लेकिन विधायी सुधार के अलावा पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता को बदलने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सम्मेलन में मुख्य रूप से यह सवाल होगा कि हम कितनी दूर तक गए हैं और पुरुषों और महिलाओं दोनों में सच्ची समानता प्राप्त करने के लिए क्या करने की आवश्यकता है। हमें अपेक्षित भूमिकाओँ पर जिक्र करना है। आयोजकों ने विषय पर दुनिया भर से मौखिक/ पोस्टर प्रस्तुति में भाग लेने/ प्रस्तुत करने के लिए मौखिक और पोस्टर प्रस्तुति के लिए सार और पूर्ण शोध पत्र आमंत्रित किए हैं।

सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख वक्ता हैं- प्रो. आरपी सिंह, दर्शनशास्त्र केंद्र, समाज विज्ञान  स्कूल, जेएनयू, नई दिल्ली. डॉ. दया शंकर तिवारी एसो. प्रोफेसर संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, एसके झा, नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय दिल्ली, डॉ. चंद्र राजन, वकील, सुप्रीम कोर्ट, डॉ. सरिता नंदा, प्रोफेसर, दौलत राम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, डॉ. ममता त्रिपाठी, गार्गी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय आदि।

इस विषय पर शोध या आलेख का सार 25 अक्टूबर, 2019 तक भेजा जा सकता है। इसे infowomensconference@gmail.com पर आयोजन सचिव को भेजें। अधिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए वेबसाइट देखें- www.krishisanskriti.org/naareevaad.html  आयोजकों में डॉ जीसी मिश्रा का फोन नंबर है- 85270 06560।

साहित्य क्षेत्रे

पटना में कविता के दिन

रजा फाउंडेशन और अर्थशिला ने बिहार संग्रहालय की मदद से पटना में 19-20 अक्टूबर को “दो दिन कविता के” कार्यक्रम का आय़ोजन किया है। कार्यक्रम में हिंदी के कई नामी कवि शिरकत कर रहे हैं। आय़ोजकों के अनुसार कोई चार सत्रों में युवा कवि अपनी कविताओं का पाठ करेंगे जिनकर वरिष्ठ कवि राय रखेंगे।

 कार्यक्रम में आधार वक्तव्य प्रसिद्ध आलोचक और कवि अशोक वाजपेयी रखेंगे। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमकुमार मणि, आलोक धन्वा, अरुण कमल, उदयन वाजपेयी शामिल होंगे। आमंत्रित युवा कवियों में निशांत, लवली गोस्वामी, उपासना झा, विहाग वैभव, पूनम अरोड़ा, सुजाता, उपांशु, अंचित, यथार्थ उत्कर्ष, व्योमेश शुक्ल, मोनिका कुमार, सुशीला पुरी, वीरू सोनकर, अनुराधा सिंह, अदनान दरवेश, नताशा, शंकरानंद हैं।

पहला सत्र 19 अक्टूबर को शाम 4 बजे शुरू होगा। अशोक वाजपेयी के वक्तव्य के बाद तीन कवि कविता पाठ करेंगे। इसी दिन शाम 6.30 बजे से दूसरा सत्र होगा। 20 अक्टूबर को पहला सत्र सुबह 10 बजे से होगा। कार्यक्रम स्थल है बिहार संग्रहालय, बेली रोड पटना। कार्यक्रम में शामिल होने संबंधी जानकारी के लिए 7250601118, 9430253251 फोन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।

विश्व कविता में बात प्रतिरोध की 

वीएसएसडी महाविद्यलय कानपुर में हिंदी के वरिष्ठ कवि मंगलेश डबराल ‘विश्व कविता में प्रतिरोध’ विषय पर मंगलवार 22 अक्टूबर, 2019 को एकल व्याख्यान देंगे और कविता-पाठ करेंगे। कार्यक्रम विधि विभाग के सभागार में पूर्वाह्न 11 बजे से सुनिश्चित है। हिंदी विभाग के अध्यक्ष और कवि डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने बतया कि कार्यक्रम के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध कथाकार राजेन्द्र राव और संचालक डॉ. आनन्द शुक्ल होंगे।

हिंदी विभाग ने इस आयोजन को सार्थक एवं गरिमामय बनाने के लिए कविता प्रेमियों को आमंत्रित किया है। कार्यक्रम के आयोजकों में डॉ. आनन्द शुक्ल, डॉ. दीप्तिरंजन बिसारिया, डॉ. राकेश शुक्ल, डॉ. रीता पाण्डेय, डॉ. नीलिमा सिंह, डॉ. रंजन तिवारी भी हैं। बता दें कि विगत वर्ष एकल व्याख्यान ‘कविता और मेरा समय’ विषय पर मशहूर कवि नरेश सक्सेना शामिल हुए थे, जिनका व्याख्यान अविकल रूप में ‘पहल’ (अंक 117) में प्रकाशित और चर्चित हुआ था।

कथाओं की नाटकीय संगीतमय प्रस्तुति

‘स्टोरी घर’ ने 18 अक्टूबर 2019 को अमलतास, इंडिया हैबिटेट सेंटर में कहानियों और संगीत के माध्यम से कथावाचन और प्रस्तुति का कार्यक्रम आयोजित किया है। कहानियों को रंगमंच की कला और संगीत के साथ प्रस्तुति करने के स्टोरी घर की कार्यशैली को काफी सराहना मिलती रही है। स्टोरी घर एक स्वतंत्र संगठन है जो 2012 से स्कूलों, एनजीओ और सरकारी संगठनों को स्टोरी टेलिंग और थियेटर के माध्यम से एकीकृत सीखने की पेशकश कर रहा है, जिससे सीखने की प्रक्रिया बच्चों के लिए अधिक अभिनव और जीवंत हो सके।

कार्यक्रम में छह साल की उम्र से ऊपर के सभी लोग से शिरकत कर सकते हैं। आयोजकों का कहना है कि उनके कार्यक्रम का मकसद सामाजिक कौशल, जीवन कौशल, भाषा के विकास और पढ़ने की आदतों जैसे विशिष्ट परिणामों को प्राप्त करना है। संस्था एनसीईआरटी, नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली पर्यटन और अन्य शिक्षा विभाग, सरकारी एजेंसियों और सांस्कृतिक केंद्रों के साथ मिलकर स्कूलों और अन्य स्थानों में कार्यशालाएं आयोजित करती है। ताज महोत्सव आगरा, कथाकार और कहानी जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक समारोहों में संस्था ने भागीदारी की है। प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठन जैसे हेल्पएज, तमन्ना, अमर ज्योति ट्रस्ट और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों जैसे जेआईसीए के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण पर कार्यशालाओं आदि का संचालन करती है।

कार्यक्रम शाम के 6 बजे शुरू होगा। इसके लिए गेट नंबर तीन से प्रवेश मिलेगा। अधिक जानकारी के लिए जयश्री सेठी को 7838243022 या ईमेल पते jaishree@storyghar.com  पर संपर्क किया जा सकता है।

साखी का विशेषांक

साहित्यिक पत्रिका साखी के कवि केदारनाथ सिंह पर केंद्रित विशेषांक का 19 अक्टूबर 2019 को लोकार्पण किया जा रहा है। यह कार्यक्रम नरगौना पैलेस डांस हॉल ललित नारायण मिश्रा विद्यालय दरभंगा में है। कार्यक्रम की अध्यक्षता ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के कुलपति सुरेंद्र कुमार सिंह करेंगे जबकि अध्यक्ष अवधेश प्रधान होंगे। वह काशी विश्वविद्यालय वाराणसी के आचार्य हैं।

इसके अलावा प्रोफेसर सदानंद शाही जो साखी के संपादक हैं. इसमें मौजूद होंगे। इनके अलावा संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर राम चंद्र ठाकुर और हिंदी के विद्वान प्रभाकर पाठक इस कार्यक्रम को शिरकत करेंगे। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर चंद्र भानु प्रसाद सिंह हैं। दरभंगा में रहने वाले लोगों के लिए यह एक यादगार कार्यक्रम हो सकता है।

विज्ञान की दुनिया में 

शिमला में साइंस सेमिनार

विज्ञान और प्रौद्योगिकी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीआरएसटी- 19) का शिमला में 20 अक्टूबर-2019 को सेमिनार आयोजित किया गया है। आईसीआरएसटी- 19 शिमला ने इसे विज्ञान सोसायटी-जापान के सहयोग से आयोजित किया है। अनुसंधान में लगे विद्वानों, प्रतिनिधियों और छात्रों को प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग में अपने अनुभव और ज्ञान को साझा करने के लिए ये सेमिनार आयोजित किया गया है। आईसीआरएसटी-19 आर्किटेक्चर, सिविल इंजीनियरिंग में ज्ञान और उसके नतीजों के बारे में एक उत्कृष्ट अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान कर सकता है।

सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्र में साझे रूप से अत्याधुनिक विकास को पूरा करने के लिए दोनों अकादमियों के साथ-साथ उद्योग के शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को एक मंच प्रदान करना है।

साइंस सोसाइटी से ज्यादा जानकारी के लिए ईमेल एड्रेस info@sciencesociety.co पर ईमेल करें या फोन नंबर 9042474084 पर संपर्क करें।

एनर्जी सिस्टम पर वर्कशॉप

राजीव गांधी अरुणाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने फोर्थ जेनरेशन एनर्जी सिस्टम को लेकर  21-22 अक्टूबर 2019 को दो दिन की इंडो-चेक वर्कशॉप का आयोजन किया है। कार्यशाला में एनर्जी सिस्टम के सभी नए स्रोतों और उनकी बारीकियों की जानकारी मिल सकती है। इसे विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग ने आयोजित किया है। सेमिनार के विषय हैं- फोर्थ जेनरेशन सिस्टम ऑफ़ एनर्जी : फास्ट रिएक्टर्स, मोल्टन साल्ट रिएक्टर्स, त्वरक संचालित प्रणाली, फिशाइल ईंधन, ऊर्जा की उपयोगदक्षता का अनुमान, सामग्री का विकास और कम्प्यूटेशनल उपकरण, हाइब्रिड एनर्जी सिस्टम और संबंधित विकास, सोलर सिस्टम।

इस कार्यक्रम की आयोजन समिति में प्रो. साकेत कुशवाहा, कुलपति आरजीयू, प्रो. पी.के. कलिता, भौतिकी विभाग अध्यक्ष जबकि संयोजक प्रो. एस कुमार हैं। कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं में प्रो. जे. एडम, ब्रनो प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, ब्रनो, चेक गणराज्य, डॉ. कारेल काटोव्सज़ी ब्रनो प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, ब्रनो, चेक गणराज्य, प्रो. विनोद कुमार, अतिथि प्राध्यापक, राजीव गांधी विश्वविद्यालय, डॉ. नागेंद्र सिंह राघव वैश्विक महाविद्यालय (राजस्थान विश्वविद्यालय), डॉ. एच शनजीत सिंह राजीव गांधी विश्वविद्यालय। ज्यादा जानकारी के लिए sanjeev.kumar@rgu.ac.in या फोन नंबर 9435565142 पर संपर्क करें।

एचआर और सामान्य प्रबंधन के पहलू

जमुना लाल बजाज मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, मुंबई ने एचआर और सामान्य प्रबंधन पर 19 अक्टूबर 2019 को विशेष कार्यशाला और चर्चा आयोजित की है। इसका नाम है “आविष्कार”। यह एक तरह से रणनीतिक रूप से डिज़ाइन किया गया खेल है जो मानव संसाधन और सामान्य प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से निकटता से संबंधित है। इसमें विभिन्न प्रबंधन क्षेत्रों से प्रतिभागियों को आमंत्रित किया गया है ताकि वे अपनी विशेषज्ञता का आकलन कर सकें और साथ ही साथ मानव संसाधन, रणनीति नियोजन, बाधा से निपटने, निर्णय लेने, टीम के काम और पारस्परिक क्षमताओं से संबंधित अपने ज्ञान के आधार को बढ़ा सकें।

कार्यक्रम में कई राउंड्स रखे गए हैं जिनको स्टेज में प्रदर्शित करके बारीकियों से वाकिफ कराना होगा। ज्ञान कोष राउंड में प्रत्येक टीम को इवेंट से 3-4 दिन पहले एक कंपनी दी जाएगी। उन्हें आवंटित कंपनी के लिए सबसे अच्छी मानव संसाधन नीतियों के साथ आना होगा। परिचर्चा राउंड में एक टीम को एचआर स्थितियों से संबंधित कोई भी विषय दिया जाता है  जिसके पक्ष या विपक्ष में बोलने का मौका दिया जाएगा। विश्लेषण राउंड में प्रतिभागी को अपनी स्वयं के अनूठे एचआर से संबंधित विचारों और उस विचार के लिए उपयुक्त तमाम आधार पर बोलने का मौका दिया जाएगा। बजाज प्रबंधन अध्ययन केंद्र 164, बैकबाय रिक्लेमेशन, एचटी पारेख मार्ग, चर्चगेट, मुंबई में स्थित है।

 

(संपादन : नवल)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.inv

 

About The Author

Reply