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सीएए-एनआरसी आदिवासियों के खिलाफ, कारपोरेट जगत के हितों को साधेगी : मनीष कुंजाम

छत्तीसगढ़ के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक नवल किशोर कुमार से विशेष बातचीत में कहा है कि पिछले वर्ष ही करीब 10 लाख आदिवासी परिवारों को बेघर कर देने का फैसला सामने आया था। उनके पास भी पहचान की समस्या थी। एक बार फिर सरकार ने सीएए बनाया है

[पूरे देश में नागरिकता को लेकर चर्चा चल रही है। असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में आंदोलन चल रहे हैं। लेकिन शेष भारत भी सामान्य नहीं है। हम अपने पाठकों के बीच नागरिकता संशोधन अधिनियम से जुड़े विचारों को रख रहे हैं। इसके तहत हम दलित-बहुजन चिंतकों, विचारकों और जनप्रतिनिधियों  का साक्षात्कार प्रकाशित कर रहे हैं। आज पढ़ें, छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व सदस्य (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) व आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम से इस विषय पर बातचीत। उनके अनुसार, केंद्र सरकार इस नए कानून का इस्तेमाल आदिवासियों के खिलाफ भी करेगी।]


नवल किशोर कुमार (न.कि.कु.) : केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम बनाया है। इसे लेकर राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। आपकी प्रतिक्रिया क्या है?

मनीष कुंजाम (म. कुंजाम) : यह पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है। हमारे संविधान की प्रस्तावना में ही यह उल्लेखित है कि हम उस भारत में रहते हैं जहां लोकतंत्र है और धर्मनिरपेक्षता है। लेकिन आप देखिए कि किस तरह सरकार ने धर्म के आधार पर देश को बांटने की साजिश की है।

न.कि.कु. : क्या आपको लगता है कि इस कानून का असर आदिवासियों पर भी पड़ेगा?

म. कुंजाम : आपने सही सवाल किया। मैं आपको बताना चाहता हूं कि आज भले ही सरकार यह कहकर देश को धर्म के आधार पर बांट रही है कि यह केवल उन मुसलमानों पर लागू किया जा रहा है जो दूसरे देशों से आए हैं। लेकिन आप देखिए कि असम में ही जहां राष्ट्रीय नागरिकता पंजी बनाई गई है, वहां करीब 19 लाख लोगों को पंजी में नहीं शामिल किया गया है। इनमें से करीब 12 लाख तो हिंदू हैं। वे कहां जाएंगे? आपने आदिवासियों की बात कही है। यदि कागजी पहचान के आधार पर किसी की नागरिकता तय होगी तो इसका सबसे अधिक शिकार तो हम आदिवासी होंगे। हमारे अधिकांश आदिवासी लोगों के पास तो कोई कागजात नहीं है। आज भी जो आदिवासी पहाड़ों पर रहते हैं, उनके पास भी पहचान के दस्तावेज नहीं हैं। आप ही बताइए कि यदि हम सबसे पहचान पत्र मांगा जाएगा तो हम कहां से लाएंगे। हमारे लोग पहले ही जल-जंगल-जमीन से वंचित किए जा रहे हैं, अब इस देश से ही हमें निकाल दिया जाएगा।

मनीष कुंजाम, पूर्व विधायक, छत्तीसगढ़

न.कि.कु. : पिछले ही साल जमीनी दस्तावेज नहीं होने के कारण देश भर के दस लाख आदिवासी परिवारों के रहवास पर संकट आया था। क्या आपको लगता है कि सीएए कानून का भी दुरूपयोग किया जाएगा?

म. कुंजाम : आपने बिलकुल सही उदाहरण दिया है। आप देखिए कि सरकार कर क्या रही है। जिन लोगों के पूर्वजों की यह धरती है, वह उन्हें ही बाहरी बता रही है। अब ऐसे में यह कहना कि सीएए का दुरूपयोग केवल मुसलमानों के लिए होगा, यह मानने योग्य ही नहीं है। हकीकत तो यह है कि इस कानून का इस्तेमाल वे कारपोरेट जगत के हितों को साधने के लिए करेंगे।

यह भी पढ़ें : सीएए-एनआरसी के खिलाफ एकजुट हों दलित-बहुजन-मुसलमान : प्रकाश आंबेडकर

न.कि.कु. : सीएए कानून के विरोध में क्या आपने कोई कार्यक्रम तय किया है। इसका कैसे विरोध करेंगे?

म. कुंजाम : हमारे छत्तीसगढ़ में इन दिनों स्थानीय निकायों के चुनाव हैं। इसलिए यहां के लोग अभी एनआरसी और सीएए से वाकिफ भी नहीं हैं। इसलिए यहां का माहौल दूसरा है। लेकिन हमारी पार्टी ने कार्यक्रम तय किया है। आगामी 19 दिसंबर को देशभर में हम अशफाकुल्ला खां और रामप्रसाद बिस्मिल को याद करेंगे। हम देश के शासकों को यह बताएंगे कि यह देश जितना रामप्रसाद बिस्मिल का है उतना ही यह देश अशफाकुल्ला खां का भी है। हम हर स्तर पर सरकार के इस काले कानून का विरोध करेंगे।

(संपादन : गोल्डी/अनिल)


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लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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