h n

एफपी न्यूज

-

क्लिक करें :

Before the coronavirus could kill them, hunger would and so they walked

 उपरोक्त सामग्री अभी सिर्फ अंग्रेजी में उपलब्ध है। अगर आप इसका हिंदी अनुवाद करना चाहते हैं तो कृपया संपर्क करें। गुणवत्तापूर्ण अनुवादों को हम आपके नाम के साथ प्रकाशित करेंगे।  Email : editor@forwardpress.in


[फारवर्ड  प्रेस भारत के  सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से दबाए गए तबकों – यथा, अन्य पिछडा वर्ग, अनुसूचित जनजातियों, विमुक्त घुमंतू जनजातियों, धर्मांतरित अल्पसंख्यकों से संबंधित मुद्दों को आवाज देने लिए प्रतिबद्ध है। यह एक द्विभाषी (अंग्रेजी-हिंदी) वेबसाइट है। हम हर सामग्री  हिंदी व अंग्रेजी में प्रकाशित करते हैं, ताकि इन्हें यथासंभव देश-व्यापी पाठक वर्ग मिल सके। लेखक व स्वतंत्र पत्रकार अपने लेख दोनों में से किसी एक भाषा में भेज सकते हैं।

फारवर्ड प्रेस के इस अभियान का सुचारू रूप से संचालन के लिए ऐच्छिक योगदान करने के इच्छुक अनुभवी अनुवादकों का  स्वागत है]

मुखपृष्ठ पर जाने के लिए यहां क्लिक करें :

लेखक के बारे में

अनिल वर्गीज

अनिल वर्गीज फारवर्ड प्रेस के प्रधान संपादक हैं

संबंधित आलेख

झारखंड : मनरेगा व वीबीग्राम(जी) योजना के बीच अधर में लटके ग्रामीण दलित-आदिवासी मजदूर
केंद्रीय बजटीय आवंटन के अभाव में 11 जनवरी, 2026 से झारखंड के लाखों मजदूरों का कुल 503.2 करोड़ रुपए की मजदूरी का भुगतान लंबित...
मध्य प्रदेश के बालाघाट में बॅाक्साइट खनन के विरोध में स्थानीय आदिवासी
बमनी की सुंदरा टेकाम करीब 50 वर्ष की होंगी। वह कहती हैं कि “हम सालों से जंगल के पास बसे हुए हैं। जंगल हमें...
कागज़ बनाम आदिवासी : जीतू मुंडा प्रकरण का ऐतिहासिक अर्थ
जीतू मुंडा की यह घटना कोई बेचारगी भरी अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। आदिवासी पूर्वजों की वही ऐतिहासिक चेतावनी, जो हमें याद दिलाती...
भाजपा चाहती है कि मुसलमान, हिंदू पिछड़े और दलित नागरिक की तरह न सोचें
हिंदुत्ववादी राजनीति को मुसलमानों के मुसलमानों की तरह सोचने से कोई दिक्कत नहीं है। उसे दिक़्क़त बस मुसलमानों के नागरिक की तरह सोचने से...
‘बॉडी काउंट’ : लैंगिक असमानता के खिलाफ नए तेवर की शार्ट फिल्म
एक सवाल से अगर स्त्री के बॉडी काउंट एक से अधिक हुए तो उसके चरित्र पर धब्बा लग जाता है और वहीं पुरुष का...