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उच्च अध्ययन शोध संस्थानों में कोरोना का असर, छात्रों के फेलोशिप पर रोक

कुछ संस्थानों के छात्र कोविड-19 के दौरान लैब मे रिसर्च कर रहे हैं। उन्हें भी फेलोशिप नही मिल पा रही है जिसके कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अनेक शोधार्थियों ने यह भी बताया है कि वो लॉकडाउन के कारण अपनी एनुअल रिसर्च प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा ही नहीं कर पाए हैं। फारवर्ड प्रेस की खबर

कोरोना के प्रभाव की जद में अब उच्च अध्ययन शोध संस्थान भी आ गए हैं। इसका असर यह हुआ है कि शोध छात्रों को फेलोशिप नहीं दिया जा रहा है। चूंकि अधिकांश शोध छात्र दूसरे राज्यों के हैं और उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इनमें वे शोधार्थी भी शामिल हैं जो कोरोना से संबंधित रिसर्च में लगे हैं। इस संबंध में ऑल इंडिया रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन (ऐरसा) की तरफ से एक बयान जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने सरकार से फेलोशिप की राशि देने की मांग की है। उनका यह भी कहना है कि सरकार द्वारा वादा किया गया था कि किसी भी स्थिति में फेलोशिप की राशि नही रोकी जाएगी।

ऐरसा के अध्यक्ष डा. लालचंद्र विश्वकर्मा ने इस संबंध में बताया कि 16 जनवरी, 2018 को फैलोशिप के मुद्दे को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) के बाहर देश भर के विभिन्न शोध संस्थानों हजारों शोध छात्र विरोध प्रदर्शन के लिये एकत्र हुए थे। उस समय भारत सरकार ने शोध छात्रों को यह भरोसा दिलाया था कि शोध छात्रों की फेलोशिप की राशि नियमित रहेगी। लेकिन मौजूदा हालात यह है कि दो महीने से फेलोशिप की राशि नहीं दी गयी है और इसका असर यह हुआ है कि शोधार्थियों को आर्थिक परेशानियां हो रही हैं। 

रमेश पोखरियाल निशंक, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री

उन्होंने बताया कि शोधार्थियों को होने वाली परेशानियों के बाबत भारत सरकार के अधिकारियों को ईमेल के जरिए सूचित किया गया है। लेकिन उनकी तरफ से इस मामले में उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। जब इस मामले ऐरसा के द्वारा सोशल मीडिया के जरिए शोधार्थियों के बीच संवाद किया गया तब यह जानकारी भी सामने आयी कि कुछ संस्थानों के छात्र कोविड-19 के दौरान लैब मे रिसर्च कर रहे हैं। उन्हें भी फेलोशिप नही मिल पा रही है, जिसके कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अनेक शोधार्थियों ने यह भी बताया है कि वो लॉकडाउन के कारण अपनी एनुअल रिसर्च प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा ही नहीं  कर पाए, जिससे उनकी फेलोशिप भी फरवरी माह से ही बंद है। कई संस्थानों शोधार्थियों को पिछले छह माह से फेलोशिप का भुगतान नहीं किया गया है। इस बीच देशव्यापी लॉकडाउन ने उनकी समस्याओं को बढ़ा दिया है। 

डॉ. लालचंद्र विश्वकर्मा ने सरकार से मांग किया है कि भारत के शोध छात्रों को विभिन्न संस्थानों में रिसर्च के लिये स्वस्थ्य तथा स्वच्छ वातावरण और उनकी निर्बाध फेलोशिप मिलती रहेगी, तभी शोध छात्र देश में नवीन शोध कार्य जारी रख सकते हैं।

(संपादन : नवल)

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एफपी डेस्‍क

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