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पाताल लोक : समाज का आईना प्रस्तुत करती एक वेब सीरीज

इस नई वेब सीरीज का एक प्रमुख पात्र कहता है कि भारतीय समाज में तीन लोक हैं - स्वर्ग, धरती और पाताल। स्वर्ग में देवता वास करते हैं तो धरती पर आम आदमी। वहीं पाताल मतलब अपराधियों यानी कीड़ों-मकोड़ों की वास स्थली। यह सीरीज बताती है कि वे कौन हैं जो इंसानों को कीड़ा-मकोड़ा बनने पर मजबूर कर देते हैं। हेमराज पी. जांगिड़ की समीक्षा

अमेज़न प्राइम वीडियो ने हाल में एक नई वेब सीरीज, ‘पाताल लोक’, की शुरुआत की है। अविनाश अरुण और प्रोसीत रॉय द्वारा निर्देशित यह सीरीज अपराध की दुनिया के बारे में है और हमारे समाज को आईना दिखलाती है। जैसा कि हमारे धर्मग्रन्थ और आजकल “व्हाट्सएप सन्देश” हमें बताते हैं, हमारी दुनिया तीन समांतर लोकों में विभाजित है – स्वर्ग लोक, धरती लोक और पाताल लोक। सीरीज की कहानी पाताल लोक के बारे में है, परन्तु वह हमें धरती लोक और स्वर्ग लोक में भी ले जाती है। उसमें हमारी सरकार भी है, राजनैतिक व्यवस्था भी, मीडिया भी, जातिवाद से जकड़े गांव भी और पुलिस भी। सीरीज में घटनाएं मुख्यतः दिल्ली में होती हैं, परन्तु यह हमें ग्रामीण भारत की झलक भी दिखाती है।  

पहले एपिसोड में ही हाथीराम चौधरी अपने साथियों को बतलाता है कि स्वर्ग लोग में देवता निवास करते हैं, धरती लोक में मनुष्य और पाताल लोक में कीड़े-मकोड़े। 

‘पाताल लोक’ शुरू होता है पत्रकार संजय मेहरा (नीरज कबी) की हत्या की कोशिश करने के आरोप में चार लोगों की गिरफ्तारी से। यमुना विहार पुलिस स्टेशन के एक साधारण पुलिसकर्मी, हाथीराम चौधरी, को मामले की जांच सौंपी जाती है। संजय मेहरा एक राष्ट्रीय टीवी चैनल के प्राइमटाइम शो के एंकर है। वे सरकार, राजनेताओं और दिल्ली के प्रभु वर्ग की खुलकर निंदा करने के लिए जाने जाते हैं। वे वामपंथी झुकाव वाले उदारवादी पत्रकार हैं और सोशल मीडिया पर उन्हें अक्सर ट्रोल किया जाता है। हाथीराम चौधरी का मानना है कि केवल स्वर्ग लोक में रहने वालों का ही कोई वजूद होता है और इसीलिए इस मामले की जांच हो रही है। पाताल लोक में तो लोग मरते ही रहते हैं। उनकी कोई परवाह भी नहीं करता। हाथीराम एक निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और उन्होंने अपने जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं। वे चाहते हैं कि वे जल्दी से जल्दी इस मामले की तह तक पहुंचे, प्रमोशन पाएं और अपनी पत्नी और लड़के को खुश देखें। 

अंसारी (इश्वाक सिंह) का सपना है यूपीएससी की परीक्षा पास करना। परन्तु अभी तो वह हाथीराम का असिस्टेंट है। वह साहसी और बुद्धिमान है परन्तु इस्लामोफोबिया का शिकार है। मुसलमानों के बारे में समाज में फैले पूर्वाग्रह उसके लिए मुसीबत से कम नहीं हैं। उसे इस बात का अहसास है कि हिन्दू-बहुल भारत में मुसलमान दूसरे दर्जे के नागरिक हैं। 

इस तरह, स्वर्ग लोक में संजय मेहरा जैसे लोग रहते हैं और धरती लोक आबाद है हाथीराम और अंसारी जैसों से। पाताल लोक के कीड़े कौन हैं? वे अपराधी हैं परन्तु सीरीज की पटकथा यह स्पष्ट कर देती है कि कोई भी जन्मजात अपराधी नहीं होता। हत्या के प्रयास के चारों आरोपियों की भी अपनी-अपनी कहानियां हैं।

विशाल त्यागी (अभिषेक बनर्जी) के बारे में बताया जाता है कि उसने 35 हत्याएं कीं हैं। उसे हथौड़ा त्यागी के नाम से भी जाना जाता है। वह एक भूस्वामी जाति से आता है जिसमें ज़मीन के लिए भाइयों में युद्ध जैसी हिंसा बहुत आम है। उसके अपने चाचा ने ज़मीन के विवाद को लेकर विशाल की तीन बहनों के साथ बलात्कार कर उनकी हत्या करने की सुपारी तीन लोगों को दी थी। इन हत्यायों का बदला लेने के लिए त्यागी आपने चाचा के तीनों बच्चों के सिर पर हथौड़ी से प्रहारकर कर उन्हें मार देता है। इसकी बाद वह दोनलिया के हाथों के नीचे काम करने लगता है। दोनलिया के इशारे पर वह लोगों की हत्याएं करता है और बदले में दोनलिया उसे सुरक्षा देता है। 

टोपे सिंह उर्फ़ चाकू (जगजीत संधू), पंजाब के एक ग्रामीण इलाके का रहने वाला है। वह दलित है और उसे अपने साथियों की जातिवादी टिप्पणियां झेलनी पडतीं हैं। जब वह बच्चा था तब ऊंची जातियों के उसके संगी-साथी उसे परेशान और अपमानित करते थे। बड़े होकर वह युवाओं के एक संगठन के संपर्क में आता है। यह संगठन जातिगत भेदभाव और अत्याचारों के खिलाफ लड़ता है। इस संगठन के दम पर वह उन लोगों की जम कर पिटाई लगाता है जो उसे परेशान और अपमानित करते थे। विशाल की तरह वह भी अपने घर से भाग कर शहर में शरण लेता है।

पाताल लोक के एक दृश्य में जांच अधिकारी हाथीराम चौधरी (जयदीप अहलावत), उसके सहायक अंसारी और हत्या के प्रयास के चारों संदेही.

मेरेएम्बम रोनाल्डो सिंह (मैरी लिंगदोह) उर्फ़ चिन्नी एक समलैंगिक है जिसे उसके परिवारजनों ने बचपन में ही त्याग दिया था। वह दिल्ली की सड़कों पर रिक्शा चलाने वालों की यौन हिंसा का शिकार होता है। 

कबीर (आसिफ खान) ताज़िन्दगी अपनी मुस्लिम पहचान छिपाता रहता है। उसके भाई की एक भीड़ ने पीट-पीट कर इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि भीड़ को शक था कि जो मांस वह ले जा रहा था वह गाय का था। कबीर अंततः जेल पहुंच जाता है जहां अन्य कैदी जिहादी, जिहादी चिल्लाते हुए उसकी गर्दन काट देते हैं। कबीर के साथ जो बीती उसे सुनते हुए उसके पिता कहते हैं, “जिसको हमने मुसलमान नहीं बनने दिया आप लोगों ने उसको जिहादी बना दिया”। परन्तु पुलिस अधिकारियों को कबीर से कोई सहानुभूति नहीं है और ना ही जो कुछ हुआ, उसका कोई अफ़सोस है। सांप्रदायिक घृणा किसी भी स्तर तक जा सकती है। 

तो ये थीं पाताल लोक के कीड़ों की कहानियां – वे कहानियां जो बतातीं हैं कि हमने कैसे उन्हें कीड़ा बनाया। 

ऊंची जाति का एक राजनेता जो एक दलित के घर खाना खाने के बाद अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए गंगाजल से नहाता है और मॉब लिंचिंग – पाताल लोक में ऐसा कुछ भी नहीं है जो हमारे जीवन से एकदम अलग हो। पटकथा और पात्र, दोनों प्रभावशाली हैं। वे आपके सामने कुछ प्रश्न उपस्थित करेंगे और उनके उत्तर भी देंगे।  

(अनुवाद: अमरीश हरदेनिया, संपादन : नवल)

लेखक के बारे में

हेमराज पी. जांगिड़

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ दलित स्टडीज, नयी दिल्ली में पीएचडी अध्येता हेमराज पी. जांगिड़ की रूचि समुदायों, घुमंतू एवं विमुक्त जनजातियों, जाति, सामाजिक बहिष्करण, भेदभाव और जातिगत कलंक के अध्ययन के अतिरिक्त नृवंशविज्ञान में है. ‎ ‎

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