h n

नरेंद्र मोदी का ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ : दलित-बहुजन युवाओं के साथ फरेब

याद करें कि 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि वह “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के आधार पर शासन करेंगे। लेकिन यह समझने की आवश्यकता है कि उन्होंने देश में कैसे एक ऐसा माहौल बना दिया है कि संविधान की मूल अवधारणा पर ही सवाल उठने लगे हैं। बता रहे हैं श्याम रजक

केंद्र सरकार के द्वारा लैटरल इंट्री यानी पिछले दरवाजे के माध्यम से बिना किसी प्रतियोगी परीक्षा के शासन-प्रशासन में शामिल किया जा रहा है। सरकार का यह कदम दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं के साथ धोखाधड़ी है। केंद्र सरकार ऐसा करके फिर से देश में मनुवादी व्यवस्था कायम करने की साजिश कर रही है।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : नरेंद्र मोदी का ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ : दलित-बहुजन युवाओं के साथ फरेब

लेखक के बारे में

श्याम रजक

लेखक बिहार सरकार के पूर्व मंत्री हैं

संबंधित आलेख

हैदराबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव : आदिवासी उम्मीदवार को दी जा रही है धमकी
विश्वविद्यालय किसी छात्र के लिए सिर्फ डिग्री लेने की जगह नहीं होते। खासकर उन छात्रों के लिए जो हाशिए के समाज से आते हैं।...
गुवा गोलीकांड : जब अविभाजित बिहार में दुहराया गया जालियांवाला बाग हत्याकांड
गुवा गोलीकांड के बाद झारखंड आंदोलन में जो ऊर्जा और एकजुटता आई, उसने आने वाले दो दशकों की दिशा तय की। और ठीक 20...
पंजाब : गुलजार सिंह की मौत का जिम्मेदार कौन?
जिस बेटे को पालने के लिए दलित समुदाय के गुलजार सिंह ने जिंदगी भर भेड़-बकरियां चराईं और मजदूरी की, वही बेटा नशे की गिरफ्त...
‘साल बनाम सागवान’ आंदोलन का परिणाम था 8 सितंबर का गुआ गोली कांड
1980 में इस गोलीकांड में 11 आदिवासियों की जघन्य हत्या हुई थी। इनमें तीन आदिवासी तो पुलिस के साथ आमने-सामने की लड़ाई में मारे...
परीक्षाओं का देश : असमान समाज में अवसरों का नियमन
कोचिंग उद्योग में निवेश से जिस तरह की भारी आमदनी होती है, वह स्वाभाविक रूप से भ्रष्टाचरण को प्रोत्साहित करती है। आश्चर्य नहीं कि...