बिहार के सीमांचल में सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख पुस्तकालय, गाजीपुर बार्डर पर हूल विद्रोह दिवस के मौके पर भाजपाइयों की हुड़दंग

बहुजन साप्ताहिकी में इस बार पढ़ें बिहार के किशनगंज की खास खबर जहां सामाजिक बदलाव के लिए कुछ युवाओं ने खास पहल की है। वहीं दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बार्डर पर हूल दिवस के मौके पर भाजपा समर्थकों द्वारा हंगामे के बारे में

बहुजन साप्ताहिकी

प्रति व्यक्ति आय और मानव विकास सूचकांक सहित अनेक सूचकांकों के मामले में सबसे पिछड़ राज्य बिहार के सीमांचल जिले किशनगंज में इन दिनों सामाजिक बदलाव की एक युवा कोशिश रंग ला रही है। दरअसल, कुछ उत्साही युवाओं, जिनमें मुसलमान और दलित-बहुजन शामिल हैं, ने सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख के नाम पर पुस्तकालयों की शुरुआत की है। इन युवाओं का प्रयास रंग ला रहा है और अब करीब चार सौ की संख्या में छात्र-छात्राएं इन पुस्तकालयों से जुड़े हैं। इन पुस्तकालयों में स्कूली किताबों के अलावा साहित्य की किताबें भी पढ़ने के लिए रखी गई हैं। साथ ही, ये पुस्तकालय साहित्यिक गतिविधियों के केंद्र बन चुके हैं। इन पुस्तकालयों में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने की व्यवस्था भी की जा रही है।

इस खास पहल के बारे में साकिब अहमद ने फारवर्ड प्रेस को बताया कि करीब चार साल पहले वे और उनके कुछ साथियों ने मिलकर यह फैसला लिया कि जिले में कुछ साहित्यिक गतिविधियां हों। चूंकि किशनगंज जिला बंगाल और नेपाल से सटा हुआ इलाका है और कई मायनों में यह एक उपेक्षित जिला है। आज भी यहां सार्वजनिक पुस्तकालय नहीं हैं। साहित्यिक गतिविधियां तब ना के बराबर होती थीं। ऐसे में साकिब और उनके साथियों ने प्रत्येक रविवार को मिल कर कभी काव्य पाठ तो कभी साहित्यिक परिचर्चा आदि का आयोजन करने लगे। फिर इन युवाओं ने तय कि इलाके में पुस्तकालय की स्थापना की जाय। इसमें संसाधनों के अलावा एक बड़ी बाधा थी पुस्तकों की उपलब्धता की। साकिब के अनुसार चार साल पहले अमेजन व फ्लिपकार्ट कंपनियां जिले में बहुत कम सेवाएं देती थीं। इस कारण किताब खरीदना भी मुश्किल था। फिर सब युवाओं ने चंदा जमाकर किताबें खरीदी और जिले के पहाड़कट्टा थाना के दामलबाड़ी पंचायत में फातिमा शेख पुस्तकालय की स्थापना एक निजी विद्यालय के कमरे में की। इसका नाम फातिमा शेख पुस्तकालय रखा गया। इसका औपचारिक उद्घाटन 26 जनवरी, 2021 को हुआ।

बदलाव की पहल : बांस की झोपड़ी में स्थापित फातिमा शेख पुस्तकालय में बच्चों को पढ़ाते एक शिक्षक

साकिब के अनुसार, इस पुस्तकालय से उन्होंने आसपास के सरकारी स्कूलों को जोड़ा और बड़ी संख्या में बच्चे आने लगे। पाठकों में बड़ी उम्र के लोग भी शामिल हैं। लोगों ने इस पहल की सराहना की तथा इसी तरह का एक पुस्तकालय खोलने की बात कही। तब अप्रैल, 2021 में शिक्षा नगर, हल्दागांव, पो. रायपुर, थाना पहाड़कट्टा में सावित्रीबाई फुले पुस्तकालय की स्थापना की गई।

सावित्रीबाई फुले पुस्तकालय के बाहर छात्र

साकिब बताते हैं कि कुछ युवाओं का साझा सपना अब रंग ला रहा है। उनकी योजना है कि जिले के हर पंचायत में इस तरह का पुस्तकालय स्थापित हो। 

किसान कर रहे थे सिदो-कान्हू का जयघोष, भाजपा समर्थकों ने मचाई हुड़दंग

घटना बीते 30 जून, 2021 की है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बार्डर पर आंदोलरत किसान हूल दिवस के मौके पर सिदो-कान्हू के बलिदान को याद कर जयघोष कर रहे थे, उसी समय भाजपा के समर्थक हुड़दंग मचा रहे थे। दरअसल, भारतीय संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही यह घोषित कर रखा था कि आंदोलनरत किसान हूल दिवस के मौके पर खास कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे तथा आदिवासियों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे। इस संबंध में फारवर्ड प्रेस ने मोर्चा के नेता डॉ. आशीष मित्तल का एक साक्षात्कार भी प्रकाशित किया था।

गाजीपुर बार्डर पर हूल दिवस के मौके पर आदिवासियों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते किसान

इस प्रकार पूर्व से घोषित कार्यक्रम के अनुसार गाजीपुर बार्डर पर जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई, भाजपा समर्थक आ पहुंचे और हंगामा करने लगे। हालांकि सिंघु और टिकरी बार्डर पर हूल दिवस के मौके पर किसानों ने हूल विद्रोह को याद किया तथा इस बात पर जोर दिया कि आज पूरा देश कारपोरेट परस्त कंपनियों के निशाने पर है और इसमें सरकार की भूमिका अहम है। सरकार कंपनियों के निर्देश पर देश के किसानों पर काले कानून थोप रही है।

पटना में दलित पत्रकार वेद प्रकाश को दी जान से मारने की धमकी

यूट्यूब चैनल ‘द एक्टिविस्ट’ के जरिए बहुजन जगत में पहचान बना चुके दलित पत्रकार वेद प्रकाश को जान से मारने की धमकी दी गयी है। इस संबंध में वेद प्रकाश ने राज्य के डीजीपी एस. के. सिंघल को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा की मांग की है। अपने पत्र में वेद प्रकाश ने बताया है कि 30 जून को जब वह राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में अपनी बहन, भगिनी और भतीजे के साथ कार से जा रहे थे तब कुछ लोगों ने उनका पीछा किया। किसी तरह वेद प्रकाश ने उन्हें चकमा देकर अपनी जान बचायी। 

वेद प्रकाश के मुताबिक, इसके बाद फेसबुक पर अमृतांशु नामक एक शख्स का पोस्ट दिखा जो कि स्वयं को रणवीर सेना का समर्थक बताता है। उसने अपने पोस्ट में अपने लोगों से उस सड़क पर जाने की बात कही जिधर से वेदप्रकाश गुजर रहे थे। बाद में अमृतांशु ने अपने एक दूसरे पोस्ट में लिखा जिसका आशय यह है कि आज तो वेदप्रकाश बच गया, लेकिन यदि वह नहीं सुधरा तो उसे सुधार दिया जाएगा।

बताते चलें कि रणवीर सेना बिहार में ऊंची जातियों की सशस्त्र सेना थी, जिसने 1944 से लेकर 2000 के बीच करीब डेढ़ दर्जन नरसंहारों को अंजाम दिया। इसका सरगना ब्रह्मेश्वर मुखिया था। हालांकि वर्तमान में यह संगठन अपने अस्तित्व में नहीं है। लेकिन कुछ लोग आज भी स्वयं को इसका समर्थक बताते रहते हैं।

जयंती पर याद किए गए रामनरेश यादव

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव (1 जुलाई, 1928 – 22 नवंबर, 2016) को उनकी जयंती के मौके पर याद किया गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित समारोह में जुटे लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। बताते चलें कि रामनरेश यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर के समान ही सामाजिक न्याय की जोत जलाई, और उत्तर प्रदेश मे पिछड़ों को 15 फ़ीसदी आरक्षण दिया। कर्पूरी ठाकुर और रामनरेश यादव की सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता से समाज के एक तबके के ज्ञानी-ध्यानी यथास्थितिवादी लोग इस कदर चिढ़ते थे कि उन्हें और उस वक्त केंद्र में मंत्री रहे बाबू जगजीवन राम जी को भद्दे-भद्दे नारे कहे गए। ऐसा ही एक नारा था– “दिल्ली से चमरा भेजा संदेश, कर्पूरी केश बनावे भैंस चरावे रामनरेश”।

(संपादन : अनिल)


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