h n

पैगासस प्रकरण : लोकतंत्र और दलित-बहुजन सशक्तिकरण को शिथिल करने का प्रयास

लोकतंत्र तो एक सहज स्वाभाविक प्रक्रिया है और राजनीति में लोक-लाज की परंपरा रही है। परंतु इस वक़्त लोकतंत्र में निर्लज्ज तरीके से बहुत कुछ ऐसा हो रहा है, जिससे देश में लोकतंत्र की बुनियाद हिलती नज़र आ रही है। भंवर मेघवंशी की प्रतिक्रिया

प्रतिक्रिया

इजरायल की कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नोलाजीज के जासूसी स्पाइवेयर पैगासस के ज़रिए भारत के सैंकड़ों लोगों के स्मार्ट मोबाइल के डेटा में सेंध लगाए जाने की सूचना सामने आने से सभी सकते में हैं। इसे लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उसके कहने पर ही एनएसओ ने भारतीय नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं व मीडिया कर्मियों की जासूसी की। इस संबंध में विश्व स्तर पर खबरें प्रकाशित हो रही हैं और इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया जा रहा है। दरअसल, विश्व स्तर पर जतायी जा रही चिंता बेवजह नहीं है। जिन लोगों की जासूसी करायी गयी है उनमें चालीस मीडियाकर्मियों के अलावा पक्ष-विपक्ष के नेताओं, पूर्व जज, सुरक्षा एजेंसियों के पूर्व व वर्तमान प्रमुखों सहित सामाजिक कार्यकर्ता और उद्योगपति भी शामिल हैं।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : पैगासस प्रकरण : लोकतंत्र और दलित-बहुजन सशक्तिकरण को शिथिल करने का प्रयास

लेखक के बारे में

भंवर मेघवंशी

भंवर मेघवंशी लेखक, पत्रकार और सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में अपना सार्वजनिक जीवन शुरू किया था। आगे चलकर, उनकी आत्मकथा ‘मैं एक कारसेवक था’ सुर्ख़ियों में रही है। इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद हाल में ‘आई कुड नॉट बी हिन्दू’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। संप्रति मेघवंशी ‘शून्यकाल डॉट कॉम’ के संपादक हैं।

संबंधित आलेख

झारखंड : मनरेगा व वीबीग्राम(जी) योजना के बीच अधर में लटके ग्रामीण दलित-आदिवासी मजदूर
केंद्रीय बजटीय आवंटन के अभाव में 11 जनवरी, 2026 से झारखंड के लाखों मजदूरों का कुल 503.2 करोड़ रुपए की मजदूरी का भुगतान लंबित...
मध्य प्रदेश के बालाघाट में बॅाक्साइट खनन के विरोध में स्थानीय आदिवासी
बमनी की सुंदरा टेकाम करीब 50 वर्ष की होंगी। वह कहती हैं कि “हम सालों से जंगल के पास बसे हुए हैं। जंगल हमें...
कागज़ बनाम आदिवासी : जीतू मुंडा प्रकरण का ऐतिहासिक अर्थ
जीतू मुंडा की यह घटना कोई बेचारगी भरी अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। आदिवासी पूर्वजों की वही ऐतिहासिक चेतावनी, जो हमें याद दिलाती...
भाजपा चाहती है कि मुसलमान, हिंदू पिछड़े और दलित नागरिक की तरह न सोचें
हिंदुत्ववादी राजनीति को मुसलमानों के मुसलमानों की तरह सोचने से कोई दिक्कत नहीं है। उसे दिक़्क़त बस मुसलमानों के नागरिक की तरह सोचने से...
‘बॉडी काउंट’ : लैंगिक असमानता के खिलाफ नए तेवर की शार्ट फिल्म
एक सवाल से अगर स्त्री के बॉडी काउंट एक से अधिक हुए तो उसके चरित्र पर धब्बा लग जाता है और वहीं पुरुष का...