जातिगत जनगणना के समर्थन में पसमांदा मुसलमान, ओबीसी को स्थानीय निकायों में मिले आरक्षण

अली अनवर के मुताबिक, सभी जातियों के लोगों की गणना होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर विभिन्न जातियों की तुलनात्मक स्थिति का पता कैसे चलेगा। हिंदू समाज की तरह मुस्लिम समाज भी एकरूप समाज नहीं है। यह अनेक जातियों व उपजातियों में बंटा हुआ है। वहीं महाराष्ट्र से पूर्व राज्यसभा सांसद हरिभाऊ राठौर ने पीएम को पत्र लिखकर स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज एवं अन्य पंद्रह मुस्लिम संगठनों ने इस बात का अंदेशा जताया है कि जाति जनगणना के सवाल को केंद्र सरकार महत्वहीन बनाने की साजिश कर रही है। कल 9 सितंबर, 2021 को दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में महाज के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद अली अनवर ने कहा कि जनगणाना को राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन अधिनयम (सीएए) से जोड़ने, सिर्फ पिछड़ी जातियों की जातिगत गणना कराने से लेकर दूसरे विभाजनकारी उपाय मौजूदा सरकार द्वारा ढूंढे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी जातियों के लोगों की गणना होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर विभिन्न जातियों की तुलनात्मक स्थिति का पता कैसे चलेगा। हिंदू समाज की तरह मुस्लिम समाज भी एकरूप समाज नहीं है। यह अनेक जातियों व उपजातियों में बंटा हुआ है। वर्ष 1931 के बाद जाति जनगणना नहीं हुई है। इस कारण सरकारी योजनाओं का लाभ अपेक्षाकृत कमजोर और कम संख्या वाली जातियों तक नहीं पहुंच रहा है। 

उन्होंने कहा कि वे बिहार की तर्ज पर केंद्र तथा देश भर में पिछड़ा वर्ग को पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग में बांटने, दलित मुसलमान और दलित ईसाइयों को शेड्यूल कास्ट का दर्जा देने तथा गैर सरकारी क्षेत्रों में भी आरक्षण लागू करने की मांग करते हैं। साथ ही कहा कि मौजूदा सरकार जहां मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने पर तूली हुई है, वहीं कई विपक्षी दल भाजपा के डर से सभी मुसलमानों , खासकर पसमांदा मुसलमानों को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसका लाभ हिंदू और मुसलमान तथा अन्य फिरकापरस्त सोच वाले नेता-संगठन उठाने का प्रयास कर रहे हैं। पसमांदा समाज शुरू से हर तरह के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के खिलाफ रहा है। 

पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर व हरिभाऊ राठौर की तस्वीर

प्रेस कांफ्रेंस से पहले ‘जनगणना को लेकर मुसलमानों की आशंका और सरोकार’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एक पुस्तिका जारी की गयी। इस मौके पर सेंटर फॉर दी स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज,नई दिल्ली (सीएसडीएस) के डा. हेलाल अहमद, अनिल चमड़िया, शीबा असलम फहमी, दलित विचारक प्रो. रतनलाल, डॉ. सूरज मंडल, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण मांझी ने अपने विचार व्यक्त किये।

शिक्षक दिवस के मौके पर सावित्रीबाई फुले पुरस्कार

बीते 4 सितंबर, 2021 को दिल्ली के मयूर विहार (फेज-2) में एक निजी विद्यालय बाल भवन पब्लिक स्कूल में शिक्षक दिवस का आयोजन किया गया। इस मौके पर छात्राओं को सावित्रीबाई फुले पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आरएसएस के पैरोकार व राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा रहे। इस मौके पर उन्होंने सावित्रीबाई फुले के योगदानों को याद किया। स्कूल के निदेशक बीबी गुप्ता और चेयरमैन जीसी ग्रोवर सहित सभी शिक्षक उपस्थित थे। 

सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे नंद कुमार बघेल, अर्जक संघ ने भी दिया समर्थन 

छत्तीसगढ़ के 86 वर्षीय सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यकर्ता नंद कुमार बघेल ने अपनी गिरफ्तारी के बाद यह साफ कर दिया है कि वे इस लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाएंगे। बघेल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता हैं। उन्हें बीते 7 सितंबर को छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। उसी दिन उन्हें रायपुर ले जाया गया जहां उन्हें निचली अदालत में पेश किया गया। उन्होंने अपने लिए जमानत की याचिका दायर नहीं की थी। अदालत ने उन्हें 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। इस बीच नंद कुमार बघेल से जुड़े एक करीबी सामाजिक कार्यकर्ता अरुण कुमार ने जानकारी दी है कि गिरफ्तारी से नंद कुमार बघेल के हौसले पर कोई असर नहीं पड़ा है। वे निचली अदालत में अपने उपर लगाए गए आरोपों की सुनवाई में हिस्सा लेंगे तथा न्याय के लिए अगर सुप्रीम कोर्ट भी जाना हुआ तो जाएंगे।

बताते चलें कि नंद कुमार बघेल को छत्तीसगढ़ के सर्व ब्राह्रमण समाज के द्वारा मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ मुकदमे में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में एक बयान में उन्होंने ब्राह्मणों को विदेशी कहा था और उनका बहिष्कार करने का आह्वान किया था।

वहीं इस संबंध में अर्जक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र कटियार ने नंद कुमार बघेल की गिरफ्तारी की निंदा की है। उन्होंने कहा कि बघेल जी ने ऐसा कुछ नहीं कहा, जो पहले नहीं कहा गया है। उन्होंने नंद कुमार बघेल को बिना शर्त रिहा करने की मांग की है। कटियार ने कहा कि ब्राह्मणों को अपना ही लिखा इतिहास जरूर पढ़ना चाहिए। वे समझ जाएंगे कि इस धरती का मूलनिवासी कौन है। हालांकि मौजूदा दौर में यह मुमकिन नहीं है कि किसी भी समुदाय को इस देश से भगा दिया जाय। परंतु बघेल जी ने वर्चस्ववाद को खारिज करने बात कही है, जो कि सराहनीय है। साथ ही यह भी कि 86 साल की उम्र में वे ब्राह्मणवाद के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और वह भी तब जब उनका बेटा राज्य का मुख्यमंत्री है। यह तो मायावती जैसे दलित-पिछड़े नेताओं को देखना चाहिए जो कि ब्राह्मणवाद की शरण में जा चुकी हैं और इन दिनों त्रिशुल बांटती फिर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अर्जक संघ का मानववाद ही ब्राह्मणों के वर्चस्ववाद का खात्मा कर सकता है।

ओबीसी को स्थानीय निकायों में मिले 27 फीसदी आरक्षण

महाराष्ट्र से पूर्व राज्यसभा सांसद हरिभाऊ राठौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे पिछड़ा वर्ग को स्थानीय निकायाें यथा नगर निगमों, नगर परिषदों और पंचायतों में 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था करने हेतु पहल करने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उद्धरण दिया है जिसमें महाराष्ट्र सरकार द्वारा 27 जुलाई, 2018 और 14 फरवरी, 2020 को स्थानीय निकायों के लिए जारी अधिसूचना को रद्द किया गया है। राठौर ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों अधिसूचनाओं को यह कहकर खारिज कर दिया कि पिछड़ा वर्ग एससी व एसटी वर्ग को मिलाकर आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से अधिक हो जाती है। राठौर ने कहा है कि संविधान की अनुच्छेद 243 (डी) 6 और (टी) 6 के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि स्थानीय निकायों के पदों में पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग किया है कि वे इस दिशा में पहल करें ताकि पिछड़ा वर्ग की समुचित हिस्सेदारी हो सके।

(संपादन : नवल)


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