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यूजीसी के नए मसौदे के विरुद्ध में डीएमके के आह्वान पर जुटान, राहुल और अखिलेश भी हुए शामिल

डीएमके के छात्र प्रकोष्ठ द्वारा आहूत विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आरएसएस और भाजपा इस देश को भाषा और धर्म सहित सभी स्तरों पर विभाजित कर देना चाहते हैं। मौजूदा दाैर में उनके निशाने पर शैक्षणिक संस्थाएं हैं, जिनका हिंदुकरण करके वे उन्हें उद्योगपतियों के हवाले कर देना चाहते हैं। पढ़ें, यह खबर

तारीख 6 फरवरी, 2025 और स्थान नई दिल्ली का जंतर-मंतर। समय करीब सवा ग्यारह बजे सुबह। एक तमिल नौजवान अपनी चमचमाती नई साइकिल से पहुंचा। उसकी साइकिल पर एक प्लेकार्ड था, जिसमें तमिलनाडु के भूतपूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की तस्वीर के साथ लिखा था– ‘कलाईंगर : ए लीजेंड’। उस प्लेकार्ड में ‘दिल्ली से चेन्नई’ तक की साइकिल यात्रा के बाबत सूचना थी। 

जंतर-मंतर पर तैनात दिल्ली पुलिस के जवान उस नौजवान को धरना स्थल पर जाने से रोक रहे थे और वह बार-बार कह रहा था कि पुलिस चाहे तो उसकी साइकिल की जांच कर ले। पुलिसकर्मियों और उस नौजवान के बीच बहस बढ़ती गई और तमिलनाडु से आए कई और नौजवान पहुंच गए। लेकिन पुलिसकर्मियों ने साइकिल को अंदर नहीं ले जाने दिया। 

साइकिल यात्री एस. संजीवी

हालांकि जो नौजवान दिल्ली से चेन्नई तक की यात्रा का संकल्प ले चुका था, वह मायूस नहीं हुआ। उसने टूटी-फूटी हिंदी में जाे कुछ कहा, उसका मतलब यही था कि आप चाहे तो मुझे यहां रोक लें, लेकिन कलाईंगर के विचारों को आगे बढ़ाने से आपकी हुकूमत मुझे नहीं रोक सकती।

विरोध करती एक महिला डीएमके समर्थक

इस नौजवान का नाम है एस. संजीवी। तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले के अम्माइयारकूपम के इस निवासी के साथ बड़ी संख्या में तमिल युवक व युवतियां जंतर-मंतर पर मौजूद थे। मौका था तमिलनाडु में सत्तासीन डीएमके के छात्र प्रकोष्ठ (द्रविड़ियन स्टूडेंट्स फेडरेशन) द्वारा आहूत विरोध प्रदर्शन का। यह विरोध प्रदर्शन यूजीसी के द्वारा नियमावलियों में बदलाव व केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए किया गया था। मंच पर आसीन गणमान्यों में डीएमके के अनेक सांसद मौजूद थे, जिनमें टी.आर. बालू, कणिमोझी, ए. राजा आदि शामिल थे।

दरअसल, यूजीसी ने कुलपतियों की नियुक्ति व विश्वविद्यालयों को अनुदान देने संबंधी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका प्रारूप हाल ही में जारी किया गया है।

विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव

अपने संबोधन के दौरान टी.आर. बालू अंग्रेजी व तमिल भाषा का उपयोग कर रहे थे। अंग्रेजी में उनके संबोधन के अनुसार, केंद्र में सत्तासीन भाजपा देश के सभी शैक्षणिक संस्थानों को हिंदुत्व के रंग में रंग देना चाहती है। इसके लिए उसने विश्वविद्यालयों को आरएसएस का गढ़ बनाने की ठान ली है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों में कुलपतियों एवं अन्य पदों पर आरएसएस के लोगों को बहाल किया जा रहा है। टी.आर. बालू बार-बार केंद्र सरकार पर यह आरोप लगा रहे थे कि यूजीसी की नियमावली में बदलाव करके कुलपतियों की नियुक्ति में राज्यों के अधिकारों को खत्म किया जा रहा है। यह संघीय ढांचे को कमजोर करने की नीति है।

कुछ इसी तरह की बात बाद में आए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा इस देश को भाषा और धर्म सहित सभी स्तरों पर विभाजित कर देना चाहते हैं। मौजूदा दाैर में उनके निशाने पर शैक्षणिक संस्थाएं हैं, जिनका हिंदुकरण करके वे उन्हें उद्योगपतियों के हवाले कर देना चाहते हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि आज भाजपा और उसके नेता अपने ही दल के भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन को भूल गए हैं, जिन्होंने संसद में यह कहा था कि यदि शिक्षा को हम उद्योगपतियों के हवाले कर देंगे तो पूरा तंत्र उनका नौकर हो जाएगा। अखिलेश ने डीएमके के छात्र प्रकोष्ठ को बधाई देते हुए कहा कि यूजीसी छात्रों का भविष्य खराब करने की नीति पर चल पड़ा है, उसकी बागडोर ऐसी सरकार के हाथ में है, जिसका उद्देश्य उद्योगपतियों के हाथ में शिक्षा को देना है।

विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी पहुंचे और उसे संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों की अपनी-अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराएं हैं। संघीय व्यवस्था में सभी को सम्मान दिया गया है, ताकि देश एकजुट रहे और तरक्की करे। लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार इस संघीय व्यवस्था को ध्वस्त कर देना चाहती है। वह मनमाने तरीके से बदलाव कर देश की शैक्षणिक संस्थाओं का भगवाकरण कर रही है। इसका विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह यूजीसी के नियमों में किए गए बदलावों को वापस ले, ताकि राज्यों व केंद्र के बीच समन्वय बना रहे।

जंतर-मंतर पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन को आइसा, एसएफआई, छात्र राजद, सपा आदि राजनीतिक संगठनों का समर्थन हासिल था।

(संपादन : राजन/अनिल)

लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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