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मुस्लिम ओबीसी आंदोलन का एक महान योद्धा चला गया

शब्बीर भाई का जीवन निरंतर यात्रा का था। वे पूरे महाराष्ट्र में घूमते रहते थे। ऐसा शायद ही कोई गांव होगा, जहां पसमांदा मुस्लिम रहते हों और शब्बीर भाई वहां न पहुंचे हों। उन्होंने मुस्लिम समाज की 60-70 से अधिक जातियों की पहचान की और उन्हें मुख्यधारा में लाने का काम किया। आगे चलकर उनकी मदद से (दिसंबर 1994) मंडल आयोग मुस्लिम ओबीसी के लिए लागू हुआ। श्रद्धांजलि दे रहे हैं महाराष्ट्र विधान परिषद के पूर्व सदस्य कपिल पाटील

गत 22 मार्च, 2026 को एक सच्चे लोहियावादी और फुले, शाहू, आंबेडकर के विचारों की विरासत मुस्लिम समाज तक पहुंचाने वाले नेता शब्बीर अंसारी करीब 79 वर्ष की आयु में हमसे बिछड़ गए। वे केवल मुस्लिम ओबीसी तक सीमित नहीं थे, बल्कि महाराष्ट्र की ओबीसी आंदोलन की नींव रखने वालों में से एक थे।

सन् 1970 के दशक में ही वे महाराष्ट्र के ओबीसी आंदोलन के मूलपुरुष एडवोकेट जनार्दन पाटील के साथ काम कर रहे थे। महाराष्ट्र में गोपीनाथ मुंडे और छगन भुजबळ, तथा राष्ट्रीय स्तर पर शरद यादव, रामविलास पासवान और चौधरी ब्रह्मप्रकाश के साथ शब्बीर भाई ने काम किया। महान अभिनेता दिलीप कुमार भी पसमांदा मुस्लिम आंदोलन से जुड़े, तो वह भी शब्बीर भाई के कारण ही संभव हुआ। शायर हसन कमाल, अंजुमन-ए-इस्लाम के डॉ. ज़हीर काज़ी और बिहार के अली अनवर अंसारी जैसे लोगों के सहयोग से उन्होंने मुस्लिम ओबीसी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

जनार्दन पाटील की ओबीसी संगठन में शब्बीर भाई मुस्लिम ओबीसी विभाग के प्रमुख थे। लेकिन जब मैंने दोनों से कहा कि अलग संगठन होना चाहिए, तो दोनों ने इसे स्वीकार किया। शब्बीर भाई, जनार्दन पाटील और मैंने मिलकर महाराष्ट्र में मुस्लिम ओबीसी संगठन बनाने का निर्णय लिया। 1983 में जालना में हुए स्थापना सम्मेलन में चौधरी ब्रह्मप्रकाश, असगर अली इंजीनियर, आर. एस. गवई और रामविलास पासवान उपस्थित थे। आगे चलकर 1995 में इसी संगठन का रूपांतरण ऑल इंडिया मुस्लिम ओबीसी ऑर्गनाइजेशन में हुआ।

विलासराव देशमुख और माधवराव शिंदे का स्नेह भी शब्बीर भाई को मिला। उन्होंने कांग्रेस के माध्यम से दो विधायक चुनकर लाए– मिरज से हाफिज धतुरे और भिवंडी से रशीद ताहिर मोमिन।

दिवंगत शब्बीर अंसारी की तस्वीर

शब्बीर भाई का जीवन निरंतर यात्रा का था। वे पूरे महाराष्ट्र में घूमते रहते थे। ऐसा शायद ही कोई गांव होगा, जहां पसमांदा मुस्लिम रहते हों और शब्बीर भाई वहां न पहुंचे हों। उन्होंने मुस्लिम समाज की 60-70 से अधिक जातियों की पहचान की और उन्हें मुख्यधारा में लाने का काम किया। आगे चलकर, जब शरद पवार मुख्यमंत्री बने, तब उनकी मदद से (दिसंबर 1994) मंडल आयोग मुस्लिम ओबीसी के लिए लागू हुआ। उस समय मैं ही उन्हें पवार साहब के पास लेकर गया था।

गांवों में रहने वाले पिछड़े मुस्लिमों के नाम, उनके व्यवसाय और सामाजिक स्थिति की जानकारी पवार साहब को थी। लेकिन शब्बीर भाई ने जिस तरह इन सभी को संगठित किया था, उसे देखकर वे भी चकित रह गए। उन्होंने निर्णय लिया और इन वंचित मुस्लिम जातियों को आरक्षण और सुविधाएं मिलीं।

जुलाहा, बुनकर, मोमिन, अत्तार, मेहतर, बकर कसाब, कुरैशी, मुलानी, अस्वलवाले, माकड़वाले, छप्परबंद, डफलीवाले, रंगरेज, रंगारी, गुजर, मुजावर, मदारी, पिंजारी, नदाफ, पाथरवट, तांबोली, फकीर, अंसारी जैसे वंचित समाजों के बच्चे अब शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पहले मुस्लिम समाज से डॉक्टर या इंजीनियर बनने वाले बच्चे गिने-चुने होते थे, लेकिन अब हजारों बच्चों को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। यह सब केवल शब्बीर अंसारी के कारण संभव हुआ।

पसमांदा समाज के समर्थन में : बाएं से रामविलास पासवान, शब्बीर अंसारी और दिलीप कुमार (तस्वीर साभार राउंड टेबुल इंडिया)

स्वतंत्रता के बाद मुस्लिम समाज की पिछड़ी जातियों में इतना बड़ा परिवर्तन लाने वाला शब्बीर अंसारी जैसा दूसरा नेता नहीं हुआ। इतना बड़ा कार्य करने के बावजूद वे जीवनभर साधारण टिन के घर में रहे, एक फकीर की तरह जीवन बिताया।

हमारे समाज में लोगों की कद्र अक्सर उनके जाने के बाद ही होती है। स्वतंत्रता आंदोलन में पसमांदा मुस्लिमों का नेतृत्व अब्दुल कयूम अंसारी ने किया था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद आरक्षण आंदोलन के जरिए उन्हें संगठित करने का काम शब्बीर अंसारी ने किया। उनके सहयोगी अली अनवर अंसारी को उनके काम के आधार पर नीतीश कुमार ने सीधे राज्यसभा सांसद बनाया। शब्बीर भाई के कारण अनेक लोगों को राजनीतिक शक्ति मिली, लेकिन उन्हें स्वयं न कोई सरकारी सम्मान मिला, न पद्म पुरस्कार।

शब्बीर भाई का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ी क्षति है। मैं पिछले 45-46 वर्षों से उनके साथ काम कर रहा था। यह साथ अब समाप्त हो गया।

शब्बीर भाई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि! अलविदा!

(संपादन : नवल/अनिल)

लेखक के बारे में

कपिल पाटील

लेखक महाराष्ट्र के समाजवादी, मजदूर और ओबीसी आंदोलनों के वरिष्ठ नेता तथा महाराष्ट्र विधान परिषद के पूर्व सदस्य हैं

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