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बिहार : भरत तिवारी एनकाउंटर पर चढ़ा जाति का रंग

हालिया एनकाउंटर में मारे गए व्यक्ति का नाम भरत तिवारी है, जो ब्राह्मण जाति का है। एक ब्राह्मण की हत्या के बाद ब्राह्मण नेताओं की पूरी जमात अपराधी के पक्ष में खड़ी हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे से लेकर वर्तमान मंत्री मिथिलेश तिवारी तक ब्राह्मण की हत्या का मातम मना रहे हैं। पढ़ें, वीरेंद्र यादव की यह रपट

बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड का बिलौटी गांव चर्चा का नया केंद्र बन गया है। इसी गांव में बीते 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में एक अपराधी भरत भूषण तिवारी का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया था। उस पर पुलिसकर्मियों को पिस्तौल दिखाकर धमकाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने कहा है कि उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराई जा रही है, जिसका नेतृत्व सेवानिवृत्त जज विनोद कुमार सिन्हा कर रहे हैं। बात केवल यहीं तक सीमित नहीं है। न्यायिक जांच के क्रम में ही पुलिस ने भरत तिवारी के परिवार के खिलाफ दर्ज की गयी प्राथमिकी में से भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी का नाम हटा दिया है।

इसके एक दिन पहले 24 जून को एक प्राथमिकी शाहपुर थाना में दर्ज की गई। प्राथमिकी में शाहपुर थाना के अध्यक्ष राजेश मालाकार व अन्य पुलिसकर्मियों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। जबकि जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश शर्मा, जिनके नेतृत्व में 17 जून को पुलिस ने भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर किए जाने की बात तिवारी के परिजनों द्वारा कही जा रही है, उन्हें इस प्राथमिकी में नामजद अभियुक्त नहीं बनाया गया है।

एनकाउंटर* और हाफ एनकाउंटरों** का दौर

तारीखघटना की प्रकृतिस्थानमृतक/पीड़ित
22 अप्रैल, 2026हाफ एनकाउंटरपटनादिलीप कुमार यादव
26 अप्रैल, 2026हाफ एनकाउंटरनवादामिंटू यादव
28 अप्रैल, 2026एनकाउंटरभागलपुररामधनी यादव
3 मई, 2026एनकाउंटरसीवानसोनू यादव
13 मई, 2026 एनकाउंटरपटनाअवधेश साव, बिदेशिया कुमार (वैश्य/अति पिछड़ा)
17 जून, 2026एनकाउंटरभोजपुरभरत भूषण तिवारी

*मौके पर मौत; ** पैर में गोली मारी गई

पुलिस एनकाउंटर और अपराध की यह घटना अब पूरी तरह जातीय और राजनीतिक रंग में डूब चुकी है। हालिया एनकाउंटर में मारे गए व्यक्ति का नाम भरत तिवारी है, जो ब्राह्मण जाति का है। एक ब्राह्मण की हत्या के बाद ब्राह्मण नेताओं की पूरी जमात अपराधी के पक्ष में खड़ी हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे से लेकर वर्तमान मंत्री मिथिलेश तिवारी तक ब्राह्मण की हत्या का मातम मना रहे हैं। यह वोट का मुद्दा भी बन गया है। इसलिए राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने हिसाब से इस पर प्रतिक्रिया दे रही हैं।

इसी क्रम में 24 जून को बिलौटी गांव में शोकसभा के नाम पर महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें शाहाबाद के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के ब्राह्मण भी बड़ी संख्या में जुटे थे। इनके अलावा इस आयोजन में करणी सेना और परशुराम सेना के लोग भी शामिल हुए। इसमें जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर, जो ब्राह्मण जाति से हैं, भी शामिल हुए और परिजनों के लिए न्याय की मांग की। इधर, राजद सांसद सुधाकर सिंह ने भी पुलिस कार्रवाई को गलत ठहराया है।

भरत तिवारी की स्मृति में शोकसभा के बहाने उसके पैतृक गांव बिलौटी में जमा हुए करणी सेना, परशुराम सेना और अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के लोग

इस घटना के परिप्रेक्ष्य में बिहार भर में पुलिस की कार्रवाई पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि यह राज्य सरकार की भ्रमित करने वाली नीति का परिणाम है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिसकर्मियों को मनमानी के लिए उकसाया था और उसी का परिणाम भरत तिवारी एनकाउंटर है। सम्राट चौधरी की सरकार में एनकाउंटर के नाम पर कई यादव अपराधियों का एनकाउंटर किया गया। कुछ लोगों को कथित रूप से थाने से भगाकर गोली मारी गयी। सरकार ने इन घटनाओं का महिमामंडन किया और इसे कानून का राज बताया।

इसी कड़ी में पुलिस भोजपुर जिले में एक ब्राह्मण का एनकाउंटर कर दिया। ब्राह्मण का एनकाउंटर होते ही कानून के राज की धज्जियां भाजपा के नेताओं ने ही उड़ा दी। पुलिस कार्रवाई की निंदा की और अपराधी के पक्ष में बयान भी देते रहे। उसके लिए आयोजित महापंचायत में भाजपा के कई वर्तमान और पूर्व विधायक शामिल हुए। मतलब भाजपा के ब्राह्मणों ने भरत तिवारी मामले में बगावत कर दी है।

इसके साथ ही भाजपा की सवर्ण लाॅबी भरत तिवारी एनकांउटर की आड़ में सीएम सम्राट चौधरी को निशाना बना रही है। भाजपा के एक बड़े हिस्से को सम्राट चौधरी सीएम के रूप में स्वीकार नहीं हैं। भरत तिवारी प्रकरण उन लोगों के लिए संजीवनी बन गई है।

इधर, इस मामले की न्यायिक जांच शुरू हो गई है। सरकार की ओर से गठित एक सदस्यीय न्यायिक आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा ने 25 जून को बिलौटी पहुंचकर भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की और न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। आयोग छह महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

वीरेंद्र यादव

फारवर्ड प्रेस, हिंदुस्‍तान, प्रभात खबर समेत कई दैनिक पत्रों में जिम्मेवार पदों पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र यादव इन दिनों अपना एक साप्ताहिक अखबार 'वीरेंद्र यादव न्यूज़' प्रकाशित करते हैं, जो पटना के राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चित है

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