h n

दलित-बहुजन पेज 3, जून 2014

झारखंड के चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ता व लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग को महाराष्ट्र के यवतमाल के समतापर्व प्रतिष्ठान द्वारा 11 मई को 'क्रांतिज्योति सवित्रीबाई फुले पुरस्कार 2014' से सम्मानित किया गया है

आदिवासी बुद्धिजीवि सम्मानित

 

डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ को ‘शिक्षण मैत्री सम्मान’

वर्धा : चर्चित युवा आदिवासी लेखक-चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ को ‘लॉर्ड बुद्धा मैत्री संघ’ (लॉर्ड बुद्धा टीवी
चैनल), महाराष्ट्र की तरफ से ‘शिक्षण मैत्री सम्मान’ से पिछले 27 अप्रैल को सम्मानित किया गया। डॉ. सुनील को यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में बाबासाहेब आंबेडकर की वैचारिकी का अलख जगाने के लिए प्रदान किया गया है। डॉ. सुनील मूलत : चंपारण (बिहार) जिले के गोंड आदिवासी हैं और इन्होंने देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से शिक्षा प्राप्त की है। फिलहाल डॉ. सुनील
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। -रजनीश कुमार आंबेडकर

 

ग्लैडसन को क्रांतिज्योति सवित्रीबाई फुले पुरस्कार

यवतमाल : झारखंड के चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ता व लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग को महाराष्ट्र के यवतमाल के समतापर्व प्रतिष्ठान द्वारा 11 मई को ‘क्रांतिज्योति सवित्रीबाई फुले पुरस्कार 2014’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार आदिवासी मुद्दों को अपने संघर्ष और लेखन द्वारा देशविदेश में दृढ़ता से उठाने के लिए दिया गया है। ग्लैडसन डुंगडुंग की पुस्तकें ‘हूज कंट्री इज इट एनीवे’, ‘क्रॉसफायर’, ‘विकास के कब्रगाह’, ‘झारखंड में अस्मिता संघर्ष’, ‘नगड़ी का नगाड़ा’ व ‘उलगुलान का सौदा’ काफी चर्चित रही हैं। -राजन कुमार

 

 

फारवर्ड प्रेस के जून, 2014 अंक में प्रकाशित


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, संस्कृति  व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। द मार्जिनालाज्ड प्रकाशन, इग्नू रोड, दिल्ली से संपर्क करें। मोबाइल : +919968527911, ईमेल : info@forwardmagazine.in

लेखक के बारे में

एफपी डेस्‍क

संबंधित आलेख

‘हेरि महां दरद दिवाणी म्हारा दरद न जाण्या कोय’
पति की मृत्यु और पुनर्विवाह न होने की स्थिति में मीरा का यह पक्ष अधिक मुखरता से अभिव्यक्त हुआ है। उन्हें कुछ भी मानने...
‘पसमांदा जन आंदोलन 1998’ : मुस्लिम समाज में जातिवाद और हक की जद्दोजहद की दास्तान
मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में यह किताब और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है। पसमांदा समाज के प्रतिनिधित्व की स्थिति आज भी लगभग...
वर्चस्ववादी सत्ता की मुखालफत करतीं मोहन मुक्त की कविताएं
मोहन मुक्त सांस्कृतिक वर्चस्व को सत्ता का सबसे चालाक रूप मानते हैं। वे कहते हैं कि मिथक, परंपरा, धर्म और भाषा के ज़रिए शोषण...
निष्ठा का सवाल उठाए अरसा गुज़र गया!
कंवल भारती की कविताओं पर सरसरी नज़र दौड़ाने से यही पता चलता है कि उनके अंदर समता को लेकर बेचैनी है। वे महीन से...
प्रगतिशीलों के बीच वीरेंद्र यादव के होने का निहितार्थ
वीरेंद्र यादव का सीना ‘अपनों’ के हाथों होते रहे ऐसे अपमानों से छलनी था। वे अपना ज़ख़्मी दिल लिए सेकुलर-प्रगतिशील विचारों की लड़ाई लड़ते...